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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   External medications being written even after the opening of the Public Health Center

जनऔषधि केंद्र खुलने के बाद भी लिखी जा रहीं बाहर की दवाएं

Tue, 17 Jul 2018 12:36 AM IST
प्रतापगढ़ ब्यूरो
प्रतापगढ़ ब्यूरो Updated Tue, 17 Jul 2018 12:36 AM IST
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 जिला और महिला अस्पताल में रविवार को जन औषधि केंद्र तो खुल गए, लेकिन मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। चिकित्सक कमीशन वाली दवाएं लिखकर मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोरों पर भेज रहे हैं। इससे महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर हैं, जबकि जनऔषधि केंद्र पर वही दवाएं तिहाई से भी कम दाम में उपलब्ध हैं। जन औषधि केंद्रों पर सोमवार को सिर्फ 40 पत्ता ही दवाओं की बिक्री हो सकी।
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रविवार को जिला और महिला अस्पताल में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का उद्घाटन किया गया। सरकार का दावा है कि इन केंद्रों के खुल जाने से मरीजों को काफी सहूलियत होगी। बाजार से बेहद कम दामों में लोगों को जेनेरिक दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। यह दवाएं बाजार में बिकने वाली दवाओं के मुकाबले काफी सस्ती हैं। डॉक्टरों द्वारा लिखी गई जो दवा बाजार में डेढ़ से दो सौ रुपये पत्ता मिल रही है, वही दवा प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर 50 से 70 रुपये में उपलब्ध है। इसके बाद भी डॉक्टर कमीशन के फेर में मरीजों को बाहर की दवा लिख रहे हैं। सोमवार को जिला अस्पताल में 700 के करीब में ओपीडी हुआ है तो महिला अस्पताल में 675 मरीजों ने पंजीयन कराने के बाद अपना इलाज कराया। मगर प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से कुल 40 मरीजों ने ही दवाएं खरीदीं। ज्यादातर लोगों को मेडिकल स्टोर पर भेज दिया गया। लौवार निवासी राजू सिंह ने डॉक्टर आरसी त्रिपाठी से इलाज कराया। डॉक्टर आरसी त्रिपाठी ने उसे बाजार से दवा खरीदने के लिए एक पर्ची थमा दी। वह पर्ची लेकर जिला अस्पताल के जनऔषधि केंद्र पर पहुंचा, लेकिन बाजार की दवा होने के कारण उसे नहीं मिली। इससे वह परेशान रहा। इसी तरह कोहड़ौर के नारायनपुर निवासी विकास को भी चिकित्सकों ने मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए भेज दिया। इटवा निवासी मेवालाल के बेटे का हाथ टूट गया था। डॉॅक्टर एसके शर्मा ने पांच दिन की दवा मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए भेजा दिया। विरोध करने पर जिला अस्पताल में मिलने वाली दो दवाएं लिख दीं। वह बार-बार कहता रहा कि पीएम जन औषधि केंद्र की दवा लिख दीजिए, मगर डॉक्टर ने उसकी एक भी नहीं सुनी। कई मरीज चिकित्सकों के कहने के बाद मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर लाकर दिखा भी रहे थे। रोजाना की तरह सोमवार को भी जिला अस्पताल के आसपास के  मेडिकल स्टोरों पर मरीजों की भीड़ लगी रही। डॉक्टरों के कमीशन वाली दवाओं की बिक्री जोरों पर थी।
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चिकित्सकों को अभी यह नहीं पता है कि जनऔषधि केंद्र पर कौन-कौन सी दवाएं उपलब्ध हैं। इसके चलते बाहर की दवाएं लिख दी होंगी। वैसे ज्यादातर दवाएं सरकारी अस्पताल में उपलब्ध हैं, इसलिए जन औषधि केंद्र की नहीं लिखी जाती हैं। बहुत सी दवाएं जन औषधि केंद्र पर अभी उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। सभी चिकित्सकों से एक बार बता दिया जाएगा। यदि इसके बाद भी वह बाहर की दवाएं लिखते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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योगेंद्र यति, सीएमएस, जिला अस्पताल।

ज्यादातर दवाएं महिला अस्पताल में उपलब्ध हैं। जो दवाएं नहीं हैं, उन्हें खरीदने के लिए तीमारदारों को जन औषधि केंद्र पर ही भेजा जाता है। जन औषधि केंद्र पर नहीं मिलने पर मेडिकल स्टोर से खरीदते होंगे। मेडिकल स्टोर की दवा नहीं लिखी जा रही है।
रीता दूबे, सीएमएस, महिला अस्पताल।
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