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बिल जमा करने के बाद भी राजकीय विद्यालयों को बना दिया लाखों का बकाएदार
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electricity
इसे विद्युत विभाग की लापरवाही न कहें तो और क्या कहें। राजकीय विद्यालयों ने लाखों का बकाया बिल जमा किया गया, मगर फिर भी उन्हें बकाएदार बना दिया। जमा किए गए बिल की धनराशि से भी अधिक का उन्हें बकाएदार बनाया गया है। बिल देख प्रधानाचार्य चक्कर खा गए। बिल संशोधन कराने को लेकर अब बिजली विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
जीजीआईसी आसपुर देवसरा का 9 लाख का बिल बकाया था। इसी तरह जीआईसी पूरब गांव 6 लाख, जीजीआईसी खरवई 75 हजार, जीजीआईसी बिहार 70 हजार और जीजीआईसी मानिकपुर का डेढ़ लाख। वर्ष 2018 में विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने सरचार्ज माफी योजना का लाभ उठाया। योजना के तहत सभी ने पूरा बिल जमा करा दिया।
जमा बिल की रसीद भी ली। मगर कर्मचारियों ने बिल की फीडिंग में लापरवाही बरती। एक भी कालेज का बिल कंप्यूटर में फीड नहीं किया। इधर नए वर्ष यानी 2019 में जब सरचार्ज माफी योजना की पुन: शुरुआत हुई तो फिर से इन सभी कालेजों को बकाएदार बना दिया गया। बिल कालेजों में पहुंचा तो प्रधानाचार्यों के होश उड़ गए।
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करीब एक माह से बिल जमा करने के लिए विभागीय कर्मचारी विद्युत विभाग के कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, मगर उनकी कोई सुनने को तैयार नहीं है। अधीक्षण अभियंता सत्यदेव सिंह ने बताया कि जमा बिल की रसीद लेकर कार्यालय पर संपर्क करें, बिल संशोधन हो जाएगा।
जल रहे गिनती के बल्ब और कनेक्शन 10 किलोवाट का
राजकीय विद्यालयों में मनमाने तरीके से भार बढ़ाया गया है। विद्यालयों में महज गिनती के बल्ब जल रहे हैं। मगर उनके कनेक्शन की क्षमता 10 किलोवाट की कर दी गई है। इसकी भी शिकायत विभागीय अधिकारियों से की गई है, मगर उनकी कोई सुनने को तैयार नहीं है।
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जीजीआईसी आसपुर देवसरा का 9 लाख का बिल बकाया था। इसी तरह जीआईसी पूरब गांव 6 लाख, जीजीआईसी खरवई 75 हजार, जीजीआईसी बिहार 70 हजार और जीजीआईसी मानिकपुर का डेढ़ लाख। वर्ष 2018 में विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने सरचार्ज माफी योजना का लाभ उठाया। योजना के तहत सभी ने पूरा बिल जमा करा दिया।
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जमा बिल की रसीद भी ली। मगर कर्मचारियों ने बिल की फीडिंग में लापरवाही बरती। एक भी कालेज का बिल कंप्यूटर में फीड नहीं किया। इधर नए वर्ष यानी 2019 में जब सरचार्ज माफी योजना की पुन: शुरुआत हुई तो फिर से इन सभी कालेजों को बकाएदार बना दिया गया। बिल कालेजों में पहुंचा तो प्रधानाचार्यों के होश उड़ गए।
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करीब एक माह से बिल जमा करने के लिए विभागीय कर्मचारी विद्युत विभाग के कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, मगर उनकी कोई सुनने को तैयार नहीं है। अधीक्षण अभियंता सत्यदेव सिंह ने बताया कि जमा बिल की रसीद लेकर कार्यालय पर संपर्क करें, बिल संशोधन हो जाएगा।
जल रहे गिनती के बल्ब और कनेक्शन 10 किलोवाट का
राजकीय विद्यालयों में मनमाने तरीके से भार बढ़ाया गया है। विद्यालयों में महज गिनती के बल्ब जल रहे हैं। मगर उनके कनेक्शन की क्षमता 10 किलोवाट की कर दी गई है। इसकी भी शिकायत विभागीय अधिकारियों से की गई है, मगर उनकी कोई सुनने को तैयार नहीं है।