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प्राइवेट छात्र नहीं दे पाएंगे एग्जाम
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Thu, 07 Jan 2016 11:17 PM IST
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एक तरफ जहां सरकार लोगों को अधिक से अधिक शिक्षित करने की कवायद में लगी है, वहीं महाविद्यालय प्रशासन छात्रों के शिक्षा ग्रहण करने में बाधक बन गया है। उनका व्यक्तिगत परीक्षा फार्म ही नहीं लिया जा रहा है। जबकि छात्राओं का परीक्षा फार्म अग्रसारित कर दिया जा रहा है। ऐसे में हजारों छात्र परीक्षा देने व पढ़ाई करने से वंचित रह जाएंगे। महाविद्यालय प्रशासन की इस लापरवाही से अभिभावकों व छात्रों में रोष है।
इन दिनों महाविद्यालयों में स्नातक व परास्नातक कक्षाओं के लिए व्यक्तिगत परीक्षा फार्म जमा किए जा रहे हैं। सुबह से ही छात्र-छात्राओं व अभिभावकों की भीड़ महाविद्यालय पहुंच रही है, लेकिन महाविद्यालय प्रशासन छात्रों के शिक्षा ग्रहण करने के मार्ग में बाधक बन गया है। उनका फार्म ही नहीं लिया जा रहा है। उन्हें यह कह कर वापस कर दिया जा रहा है कि महाविद्यालय में पहले से ही संस्थागत परीक्षार्थियों की संख्या इतनी अधिक है कि उनकी परीक्षा कराने में परेशानी होती है। वहीं इससे भी अधिक प्राइवेट परीक्षार्थी प्रवेश ले लेते हैं। जिससे परीक्षा कराने के दौरान छात्र-छात्राओं की भीड़ अधिक हो जाती है। संसाधन के अभाव में सही से परीक्षा कराने में दिक्कत होती है।
ऐसे में अभिभावकों व छात्र-छात्राओं के कोपभाजन का शिकार महाविद्यालय को होना पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ छात्राओं का फार्म जमा किया जा रहा है। छात्रों का कहना है कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। संसाधन की कमी होने का नियम छात्राओं पर भी लागू होना चाहिए। छात्रों को ही फार्म भरने से क्यों वंचित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय नियम के मुताबिक बिना भेदभाव किए सभी छात्र-छात्राओं का परीक्षा फार्म जमा किया जाना चाहिए। इसके बावजूद महाविद्यालय प्रशासन मनमानी कर रहा है। मामले में एमडीपीजी के जनसूचना अधिकारी डॉ. सीएन पांडेय ने बताया कि परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों के बैठने के लिए संसाधन की कमी हो जाती है। संस्थागत परीक्षार्थी की संख्या इतनी ज्यादा हो जाती है कि व्यक्तिगत परीक्षार्थियों का प्रवेश लेने में दिक्कत होती है। उन्होंने कहा कि सीटें बचने पर छात्रों का भी फार्म जमा किया जाएगा।
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इन दिनों महाविद्यालयों में स्नातक व परास्नातक कक्षाओं के लिए व्यक्तिगत परीक्षा फार्म जमा किए जा रहे हैं। सुबह से ही छात्र-छात्राओं व अभिभावकों की भीड़ महाविद्यालय पहुंच रही है, लेकिन महाविद्यालय प्रशासन छात्रों के शिक्षा ग्रहण करने के मार्ग में बाधक बन गया है। उनका फार्म ही नहीं लिया जा रहा है। उन्हें यह कह कर वापस कर दिया जा रहा है कि महाविद्यालय में पहले से ही संस्थागत परीक्षार्थियों की संख्या इतनी अधिक है कि उनकी परीक्षा कराने में परेशानी होती है। वहीं इससे भी अधिक प्राइवेट परीक्षार्थी प्रवेश ले लेते हैं। जिससे परीक्षा कराने के दौरान छात्र-छात्राओं की भीड़ अधिक हो जाती है। संसाधन के अभाव में सही से परीक्षा कराने में दिक्कत होती है।
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ऐसे में अभिभावकों व छात्र-छात्राओं के कोपभाजन का शिकार महाविद्यालय को होना पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ छात्राओं का फार्म जमा किया जा रहा है। छात्रों का कहना है कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। संसाधन की कमी होने का नियम छात्राओं पर भी लागू होना चाहिए। छात्रों को ही फार्म भरने से क्यों वंचित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय नियम के मुताबिक बिना भेदभाव किए सभी छात्र-छात्राओं का परीक्षा फार्म जमा किया जाना चाहिए। इसके बावजूद महाविद्यालय प्रशासन मनमानी कर रहा है। मामले में एमडीपीजी के जनसूचना अधिकारी डॉ. सीएन पांडेय ने बताया कि परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों के बैठने के लिए संसाधन की कमी हो जाती है। संस्थागत परीक्षार्थी की संख्या इतनी ज्यादा हो जाती है कि व्यक्तिगत परीक्षार्थियों का प्रवेश लेने में दिक्कत होती है। उन्होंने कहा कि सीटें बचने पर छात्रों का भी फार्म जमा किया जाएगा।
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