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भूखमरी की नौबत आने पर नागपुर से पैदल ही गोंडा के लिए निकल पड़े दो युवक
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due to lockdown and hunger two boys are going on foot from nagpur to gonda
- फोटो : PRATAPGARH
पेट की आग बुझाने के लिए जब कोई जतन नहीं सामने नहीं दिखा तब नागपुर में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले दो युवक पैदल ही घर के लिए निकल पड़े। 6 दिन बाद बेल्हा पहुंचे दोनों युवकों के पैरों में सूजन आ गई थी। उनसे एक कदम भी चला नहीं जा रहा था। उनकी दशा देख पुलिसकर्मियों ने गोंडा जा रहे ट्रक पर बैठाया। पुलिसकर्मियों को मदद करते देख दोनों युवकों की आंखों में आंसू आ गए।
गोंडा के जनवरिया निवासी ओमप्रकाश व धनीराम नागपुर में दिहाड़ी मजदूरी करते थे। लाकडाउन के बाद कुछ दिनों तक तो सबकुछ ठीक ठाक चलता रहा, लेकिन समय के साथ उनके सामने खाने की किल्लत भी आने लगी। आसपास के लोगों के अलावा परिचितों ने भी कुछ मदद की, लेकिन जब फांकाकशी की नौबत आई तो दोनों ने घर जाने की ठान ली। छह दिन पहले दोनों नागपुर से घर के लिए निकले। अधिकांश रास्ता दोनों को पैदल ही चलना पड़ा। पुलिस से बचने के लिए रेलवे लाइन भी पकड़ते व छोड़ते रहे।
लाई, चना व बिस्किट साथ ले रखा था। जिसे खाते हुए आगे बढ़ते रहे। स्टेशनों पर रुककर रात बिताई। वहां कुछ लोगों ने भोजन कराया। कुछ दूरी तक वाहन भी मिल जाते रहे। अधिकांश सफर सभी ने पैदल ही तय किया। रविवार की रात दोनों ने जिला अस्पताल पहुंचकर अपनी जांच कराई। पैरों में सूजन आने के कारण दोनों बुरी तरह थक गए थे। पैदल चलने में दोनों असमर्थ हो गए थे। फिर भी उनका हौसला कम नहीं हुआ था। चौक घंटाघर पर उनकी दास्ता सुनकर पुलिसकर्मियों को तरस आया। दोनों को गोंडा जा रहे ट्रक पर बैठा दिया।
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सोमवार को शहर के एमडीपीजी कालेज के करीब एक युवक दिल्ली से आया। वह बुखार से तप रहा था। बुखार के चलते वह बेहोश हो जाता था। लोगों की सूचना पर डायल 112 पहुंच गई। एंबुलेेंस को सूचना दी गई, लेकिन वह नहीं आई। जिससे काफी देर तक युवक सड़क किनारे पड़ा रहा। बाद में डायल 112 वालों ने लोगों की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां उसका उपचार चल रहा है। बार-बार बेहोश हो जाने के कारण वह कुछ बता नहीं पा रहा।
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गोंडा के जनवरिया निवासी ओमप्रकाश व धनीराम नागपुर में दिहाड़ी मजदूरी करते थे। लाकडाउन के बाद कुछ दिनों तक तो सबकुछ ठीक ठाक चलता रहा, लेकिन समय के साथ उनके सामने खाने की किल्लत भी आने लगी। आसपास के लोगों के अलावा परिचितों ने भी कुछ मदद की, लेकिन जब फांकाकशी की नौबत आई तो दोनों ने घर जाने की ठान ली। छह दिन पहले दोनों नागपुर से घर के लिए निकले। अधिकांश रास्ता दोनों को पैदल ही चलना पड़ा। पुलिस से बचने के लिए रेलवे लाइन भी पकड़ते व छोड़ते रहे।
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लाई, चना व बिस्किट साथ ले रखा था। जिसे खाते हुए आगे बढ़ते रहे। स्टेशनों पर रुककर रात बिताई। वहां कुछ लोगों ने भोजन कराया। कुछ दूरी तक वाहन भी मिल जाते रहे। अधिकांश सफर सभी ने पैदल ही तय किया। रविवार की रात दोनों ने जिला अस्पताल पहुंचकर अपनी जांच कराई। पैरों में सूजन आने के कारण दोनों बुरी तरह थक गए थे। पैदल चलने में दोनों असमर्थ हो गए थे। फिर भी उनका हौसला कम नहीं हुआ था। चौक घंटाघर पर उनकी दास्ता सुनकर पुलिसकर्मियों को तरस आया। दोनों को गोंडा जा रहे ट्रक पर बैठा दिया।
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सोमवार को शहर के एमडीपीजी कालेज के करीब एक युवक दिल्ली से आया। वह बुखार से तप रहा था। बुखार के चलते वह बेहोश हो जाता था। लोगों की सूचना पर डायल 112 पहुंच गई। एंबुलेेंस को सूचना दी गई, लेकिन वह नहीं आई। जिससे काफी देर तक युवक सड़क किनारे पड़ा रहा। बाद में डायल 112 वालों ने लोगों की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां उसका उपचार चल रहा है। बार-बार बेहोश हो जाने के कारण वह कुछ बता नहीं पा रहा।