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जिले में सूखे जैसे हालात, जुलाई माह में एक भी दिन नहीं हुई बारिश
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जिले में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। जुलाई माह में एक दिन भी बारिश नहीं हुई है। 25 जून के बाद से बादल रूठे हुए है। इससे खेतों में दरारें पड़ गई हैं। किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। यही हालात रहे तो धान की उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
जिले में धान की खेती प्रमुख रूप से होती है। इस बार धान की फसल का दायरा भी बढ़ा है। करीब 98 हजार हेक्टेअर धान की रोपाई का लक्ष्य है। मई माह में समुद्री तूफान की दस्तक से अच्छी बारिश हुई। 25 मई तक रुक-रुक बारिश हुई। इस दौरान किसानों ने धान की नर्सरी तैयार कर ली, मगर धान की रोपाई के समय अब बादल रूठ गए हैं। 25 जून के बाद से बारिश नहीं हुई हैं। तल्ख धूप के बीच पश्चिमी हवाएं रफ्तार भरी रही हैं। उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल हैं। तापमान में भी तेजी से इजाफा हो रहा है।
बारिश न होने से जिले में सूखे जैसे हालात हो गए हैं। जबकि जुलाई माह बारिश का मुख्य समय माना जाता है। आलम यह है कि खेतों में जुताई के बाद अब बारिश न होने से धूल उड़ रही हैं। बारिश न होने से धान की रोपाई पिछड़ रही है। अगैती रोपाई करने वाले किसानों के चेहरे की रंगत उड़ चुकी है। बारिश के अभाव में उनकी फसल सूख रही है।
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किसानों का कहना है कि धान की नर्सरी तैयार हुए सप्ताह भर से अधिक हो गए हैं, मगर खेत में पानी नहीं है। जुताई किए गए खेतों से धूल उड़ रही है। यही हाल रहा तो इस बार धान की फसल से लागत तक निकलना मुश्किल हो जाएगा। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी सिंह ने बताया कि बारिश न होने से रोपाई पिछड़ रही है। अगैती फसलों पर संकट खड़ा हो गया है। इससे पैदावार पर भी असर पड़ेगा।
अब तक सिर्फ 40 प्रतिशत धान की रोपाई
जिले में अब तक सिर्फ चालीस प्रतिशत धान की रोपाई हुई है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी सिंह ने बताया कि जिले में अगैती धान की रोपाई 25 प्रतिशत हुई है। जबकि जुलाई माह में पंपिंगसेट व नहरों से किसान किसी तरह 15 प्रतिशत धान की रोपाई कर सके हैं।
25 से 30 प्रतिशत घट सकता है उत्पादन
जिला कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी सिंह ने बताया कि आम तौर पर 25 दिन में धान की नर्सरी तैयार हो जाती है। मौजूदा समय में जिले के किसानों की धान की नर्सरी तैयार है। बारिश न होने से रोपाई नहीं हो पा रही है। इसका पैदावार पर असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि 25 से 30 प्रतिशत उत्पादन घट सकता है।
जल्द ही बारिश के आसार
वातावरण में पश्चिमी हवाओं ने पैठ जमा ली है। चार दिन से पश्चिमी हवाएं चल रही हैं। इससे जल्द ही बारिश के आसार बन रहे हैं। आने वाले दिनों में अच्छी बारिश की उम्मीद जताई जा रही है।
मई से 25 जून तक 350 मिमी बारिश
20 मई से 24 जून तक जिले में 350 मिमी रिकार्ड बारिश हुई। समुद्री तूफान की दस्तक के बाद आसमान में डेरा जमाए बादलों ने झमाझम बारिश की। मगर 25 जून के बाद बादल सिर्फ उमड़-घुमड़ तक ही सीमित हैं।
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जिले में धान की खेती प्रमुख रूप से होती है। इस बार धान की फसल का दायरा भी बढ़ा है। करीब 98 हजार हेक्टेअर धान की रोपाई का लक्ष्य है। मई माह में समुद्री तूफान की दस्तक से अच्छी बारिश हुई। 25 मई तक रुक-रुक बारिश हुई। इस दौरान किसानों ने धान की नर्सरी तैयार कर ली, मगर धान की रोपाई के समय अब बादल रूठ गए हैं। 25 जून के बाद से बारिश नहीं हुई हैं। तल्ख धूप के बीच पश्चिमी हवाएं रफ्तार भरी रही हैं। उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल हैं। तापमान में भी तेजी से इजाफा हो रहा है।
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बारिश न होने से जिले में सूखे जैसे हालात हो गए हैं। जबकि जुलाई माह बारिश का मुख्य समय माना जाता है। आलम यह है कि खेतों में जुताई के बाद अब बारिश न होने से धूल उड़ रही हैं। बारिश न होने से धान की रोपाई पिछड़ रही है। अगैती रोपाई करने वाले किसानों के चेहरे की रंगत उड़ चुकी है। बारिश के अभाव में उनकी फसल सूख रही है।
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किसानों का कहना है कि धान की नर्सरी तैयार हुए सप्ताह भर से अधिक हो गए हैं, मगर खेत में पानी नहीं है। जुताई किए गए खेतों से धूल उड़ रही है। यही हाल रहा तो इस बार धान की फसल से लागत तक निकलना मुश्किल हो जाएगा। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी सिंह ने बताया कि बारिश न होने से रोपाई पिछड़ रही है। अगैती फसलों पर संकट खड़ा हो गया है। इससे पैदावार पर भी असर पड़ेगा।
अब तक सिर्फ 40 प्रतिशत धान की रोपाई
जिले में अब तक सिर्फ चालीस प्रतिशत धान की रोपाई हुई है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी सिंह ने बताया कि जिले में अगैती धान की रोपाई 25 प्रतिशत हुई है। जबकि जुलाई माह में पंपिंगसेट व नहरों से किसान किसी तरह 15 प्रतिशत धान की रोपाई कर सके हैं।
25 से 30 प्रतिशत घट सकता है उत्पादन
जिला कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी सिंह ने बताया कि आम तौर पर 25 दिन में धान की नर्सरी तैयार हो जाती है। मौजूदा समय में जिले के किसानों की धान की नर्सरी तैयार है। बारिश न होने से रोपाई नहीं हो पा रही है। इसका पैदावार पर असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि 25 से 30 प्रतिशत उत्पादन घट सकता है।
जल्द ही बारिश के आसार
वातावरण में पश्चिमी हवाओं ने पैठ जमा ली है। चार दिन से पश्चिमी हवाएं चल रही हैं। इससे जल्द ही बारिश के आसार बन रहे हैं। आने वाले दिनों में अच्छी बारिश की उम्मीद जताई जा रही है।
मई से 25 जून तक 350 मिमी बारिश
20 मई से 24 जून तक जिले में 350 मिमी रिकार्ड बारिश हुई। समुद्री तूफान की दस्तक के बाद आसमान में डेरा जमाए बादलों ने झमाझम बारिश की। मगर 25 जून के बाद बादल सिर्फ उमड़-घुमड़ तक ही सीमित हैं।