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Pratapgarh News: चिप संकट में फंसा 6294 आवेदकों का ड्राइविंग लाइसेंस
Wed, 10 May 2023 12:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
Updated Wed, 10 May 2023 12:30 AM IST
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जनवरी से अप्रैल तक के आवेदकों की बरकरार है मुसीबत, वाहनों का हो रहा चालान
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। स्मार्ट चिप का संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। चिप के अभाव के कारण करीब 6294 स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस अधर में लटके हैं। आवेदकों की परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि चेकिंग के दौरान पुलिस भारी भरकम जुर्माना लगा रही है।
प्रदेश में ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रकिया पायलट प्रोजेक्ट के तहत चार साल पहले शुरू हुई थी। पायलट प्रोजेक्ट वाले जिले में भी आवेदकों को डीएल नहीं मिल पा रहा है। इसके आवेदन के बाद निर्धारित तारीख पर एआरटीओ कार्यालय बुलाकर आवेदक की ऑनलाइन फोटो खींचकर कागजी कार्रवाई पूरी की जाती है। ड्राइविंग का टेस्ट लेने के बाद पास हुए आवेदकों का लाइसेंस बनने के लिए एआरटीओ ऑफिस से संस्तुति कर दी जाती है।इसके बाद स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस लखनऊ से बनकर डाक से आवेदक के पास पहुंचते हैं। स्मार्ट चिप की कमी के चलते टेस्टिंग में पास होने व सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी डीएल निर्गत नहीं हो पा रहे हैं। जनवरी से अप्रैल माह तक 6294 आवेदकों को ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिल सका है।
इनसेट-- -- --
मेरा फरवरी माह में टेस्ट हुआ था। मगर अभी तक स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस बनकर नहीं आया है। कई बार डाकघर संपर्क करने भी गया लेकिन हर बार अभी लाइसेंस न आने की जानकारी ही मिली।
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मनोज कुमार, पूरे नरसिंहभान
इनसेट-- -- --
टेस्ट में पास होने के बाद भी अभी तक ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिला। दो बार बाइक का जुर्माना हो चुका है।
आसिम खान, बेगमवार्ड
वर्जन-- -- -
स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस के जो भी आवेदन आए उनकी विभागीय प्रकिया पूरी करने के बाद संस्तुति भेजी जा चुकी है। एआरटीओ कार्यालय में इसे लेकर कोई बाधा नहीं है। लखनऊ में चिप की कमी होने के कारण लाइसेंस निर्गत नहीं हो पा रहे थे, लेकिन अब संकट खत्म हो गया है। नए के साथ पुराने स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस भेजे जा रहे हैं।
रंजीत सिंह, आरआई, एआरटीओ
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। स्मार्ट चिप का संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। चिप के अभाव के कारण करीब 6294 स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस अधर में लटके हैं। आवेदकों की परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि चेकिंग के दौरान पुलिस भारी भरकम जुर्माना लगा रही है।
प्रदेश में ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रकिया पायलट प्रोजेक्ट के तहत चार साल पहले शुरू हुई थी। पायलट प्रोजेक्ट वाले जिले में भी आवेदकों को डीएल नहीं मिल पा रहा है। इसके आवेदन के बाद निर्धारित तारीख पर एआरटीओ कार्यालय बुलाकर आवेदक की ऑनलाइन फोटो खींचकर कागजी कार्रवाई पूरी की जाती है। ड्राइविंग का टेस्ट लेने के बाद पास हुए आवेदकों का लाइसेंस बनने के लिए एआरटीओ ऑफिस से संस्तुति कर दी जाती है।इसके बाद स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस लखनऊ से बनकर डाक से आवेदक के पास पहुंचते हैं। स्मार्ट चिप की कमी के चलते टेस्टिंग में पास होने व सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी डीएल निर्गत नहीं हो पा रहे हैं। जनवरी से अप्रैल माह तक 6294 आवेदकों को ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिल सका है।
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इनसेट
मेरा फरवरी माह में टेस्ट हुआ था। मगर अभी तक स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस बनकर नहीं आया है। कई बार डाकघर संपर्क करने भी गया लेकिन हर बार अभी लाइसेंस न आने की जानकारी ही मिली।
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मनोज कुमार, पूरे नरसिंहभान
इनसेट
टेस्ट में पास होने के बाद भी अभी तक ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिला। दो बार बाइक का जुर्माना हो चुका है।
आसिम खान, बेगमवार्ड
वर्जन
स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस के जो भी आवेदन आए उनकी विभागीय प्रकिया पूरी करने के बाद संस्तुति भेजी जा चुकी है। एआरटीओ कार्यालय में इसे लेकर कोई बाधा नहीं है। लखनऊ में चिप की कमी होने के कारण लाइसेंस निर्गत नहीं हो पा रहे थे, लेकिन अब संकट खत्म हो गया है। नए के साथ पुराने स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस भेजे जा रहे हैं।
रंजीत सिंह, आरआई, एआरटीओ