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पटाखों के शोर से दोगुना हुआ ध्वनि प्रदूषण
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sat, 21 Oct 2017 10:39 PM IST
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दिवाली पर फोड़े गए पटाखों ने जिले में ध्वनि प्रदूषण का स्तर दोगुना कर दिया। पर्व वाली रात 45 डेसीबल के मानक के मुकाबले यह स्तर 90 डेसीबल रिकॉर्ड किया गया। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जुटाए गए आंकड़ों से इस बात की तस्दीक हुई है। राहत की बात यह है कि ध्वनि प्रदूषण के स्तर में यह बढ़ोतरी तात्कालिक रही और अगले ही दिन यह सामान्य स्तर पर पहुंच गया।
दीवाली पर करीब हर घर में पटाखों की खरीब हुई। पर्व के मद्देनजर शाम छह बजे से ही पटाखों की गूंज शुरू हो गई। इससे ध्वनि प्रदूषण पर काफी असर पड़ा। यह सामान्य से कई गुना ज्यादा रहा। बोर्ड के अनुमानित तथ्यों पर गौर करें तो पर्व की रात पटाखों की वजह से ध्वनि प्रदूषण का स्तर 90 डेसीबल तक पहुंच गया। गौरतलब है कि विभाग की ओर से सुबह छह से रात 10 बजे तक 55 और रात 10 से सुबह छह बजे तक 45 प्रतिशत शोर को सामान्य माना जाता है। यह मानक आवासीय क्षेत्रों के लिए है। इस तरह आंकड़ों पर गौर करें तो दीवाली पर करीब 45 डेसीबल तक ध्वनि प्रदूषण बढ़ा। हालांकि तीसरे दिन शनिवार को यह सामान्य हो गया। डॉक्टरों ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ना हार्ट सहित अन्य रोगियों के लिए खतरनाक है।
धुआं बनकर उड़ गए दो करोड़ रुपये
प्रतापगढ़। एक अनुमान के मुताबिक दीपावली पर जिले में लगभग दो करोड़ रुपये के पटाखे धुआं हो गए। शहर के रामलीला मैदान पर दुकान लगाने वाले एक व्यापारी ने बताया कि वह जिले का छोटा पटाखा विक्रेता है लेकिन उसने इस बार अकेले ढाई लाख रुपये के पटाखे बेचे हैं। जिले में 156 लाइसेंसधारी पटाखा बेचने वाले हैं। इसके साथ एसडीएम व फायर स्टेशन से लाइसेंस लेकर पटाखा बेचने वालों ने भी दुकानें लगाईं थी। इस तरह अनुमान लगाया जारहा है कि दिवाली पर जिले भर में लगभग दो करोड़ के पटाखे जलाए गए।
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दीवाली पर करीब हर घर में पटाखों की खरीब हुई। पर्व के मद्देनजर शाम छह बजे से ही पटाखों की गूंज शुरू हो गई। इससे ध्वनि प्रदूषण पर काफी असर पड़ा। यह सामान्य से कई गुना ज्यादा रहा। बोर्ड के अनुमानित तथ्यों पर गौर करें तो पर्व की रात पटाखों की वजह से ध्वनि प्रदूषण का स्तर 90 डेसीबल तक पहुंच गया। गौरतलब है कि विभाग की ओर से सुबह छह से रात 10 बजे तक 55 और रात 10 से सुबह छह बजे तक 45 प्रतिशत शोर को सामान्य माना जाता है। यह मानक आवासीय क्षेत्रों के लिए है। इस तरह आंकड़ों पर गौर करें तो दीवाली पर करीब 45 डेसीबल तक ध्वनि प्रदूषण बढ़ा। हालांकि तीसरे दिन शनिवार को यह सामान्य हो गया। डॉक्टरों ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ना हार्ट सहित अन्य रोगियों के लिए खतरनाक है।
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धुआं बनकर उड़ गए दो करोड़ रुपये
प्रतापगढ़। एक अनुमान के मुताबिक दीपावली पर जिले में लगभग दो करोड़ रुपये के पटाखे धुआं हो गए। शहर के रामलीला मैदान पर दुकान लगाने वाले एक व्यापारी ने बताया कि वह जिले का छोटा पटाखा विक्रेता है लेकिन उसने इस बार अकेले ढाई लाख रुपये के पटाखे बेचे हैं। जिले में 156 लाइसेंसधारी पटाखा बेचने वाले हैं। इसके साथ एसडीएम व फायर स्टेशन से लाइसेंस लेकर पटाखा बेचने वालों ने भी दुकानें लगाईं थी। इस तरह अनुमान लगाया जारहा है कि दिवाली पर जिले भर में लगभग दो करोड़ के पटाखे जलाए गए।
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