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Pratapgarh News: शैक्षिक अभिलेख में गड़बड़ी, स्कूल की मान्यता रद्द करने का आदेश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Oct 2025 12:41 AM IST
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Disturbance in educational records, order to cancel the recognition of the school
अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो अधिनियम पारुल वर्मा की कोर्ट ने बाल अपचारी के शैक्षिक अभिलेखों में गड़बड़ी पाए जाने पर मानधाता के सराय भीमसेन स्थित पब्लिक मॉन्टेसरी स्कूल की मान्यता रद करने का आदेश दिया है। निदेशक बेसिक शिक्षा विभाग यूपी को पत्र जारी कर कहा कि अभिलेखों की विभागीय जांच कर कार्रवाई करें।
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कोर्ट ने कहा कि अभिलेखों से छेड़छाड़ एवं कूटरचना करने वाले संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भी दंडात्मक एवं आपराधिक कार्रवाई कर एक माह के भीतर न्यायालय को अवगत कराएं। उक्त आदेश फौजदारी अपील मो. रुस्तम बनाम राज्य के निस्तारण के अनुक्रम दिया।
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बाल अपचारी से संबंधित अभिलेखों के सत्यापन में पाया गया कि प्रवेश के समय अभिभावक से जन्म प्रमाण-पत्र के संबंध में अभिलेख प्राप्त नहीं किया गया था। आधार कार्ड एवं अभिभावक की सहमति के संबंध में अभिलेख नहीं मिला। बाल अपचारी ने कक्षा एक में दिनांक 31 जुलाई 2014 को प्रथम बार प्रवेश लिया था। विद्यालय के रजिस्टर में एक जुलाई की प्रथम बेला में नाग पंचमी का अवकाश दर्शित किया गया है। द्वितीय बेला में छात्रों की उपस्थिति दिखाई गई।
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न्यायालय ने कहा कि पूरा एसआर रजिस्टर एक ही हस्तलेख में अंकित है। अंक पत्र में बाल अपचारी की जन्मतिथि में ओवरराइटिंग की गई जिसे कार्यवाहक प्रधानाचार्य ने भी स्वीकार किया है। इसी तरह की अन्य विसंगतियां भी पाई गई हैं। कोर्ट ने विद्यालय के कथित अपचारी के शैक्षिक प्रमाण-पत्रों के साथ संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक को तलब किया। प्रभारी प्रधानाध्यापक के अभिलेख के सत्यापन में पाया गया कि प्रभारी प्रधानाध्यापक विद्यालय का कार्य बगैर किसी प्रशिक्षण के देख रहे थे।
कोर्ट ने कहा कि न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले लैंगिक अपराधों की पीड़िताओं तथा विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों के उम्र निर्धारण के लिए जनपद के विद्यालयों से जो अभिलेख उपलब्ध कराए जाते हैं, उसमें गंभीर अनियमितताएं पाई जाती हैं। विद्यालयों में बालकों का सत्यापन समन प्रेषित किए जाने के बाद केवल उन्हीं बालकों का सत्यापन करा कर अभिलेख प्रस्तुत किए जाते हैं। वार्षिक परिणाम रजिस्टर भी बीएसए व डीआईओएस से प्रमाणित नहीं कराए जाते हैं।
विसंगतियां न केवल गंभीर अनियमितताओं की घोतक हैं बल्कि यह बालकों के अधिकारों के प्रतिकूलता को भी प्रकट करती हैं। विद्यालयीय अभिलेखों की अव्यवस्था एवं अनियमिताओं के कारण अनेक छात्रों का शैक्षिक भविष्य दुष्प्रभावित हो रहा है जो उनके मौलिक शैक्षिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है।

ऐसी स्थिति की संपूर्ण जिम्मेदारी जनपद प्रतापगढ़ के बेसिक शिक्षा विभाग की है जो अपने दायित्वों के निर्वहन में पूर्णत: असफल है। कोर्ट ने कहा कि विद्यालयों के अभिलेखों का सत्यापन अभियान चलाकर सुनिश्चित किया जाए जिससे किसी भी छात्र अथवा छात्रा को भविष्य में शैक्षिक प्रतिकूलता का सामना न करना पड़े। उक्त पत्र की प्रति अपर बेसिक शिक्षा निदेशक प्रयागराज, जिलाधिकारी प्रतापगढ़ तथा बेसिक शिक्षा अधिकारी को भी प्रेषित की गई।
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