धीरेंद्र शास्त्री बोले : सनातन के लिए हमें एक होने की जरूरत, हिंदू राष्ट्र का संकल्प दोहराया
राम मंदिर के फैसले में स्वामी रामभद्राचार्य की गवाही का जिक्र भी किया। बिना नाम लिए उन्होंने एक धर्म विशेष पर निशाना साधते हुए उन्हें आतंकवाद में शामिल होने की बात भी कही। उन्होंने धर्मो रक्षति रक्षित: का जयघोष कराया।
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कथा स्थल से हनुमानगढ़ी के महंत राजूदास ने राम मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी को धन्यवाद दिया। बिना नाम लिए कहा कि देश के बंटवारे के लिए दो लोग जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए सभी को तैयार रहना चाहिए। जब बात राष्ट्र और धर्म की आए तो हमें पीछे नहीं हटना चाहिए। राम मंदिर के फैसले में स्वामी रामभद्राचार्य की गवाही का जिक्र भी किया। बिना नाम लिए उन्होंने एक धर्म विशेष पर निशाना साधते हुए उन्हें आतंकवाद में शामिल होने की बात भी कही। उन्होंने धर्मो रक्षति रक्षित: का जयघोष कराया।
रामभद्राचार्य बोले- धन के लिए भगवान दर्शन के लिए है कथा
रामपुर भागल हो रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य ने हम तो हिंदू हैं, हिंदू कहलाएंगे, राम चरणों में बलि-बलि जाएंगे...भजन से कथा की शुरू की। कहा, मेरी कथा धन के लिए नहीं है, भगवान के दर्शन की कथा है। अंतिम दिन उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह के प्रसंग का सुनाया।
कथा को आगे बढ़ाते हुए बताया राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी के पांच भाई थे। रुक्मिणी सर्वगुण संपन्न एवं अति सुंदर थीं। भीष्मक के पास जो भी लोग आते-जाते थे, वे सभी कृष्ण की प्रशंसा करते थे। भगवान श्रीकृष्ण के गुणाें और उनकी सुंदरता पर मुग्ध होकर रुक्मिणी ने मन ही मन तय कर लिया था कि वह श्रीकृष्ण को छोड़कर किसी अन्य को पति के रूप में स्वीकार नहीं करेंगी।
रुक्मिणी के भाई रुक्म मित्र शिशुपाल से अपनी बहन का रिश्ता तय कर दिया। जब रुक्मिणी को इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण को द्वारिका श्रीकृष्ण के पास संदेश लेकर भेजा। पत्र में लिखा कि रीति के अनुसार हमारे कुल में वधु को गिरिजा दर्शन के लिए बाहर जाना पड़ता है। मैं गिरिजा के मंदिर जाऊंगी। आप वहां पहुंचकर मुझे स्वीकार कर लें। नहीं तो मैं अपने प्राणों का त्याग कर दूंगी। अंत में भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्म व शिशुपाल के विरोध के बावजूद रुक्मिणी का हरण करके उनसे विवाह किया।
उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण ने 16 हजार गोपियाें के संग भी विवाह किया था। प्रसंग में उन्होंने भगवान कृष्ण के पौत्र अनुरुद्ध का हरण और पुंडरीक आसुर के वध का भी वर्णन किया। कथा के समापन पर भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। शुक्रवार को जगन्नाथ स्वामी का महाप्रसाद भोज होगा।
रामपुर खागल में श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन बृहस्पतिवार को बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री भी दोपहर करीब तीन बजे पहुंचे। उन्होंने हिंदू राष्ट्र के संकल्प को दोहराया। वह सीधे गुरु रामभद्राचार्य का आशीष लेने उनके पास गए। दोपहर 3:30 बजे उनके साथ मंच पर पहुंचे। उन्होंने हिंदुओं को एक रहने की शपथ दिलाई। देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने का संकल्प दिलाया।
कहा, मेरे गुरु भाई रामचंद्र दास ने आज रामपुर खागल में महाकुंभ लगा दिया है। शाम 4:32 बजे वह कथा स्थल से रवाना हो गए। धीरेंद्र शास्त्री की एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में भीड़ रामपुर खंगाल गांव में सुबह नौ बजे से ही पहुंचना शुरू हो गई थी। धूप में भक्त घंटों कतार लगाए उनके इंतजार में खड़े रहे।