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डाला छठ : डूबते सूर्य को आज दिया जाएगा पहला अर्घ्य
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Mon, 12 Nov 2018 11:40 PM IST
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प्रतापगढ़।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो; प्रतापगढ़।
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पुत्र की सुख-समृद्धि की कामना के लिए छठ पूजा करने वाली महिलाओं ने सोमवार को दिनभर निर्जला व्रत रखा। चंद्रमा को खीर-रोटी का अर्घ्य दिया। मंगलवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। सई नदी में बेल्हादेवी मंदिर के घाट पर होने वाली छठ पूजा की तैयारी शुरू कर दी गई है। व्रती महिलाएं सई नदी के जल में स्नान कर अर्घ्य देंगी। इस मौके पर आयोजित मेले में भजन-कीर्तन भी होगा।
छठ पूजा में सूर्य देवता की पूजा का विशेष महत्व है। सोमवार को छठ पूजा करने वाली व्रती महिलाओं ने सुबह स्नान आदि कर निर्जला व्रत रखा। रात को चंद्रमा को देखने के बाद पूजा-अर्चना की। उनको खीर-रोटी से अर्घ्य दिया गया। मंगलवार को सुबह फिर से महिलाएं निर्जला व्रत उठाएंगी, शाम को तीन बजे के बाद महिलाएं हाथों में डाला लेकर बेल्हादेवी घाट पर पहुंचेंगी। उसके बाद डाला से फल,फूल, गन्ना इत्यादि सूप में लेकर नदी के जल में खड़ी होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी। मान्यता है कि उगते और डूबते समय सूर्य की जो किरणें फैली रहती हैं वह छठ माता का ही स्वरूप है। इस मौके पर बेल्हादेवी मंदिर में देवी जागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
सूर्यदेव की किरणों में समाई छठ माता की शक्ति अलौकिक है। वे बड़ी ही दयालु हैं, जिसने भी जो मांगा उसकी झोली छठ मइया ने भर दी।
इसी उम्मीद के साथ महिलाएं डाला छठ का व्रत रखती हैं। बिहार प्रांत में धूमधाम से मनाया जाने वाला यह पर्व जिले की महिलाओं की आस्था का पर्व बन गया है।
व्रतधारी महिलाओं को खीर और हाथ से बनी हुई रोटी का प्रसाद कच्चे चूल्हे पर तैयार किया। इसके लिये घरों में मिट्टी के चूल्हे बनाए गए थे। जिस पर खीर और रोटी तैयार की गई और देशी घी लगाकर प्रसाद के रूप में वितरित की गई है।
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नगरपालिका ने बेल्हादेवी घाट पर सफाई की कोई पहल नहीं की है। इससे घाट पर गंदगी और कूड़ा-करकट का अंबार लगा रहा। नगर पालिका के प्रभारी ईओ और एडीएम मनोज कुमार सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन काट दिया।
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छठ पूजा में सूर्य देवता की पूजा का विशेष महत्व है। सोमवार को छठ पूजा करने वाली व्रती महिलाओं ने सुबह स्नान आदि कर निर्जला व्रत रखा। रात को चंद्रमा को देखने के बाद पूजा-अर्चना की। उनको खीर-रोटी से अर्घ्य दिया गया। मंगलवार को सुबह फिर से महिलाएं निर्जला व्रत उठाएंगी, शाम को तीन बजे के बाद महिलाएं हाथों में डाला लेकर बेल्हादेवी घाट पर पहुंचेंगी। उसके बाद डाला से फल,फूल, गन्ना इत्यादि सूप में लेकर नदी के जल में खड़ी होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी। मान्यता है कि उगते और डूबते समय सूर्य की जो किरणें फैली रहती हैं वह छठ माता का ही स्वरूप है। इस मौके पर बेल्हादेवी मंदिर में देवी जागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
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सूर्यदेव की किरणों में समाई छठ माता की शक्ति अलौकिक है। वे बड़ी ही दयालु हैं, जिसने भी जो मांगा उसकी झोली छठ मइया ने भर दी।
इसी उम्मीद के साथ महिलाएं डाला छठ का व्रत रखती हैं। बिहार प्रांत में धूमधाम से मनाया जाने वाला यह पर्व जिले की महिलाओं की आस्था का पर्व बन गया है।
व्रतधारी महिलाओं को खीर और हाथ से बनी हुई रोटी का प्रसाद कच्चे चूल्हे पर तैयार किया। इसके लिये घरों में मिट्टी के चूल्हे बनाए गए थे। जिस पर खीर और रोटी तैयार की गई और देशी घी लगाकर प्रसाद के रूप में वितरित की गई है।
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नगरपालिका ने बेल्हादेवी घाट पर सफाई की कोई पहल नहीं की है। इससे घाट पर गंदगी और कूड़ा-करकट का अंबार लगा रहा। नगर पालिका के प्रभारी ईओ और एडीएम मनोज कुमार सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन काट दिया।