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फसल नहीं, इस बार मजदूरों को रुपये चाहिए

Sat, 11 Apr 2015 11:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़ Updated Sat, 11 Apr 2015 11:46 PM IST
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Crop , worth the time to workers
प्रकृति की मार झेल रहे किसानों के सामने मजदूरों की मांग आफत बनकर टूटी है। कटाई के बदले मजदूर इस बार फसल (गेहूं का बोझ) नहीं बल्कि नकद रुपया चाहते हैं। जमापूंजी खेती में लगा चुके किसान के पास मजदूरों की मांग पूरी करने को रुपये नहीं हैं। इसलिए तमाम फसल अभी खेतों में ही पड़ी है। अब उसके पास साहूकार के सामने कर्ज के लिए हाथ फैलाने के सिवा और कोई रास्ता नहीं है।
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बेमौसम हुई बारिश खेती को इस कदर उजाड़ गई कि जिले के किसान बर्बाद हो गए। गेहूं की बुवाई से लेकर बीज, खाद, सिंचाई पर हजारों रुपये खर्च किए। दिन-रात उनकी मेहनत किए वह अलग। खेत में फसल तैयार हुई तो बारिश उसे बर्बाद करके रख दी। बर्बाद हुई गेहूं की फसल मजदूर काटने को तैयार नहीं हो रहे। काफी अनुनय-विनय के बाद जो कटाई के लिए राजी हो रहे वे लेहना (गेहूं का बोझ) के बजाय पैसे की मांग कर रहे हैं। राजगढ़ के किसान मुन्ना तिवारी व महुली के दीपक सिंह एवं गड़वारा के शिवेश शुक्ल एक अहम वजह बता रहे हैं। उनके मुताबिक मजदूरों का कहना है कि बारिश से गेहूं के दाने निहायत कमजोर हैं। उनकी चमक भी गायब हो गई है। मजदूरों को आशंका है कि इस गेहूं का आटा भी काफी काला होगा। एक बोझ लेहना वे ले भी लिए तो उसमें चार-छह किलो भी गेहूं मिलना मुश्किल है। लेहना में प्राप्त गेहूं के डांठ की यदि वे मड़ाई करेंगे या पीटेंगे तो कमजोर दाने टूट कर भूसे के साथ उड़ जाएंगे। ऐसे में किसानों से मजदूर कहते हैं कि उन्हें गेहूं कटाई में लेहना से कोई फायदा नहीं है।
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 इसलिए गेहूं काटने के लिए वे घंटे या फिर ठेकेदारी के हिसाब से पैसे की मांग कर रहे हैं। इतने पर भी वह गेहूं का बोझ मशीन तक नहीं ले जा रहे। यदि पहुंचाएंगे तो उसकी मजदूरी अलग होगी। ज्यादातर कृषकों को खेत में ही ट्रैक्टर से मड़ाई करानी पड़ रही है। अनाज तो बर्बाद ही हो गया किसान जानवरों के लिए कुछ भूसा ही मिल जाए इस सोच से बर्बाद गेहूं की कटाई व मड़ाई कराने को मजबूर हैं। थ्रेसर संचालक मड़ाई के लिए 500 से 600 रुपए प्रति घंटा ले रहे हैं। ऐसे में किसानों के सामने घर का अनाज भी पियार में डालने की मजबूरी बन गई है।
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