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एसपीकार्यालय के करीब मकान पर कब्जे को लेकर जंग
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Mon, 29 Jan 2018 11:02 PM IST
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पुलिस अधीक्षक कार्यालय के करीब मकान पर कब्जे को लेकर जंग छिड़ गई। हंगामे के दौरान भंगवा चुंगी-कचहरी मार्ग पर जाम लग गया। ताला तोड़ने के आरोप में पुलिस दो बहनों को अपने साथ कोतवाली ले गई। दोनों पक्ष मकान अपना बता रहे थे। दोनों पक्षों ने पुलिस को तहरीर दी है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से चंद कदम दूर लोहिया पार्क तिराहे के पास एक पुराना मकान है। विवाद के चलते कई सालों से मकान पर ताला बंद है। सोमवार दोपहर दो युवतियां पहुंचीं और दरवाजे पर लगे ताले को तोड़ने लगीं। ताला तोड़ने के दौरान वहां भीड़ जुट गई। सूचना मिलने पर मकान को अपना बताने वाले विक्रम सिंह अपने करीबियों के साथ मौके पर पहुंचे। दोनों के बीच कहासुनी होने लगी। इससे तमाशबीनों की भारी भीड़ जुट गई।
जिससे कोषागार चौराहे से लेकर भंगवा चुंगी मार्ग पर लंबा जाम लग गया। घटना की जानकारी मिलने पर चौकी प्रभारी मकंद्रूगंज और डायल 100 की टीम पहुंची। मकान का ताला तोड़ने वाली मनीषा व खुशबू पुत्री सुभाषचंद्र निवासी पल्टन बाजार मकान को अपना बता रही थीं। जबकि विक्रम का तर्क था कि उसने संकरी देवी से मकान का बैनामा कराया है। सुभाष मकान में रहता था लेकिन बाद में रजामंदी के बाद वहां से चला गया।
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अब कांशीराम कॉलोनी में रहता है। इसे लेकर कोतवाली में लोगों का जमघट लगा रहा। प्रभारी कोतवाल ने बताया कि दोनों पक्षों ने तहरीर दी है। ताला तोड़ने वाली लड़कियों को परिवार के लोगों के सुपुर्दगी में दे दिया गया है। वैसे भी विवाद के चलते मकान पर प्रशासन ने ताला बंद करा रखा है।
मकान को लेकर पहले भी हो चुका है बवाल, प्रशासन ने कराया था सीज
लोहिया पार्क के करीब पल्टन बाजार में स्थित कीमती मकान को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। मकान पर कब्जा करने को लेकर 3 साल पहले जमकर बवाल हुआ था। दो पक्ष के लोग असलहों के साथ आमने-सामने हो गए थे। तत्कालीन उपजिलाधिकारी सदर के आदेश पर 145 के तहत कार्रवाई करते हुए मकान में ताला बंद कराया गया था। इसके बावजूद हर माह मकान पर कब्जे को लेकर विवाद होता रहता है। बार-बार ताला तोड़ने वालों पर पुलिस कार्रवाई नहीं करती। जिसके चलते स्वामित्व बताने वाले लोग कब्जा करने पहुंच जाया करते हैं।
महिला आरक्षी न होने से पुलिसकर्मी बेबस दिखे
विवादित मकान पर कब्जे को लेकर सोमवार को हुए हंगामे के बाद पुलिस व डायल 100 की टीम पहुंच गई। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कार्रवाई करने में पुलिसकर्मी बेबस दिखे। चूंकि ताला तोड़ने वाली युवतियां थीं। जिसे लेकर काफी देर तक महिला आरक्षी को बुलाया जाता रहा। महिला सिपाही के पहुंचने के बाद पुलिस ताला तोड़ने की आरोपी बहनों को कोतवाली ले गई। हालांकि बाद में दोनों को छोड़ दिया गया। उनका कहना था कि वे लोग ताला नहीं तोड़ रहीं थीं। वह मकान उनका है, वे दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं है।
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पुलिस अधीक्षक कार्यालय से चंद कदम दूर लोहिया पार्क तिराहे के पास एक पुराना मकान है। विवाद के चलते कई सालों से मकान पर ताला बंद है। सोमवार दोपहर दो युवतियां पहुंचीं और दरवाजे पर लगे ताले को तोड़ने लगीं। ताला तोड़ने के दौरान वहां भीड़ जुट गई। सूचना मिलने पर मकान को अपना बताने वाले विक्रम सिंह अपने करीबियों के साथ मौके पर पहुंचे। दोनों के बीच कहासुनी होने लगी। इससे तमाशबीनों की भारी भीड़ जुट गई।
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जिससे कोषागार चौराहे से लेकर भंगवा चुंगी मार्ग पर लंबा जाम लग गया। घटना की जानकारी मिलने पर चौकी प्रभारी मकंद्रूगंज और डायल 100 की टीम पहुंची। मकान का ताला तोड़ने वाली मनीषा व खुशबू पुत्री सुभाषचंद्र निवासी पल्टन बाजार मकान को अपना बता रही थीं। जबकि विक्रम का तर्क था कि उसने संकरी देवी से मकान का बैनामा कराया है। सुभाष मकान में रहता था लेकिन बाद में रजामंदी के बाद वहां से चला गया।
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अब कांशीराम कॉलोनी में रहता है। इसे लेकर कोतवाली में लोगों का जमघट लगा रहा। प्रभारी कोतवाल ने बताया कि दोनों पक्षों ने तहरीर दी है। ताला तोड़ने वाली लड़कियों को परिवार के लोगों के सुपुर्दगी में दे दिया गया है। वैसे भी विवाद के चलते मकान पर प्रशासन ने ताला बंद करा रखा है।
मकान को लेकर पहले भी हो चुका है बवाल, प्रशासन ने कराया था सीज
लोहिया पार्क के करीब पल्टन बाजार में स्थित कीमती मकान को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। मकान पर कब्जा करने को लेकर 3 साल पहले जमकर बवाल हुआ था। दो पक्ष के लोग असलहों के साथ आमने-सामने हो गए थे। तत्कालीन उपजिलाधिकारी सदर के आदेश पर 145 के तहत कार्रवाई करते हुए मकान में ताला बंद कराया गया था। इसके बावजूद हर माह मकान पर कब्जे को लेकर विवाद होता रहता है। बार-बार ताला तोड़ने वालों पर पुलिस कार्रवाई नहीं करती। जिसके चलते स्वामित्व बताने वाले लोग कब्जा करने पहुंच जाया करते हैं।
महिला आरक्षी न होने से पुलिसकर्मी बेबस दिखे
विवादित मकान पर कब्जे को लेकर सोमवार को हुए हंगामे के बाद पुलिस व डायल 100 की टीम पहुंच गई। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कार्रवाई करने में पुलिसकर्मी बेबस दिखे। चूंकि ताला तोड़ने वाली युवतियां थीं। जिसे लेकर काफी देर तक महिला आरक्षी को बुलाया जाता रहा। महिला सिपाही के पहुंचने के बाद पुलिस ताला तोड़ने की आरोपी बहनों को कोतवाली ले गई। हालांकि बाद में दोनों को छोड़ दिया गया। उनका कहना था कि वे लोग ताला नहीं तोड़ रहीं थीं। वह मकान उनका है, वे दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं है।