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अपने स्वभाव से जिंदा बचे बेजुबां कछुए

Thu, 19 Feb 2015 11:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Thu, 19 Feb 2015 11:25 PM IST
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Turtles survived by their nature mute
बेजुबां होने के बाद भी कछुए अपने स्वभाव को नहीं बदल सके। इसी वजह से जिंदा बच गए। बैग के अंदर रेंगने की हलचल ने उनको कैद से मुक्ति दिलाई। हिलते-डुलते बैग के अंदर क्या है, यह जानने की यात्रियाें की उत्सुकता ने तस्करों की पोल खोल दी। जिसका नतीजा सामने है। वरना तस्करों ने उनको मारने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
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 जानवर जुबान से अपनी व्यथा नहीं बता पाते। उनकी हरकतों और इशारों से लोग समझ जाते हैं। बैग में कैद कछुओं की भी हालत कुछ ऐसी थी। आजादी के लिए तड़प रहे कछुए आदत के अनुसार पानी की तरह बैग के अंदर भी रेंगना, चलना नहीं भूले। अंदर से ऐसी हलचल मचाई कि लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया। हालांकि तस्करों ने लोगों की निगाह से बचाने के लिए कछुओं को बोरे में सिलकर उसके बाद बड़े से बैग में डाल रखा था।
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 देखने में लगे कि कपड़े वाले बैग हैं। मगर तमाम बंदिशों के बावजूद कछुए अपनी चलने और कुलबुलाने की आदत से बाज नहीं आए। बैग हिलते देख यात्रियों की नजरें खुद बा खुद उस पर पड़ गई। धीरे-धीरे यह बात स्टेशन पर फैल गई। जीआरपी के मुखबिर भी सक्रिय हो गए। थाने पर ले जाकर बैग से निकालकर जब बोरे का मुंह खोला गया तो कछुए तेजी से बाहर की ओर भागने लगे। उनकी हालत देखने से लग रहा था कि इनको कई घंटे कैद में रखा गया है।
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