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रामफेर की मौत से पांच पर रोटी का संकट

Fri, 10 Apr 2015 12:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़ Updated Fri, 10 Apr 2015 12:44 AM IST
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The death of five of Ramfer bread crisis
रानीगंज कैथौला। लालगंज के मेढ़ावां गांव में किसान रामफेर वर्मा की मौत के बाद अब परिवार में बचे पांच लोगों पर रोटी का संकट खड़ा हो गया है। दिन-रात मेहनत के बाद खेत से तैयार होने वाली फसल से खाने का हिस्सा निकालकर गृहस्थी चलती थी। घटना के दूसरे दिन परिजनों को किसान की मौत रह रहकर टीस देती रही।
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लालगंज के  मेढ़ांवा गांव में बारिश के चलते फसल बर्बाद होने पर किसान रामफेर वर्मा ने बुधवार को सई नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसकी मौत के बाद परिवार में बचे पांच लोगों पर जीविका चलाने का संकट खड़ा हो गया है। रामफेर के परिवार में छोटे बड़े मिलाकर कुल पांच सदस्य हैं। उसकी पत्नी की बीमारी के चलते काफी पहले मौत हो गई थी। परिवार में उसका बड़ा बेटा रामदास घर का कामकाज निबटाता है। रामदास की पत्नी चौका बर्तन का काम करती है। रामदास का पांच वर्षीय बेटा सागर व तीन वर्षीय बेटी प्रिया घर पर ही रहते हैं।
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मृतक किसान का छोटा बेटा पप्पू वर्मा माली हालत खराब होने के चलते मुरादाबाद जिले में ईंट भट्ठे पर रहकर मजदूरी करता है। घर की माली हालत खराब होने के चलते रामफेर के परिवार का सहारा खेत से पैदा होने वाली फसल ही थी। गांव वालों की मानें तो रामफेर बहुत ही मेहनती व साहसी था। वह किसी भी मौसम व परिस्थिति में रात-दिन मेहनत कर फसलों को तैयार करता था। उसकी मेहनत का ही नतीजा था कि डेढ़ बीघे जमीन में काफी फसल पैदा होती थी। परिवार में कमाई का कोई जरिया नहीं होने के चलते विभिन्न मौसमों में पैदा होने वाली फसलों को खाने भर के लिए बचाने के बाद रामफेर इसे  बेच देता था।
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इसी पैसे से वह अपने परिवार का पेट भरता था। बुधवार को रामफेर ने बारिश से फसल चौपट होने पर आत्महत्या कर ली और इसके साथ ही परिवार के पांचों सदस्य पर जीविका चलाने का संकट खड़ा हो गया है। घटना के दूसरे दिन मृतक किसान का अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजनों को किसान की मौत टीस देती रही। परिजनों में दिनभर मायूसी दिखाई दी। यहां तक की घर पर चूल्हा तक नहीं जल सका। आसपास के लोगों ने बच्चों को तो कुछ खिला दिया लेकिन सदमे में आए बेटे व बहू ने कुछ भी नहीं खाया।

रामफेर वर्मा का छोटा बेटा पप्पू मुरादाबाद जिले में ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता है। पिता की मौत की सूचना परिजनों ने उसे दे दी लेकिन इसके बाद भी वह घर नहीं पहुंच सका। परिजनों को आशंका है कि ईंट भट्ठा का मालिक उसे बंधक बनाकर मजदूरी करवा रहा होगा। पप्पू के आने का कारण कुछ भी हो लेकिन वह पिता की मौत के बाद उसका मुंह तक नहीं देख सका।


मेढ़ावां गांव में आत्महत्या करने वाले किसान के परिजनों की मदद के लिए कई हाथ आगे बढ़े हैं। रामपुर खास की विधायक आराधना मिश्रा मोना ने घटना के दिन ही परिजनों को आर्थिक मदद पहुंचाई थी। दूसरे दिन गांव के लोगों ने भी राशन व आवश्यक चीजें परिजनों को मुहैया कराईं। लालगंज निवासी विक्रम मुंबई में रहता है। उसने अमर उजाला के ई-पेपर पर खबर देखी तो परिजनों से संपर्क कर एकाउंट नंबर मंागा है। विक्रम का दावा है कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर परिजनों की आर्थिक मदद करेगा। उधर प्रशासन भी मृतक किसान के परिजनों को सहायता देने के लिए दिनरात एक किए हुए है। तहसील प्रशासन जिला अधिकारी के माध्यम से शासन को मृत किसान की माली हालत खराब होने की जानकारी भेज रहा है। शासन का प्रयास है कि मुख्यमंत्री राहत कोष से परिजनों को अधिक से अधिक सहायता मिल सके। वहीं राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ से तहत जिले से बीस हजार रुपये किसान के परिजनाें को देने के लिए स्वीकृत हुआ है। लेकिन परिवार में किसी के पास बैंक खाता नहीं होने के चलते यह राशि उन्हें नही दी जा सकी है। एसडीएम इंद्रासन वर्मा ने बताया कि किसान के परिजनों की हरसंभव मदद की जा रही है। बीस हजार रुपये उन्हें जल्द ही मिल जाएगा। उन्होंने बताया कि आत्महत्या करने के चलते दैवीय आपदा व किसान बीमा योजना का लाभ परिजनों को नहीं दिया जा सकता।
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