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चार दिनाें से लावारिस सिपाही मौत से हार गया जंग
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Dec 2014 11:21 PM IST
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-प्रतापगढ़। 3 दिसंबर की सुबह 8.25 बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया सिपाही महावीर पांडेय (55) शनिवार रात मौत से जंग हार गया। पहचान होने के बाद भी पुलिस ने बड़ी बेरुखी दिखाई। 4 दिसंबर को अस्पताल की सूचना के बाद भी किसी ने उसकी ओर देखने की जहमत नहीं उठाई।
महावीर इलाहाबाद जिले के करछना थाना क्षेत्र के पवासा गांव का निवासी था। वह पिछले कुछ दिनों से पुलिस लाइन में तैनात था। 3 दिसंबर की सुबह वह शहर के राजापाल चौराहे के पास बेहोशी की हालत में मिला तो कुछ लोगाें ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। उसकी देखभाल के लिए न तो कोई सिपाही लगाया गया और न ही उसके घर सूचना देने की जरूरत समझी गई। जिला अस्पताल के कर्मचारियों ने उसकी दुर्दशा देखी तो 4 दिसंबर को नगर कोतवाली में सूचना दी। कहा कि वह सिपाही होने के बाद भी लावारिस हालत में है।
इसके बाद भी कोई उसे झांकने नहीं पहुंचा। दूसरे दिन 5 दिसंबर को उसकी हालत कुछ ठीक हुई तो वह अस्पताल से बिना बताए ही कहीं चला गया। अगले दिन 6 दिसंबर को वह फिर जिला अस्पताल पहुंचा तो कर्मचारियाें ने रात साढे़ 9 बजे उसे लावारिस के रूप में भर्ती कर लिया। रात पौने 10 बजे राजेंद्र कुमार नामक एक सिपाही ने उसकी पहचान की लेकिन पहचान करने के बाद भी वह अस्पताल से चला गया। रात 10 बजे उसकी मौत हो गई।
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इसके बाद उसके परिजनाें को सूचना दी गई। सुबह उसके शव का पोस्टमार्टम हुआ और दोपहर बाद सीओ सदर रामजनम राम के साथ कई पुलिस कर्मियाें ने उसे अंतिम सलामी दी। सीओ ने मृतक की पत्नी फूलकुमारी को अंतिम संस्कार के लिए 4 हजार रुपये देकर राजकीय वाहन से शव घर भेजवाया। मृत सिपाही को दो बेटे और एक बेटी है। सभी की शादियां हो चुकी हैं।
सिपाही के अस्पताल पहुंचने के बाद से मरने तक पुलिस की भूमिका के सवाल पर सीओ सदर रामजनम राम ने कहा कि आप सीओ लाइन से बात करिए। सीओ लाइन रामचेत ने कहा कि वह बाहर थे। कल लौटने के बाद ही उन्हें सिपाही की मौत की जानकारी हुई। उसे कोई अस्पताल ले नहीं गया था। वह खुद ही अस्पताल गया था। मौत की जानकारी होने के बाद वह एएसपी के साथ अस्पताल गए थे। पुलिस लाइन में उसे पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
महावीर इलाहाबाद जिले के करछना थाना क्षेत्र के पवासा गांव का निवासी था। वह पिछले कुछ दिनों से पुलिस लाइन में तैनात था। 3 दिसंबर की सुबह वह शहर के राजापाल चौराहे के पास बेहोशी की हालत में मिला तो कुछ लोगाें ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। उसकी देखभाल के लिए न तो कोई सिपाही लगाया गया और न ही उसके घर सूचना देने की जरूरत समझी गई। जिला अस्पताल के कर्मचारियों ने उसकी दुर्दशा देखी तो 4 दिसंबर को नगर कोतवाली में सूचना दी। कहा कि वह सिपाही होने के बाद भी लावारिस हालत में है।
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इसके बाद भी कोई उसे झांकने नहीं पहुंचा। दूसरे दिन 5 दिसंबर को उसकी हालत कुछ ठीक हुई तो वह अस्पताल से बिना बताए ही कहीं चला गया। अगले दिन 6 दिसंबर को वह फिर जिला अस्पताल पहुंचा तो कर्मचारियाें ने रात साढे़ 9 बजे उसे लावारिस के रूप में भर्ती कर लिया। रात पौने 10 बजे राजेंद्र कुमार नामक एक सिपाही ने उसकी पहचान की लेकिन पहचान करने के बाद भी वह अस्पताल से चला गया। रात 10 बजे उसकी मौत हो गई।
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इसके बाद उसके परिजनाें को सूचना दी गई। सुबह उसके शव का पोस्टमार्टम हुआ और दोपहर बाद सीओ सदर रामजनम राम के साथ कई पुलिस कर्मियाें ने उसे अंतिम सलामी दी। सीओ ने मृतक की पत्नी फूलकुमारी को अंतिम संस्कार के लिए 4 हजार रुपये देकर राजकीय वाहन से शव घर भेजवाया। मृत सिपाही को दो बेटे और एक बेटी है। सभी की शादियां हो चुकी हैं।
सिपाही के अस्पताल पहुंचने के बाद से मरने तक पुलिस की भूमिका के सवाल पर सीओ सदर रामजनम राम ने कहा कि आप सीओ लाइन से बात करिए। सीओ लाइन रामचेत ने कहा कि वह बाहर थे। कल लौटने के बाद ही उन्हें सिपाही की मौत की जानकारी हुई। उसे कोई अस्पताल ले नहीं गया था। वह खुद ही अस्पताल गया था। मौत की जानकारी होने के बाद वह एएसपी के साथ अस्पताल गए थे। पुलिस लाइन में उसे पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।