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मीटर रीडिंग कम दिखाकर खूब भरी जेब
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 05 Mar 2018 10:49 PM IST
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जीपीएस सिस्टम से मीटर रीडरों पर निगरानी करने की पहल भी सकारात्मक परिणाम नहीं दे सकी। मीटर रीडरों ने मनमाने तरीके से रीडिंग कर विभाग को खूब चूना लगाया। समीक्षा के बाद अब विभाग ने मीटर रीडरों की तैनाती में फेरबदल करने का निर्णय लिया है। सूत्रों की मानें तो हर छह महीने पर इनके हलके को बदल कर दूसरे की तैनाती की जाएगी।
जिले में बिजली चोरी रोकने के लिए बिजली विभाग तरह-तरह की योजना बना रहा है। गांवों में मुखबिर के साथ क्षमता से अधिक खपत की जांच के लिए उपकेंद्र वार टीमें तैनात कर रखी हैं। शहर से लेकर गंाव तक मीटर लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा जहां मीटर नहीं भी लगे हैं, वहां उपकरणोें के इस्तेमाल को देखते हुए रीडिंग लेने की रणनीति तैयार की गई है। इसके लिए जिले में 32 मीटर रीडरों की तैनाती की गई है। इन मीटर रीडरों की निगरानी के लिए जीपीएस सिस्टम की हाईटेक व्यवस्था की गई है।
क्षेत्र के रानीगंज, पट्टी, कुं डा, लालगंज, सदर आदि क्षेत्रों में मीटर रीडिंग करने के लिए तैनात किया गया है। विभाग का दावा था कि जीपीएस सिस्टम से मीटर रीडरों की मॉनटरिंग अच्छे से होगी। वह न तो लापरवाही कर पाएंगे और न ही रीडिंग में खेल। मेन पैनल से ही उनकी निगरानी होती रहेगी। मगर विभाग का यह दावा भी सही साबित नहीं हुआ। जीपीएस सिस्टम के बाद भी मीटर रीडरों ने कार्य में जमकर उदासीनता व अनियमितता बरती। मीटर रीडिंग के नाम पर खेलकर जेब भरी। सूत्रों की मानें तो समीक्षा के दौरान मीटर रीडिंग में ऐसी शिकायत भी आई। जिस पर नवागत अधीक्षण अभियंता एसके सिंह ने मीटर रीडरों के हलके की तैनाती हर छह महीने में परिवर्तित करने का निर्देश दिया है।
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जिले में बिजली चोरी रोकने के लिए बिजली विभाग तरह-तरह की योजना बना रहा है। गांवों में मुखबिर के साथ क्षमता से अधिक खपत की जांच के लिए उपकेंद्र वार टीमें तैनात कर रखी हैं। शहर से लेकर गंाव तक मीटर लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा जहां मीटर नहीं भी लगे हैं, वहां उपकरणोें के इस्तेमाल को देखते हुए रीडिंग लेने की रणनीति तैयार की गई है। इसके लिए जिले में 32 मीटर रीडरों की तैनाती की गई है। इन मीटर रीडरों की निगरानी के लिए जीपीएस सिस्टम की हाईटेक व्यवस्था की गई है।
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क्षेत्र के रानीगंज, पट्टी, कुं डा, लालगंज, सदर आदि क्षेत्रों में मीटर रीडिंग करने के लिए तैनात किया गया है। विभाग का दावा था कि जीपीएस सिस्टम से मीटर रीडरों की मॉनटरिंग अच्छे से होगी। वह न तो लापरवाही कर पाएंगे और न ही रीडिंग में खेल। मेन पैनल से ही उनकी निगरानी होती रहेगी। मगर विभाग का यह दावा भी सही साबित नहीं हुआ। जीपीएस सिस्टम के बाद भी मीटर रीडरों ने कार्य में जमकर उदासीनता व अनियमितता बरती। मीटर रीडिंग के नाम पर खेलकर जेब भरी। सूत्रों की मानें तो समीक्षा के दौरान मीटर रीडिंग में ऐसी शिकायत भी आई। जिस पर नवागत अधीक्षण अभियंता एसके सिंह ने मीटर रीडरों के हलके की तैनाती हर छह महीने में परिवर्तित करने का निर्देश दिया है।
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