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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   No one believe Kazami no more

यकीन ही नहीं हुआ कि नहीं रहे काजमी

Tue, 25 Nov 2014 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 25 Nov 2014 11:23 PM IST
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पूर्व महाधिवक्ता एसएमए काजमी के निधन की खबर मिलते ही उनके लूकरगंज स्थित आवास पर न्यायमूर्तिगणों से लेकर वरिष्ठ अधिवक्ताओं, अदीबों, करीबियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। किसी को भी कतई यकीन नहीं हो रहा था कि उनके नहीं होने की खबर सच है।
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भारतीय ज्ञानपीठ के पूर्व निदेशक रवींद्र कालिया ने कहा, वह अच्छे दोस्त थे। उन्होंने संघर्षो की आंच में तपकर अपनी जगह खुद बनाई। डॉ.उर्मिला जैन ने कहा, काजमी साहब से मेरे परिवार का पुराना नाता रहा।
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 वह मददगार और मिलनसार थे। यश मालवीय ने कहा, साहित्य के साथ सांप्रदायिक सद्भाव के लिए उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।


प्रोफेसर एए फातमी ने कहा, मेरा तो दायां बाजू ही टूट गया। उनके जाने के साथ ही तमाम संस्थाएं भी यतीम हो गईं। अदब के लिए उनकी जबर्दस्त समझ ने ही मुझे उनका दोस्त बनाया।
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यह दोस्ती तकरीबन 35 बरस पुरानी रही। काजमी साहब कहते थे, तुम्हारी हमारी जोड़ी कल्याणजी आनंदजी वाली है। असरार गांधी ने कहा, काजमी साहब जितने अच्छे अदब के सरपरस्त, उतने ही अच्छे दोस्त भी थे। मेहमाननवाजी में उनका कोई जबाब नहीं था।



अंजुमन रूहे अदब के सचिव कर्नल अबरार अहमद ने कहा कि काजमी का जाना अदब का बहुत बड़ा नुकसान है। इसी तरह फज्ले हसनैन, एहतराम इस्लाम, जफर बख्त, डॉ.फाजिल हाशमी, नदीम शिराजी, लईक रिज़वी, अफजाल फाखरी ‘जज्बी’, खुर्शीद हसन आदि ने भी उनके जाने को शहर का बड़ा नुकसान बताया है।
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