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कंधई मधुपुर ग्रामीण बैंक में फर्जीवाड़ा, लाखों का गबन
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Aug 2018 11:48 PM IST
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बैंक गड़बड़ी
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जिले के सांगीपुर इलाके के शाहबरी शाखा के बाद अब कंधईपुर मधुपुर बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। यहां लाखों का गबन हुआ है। बैंककर्मियों की मिलीभगत से खाताधारकों के खाते से विड्राल फार्म भर कर रुपये निकालने और नगदी जमा करने आने वालों के खाते में रुपये जमा करने के बजाए जेब में रखने का खेल लंबे समय से चल रहा था। ग्राहकों को मुहर लगाकर फर्जी रसीद थमा दी रही थी। खाताधारकों की शिकायत पर शुक्रवार को बैंक अफसरों ने मामले को गंभीरता से लिया। आशंका है कि 25 लाख से अधिक का गबन हुआ है, लेकिन बैंक अफसर छह लाख रुपये की गड़बड़ी मान रहे हैं। इस मामले में शाखा प्रबंधक समेत सभी कर्मचारियों पर केस दर्ज कराया गया है।
जिले के सांगीपुर इलाके के बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक शाहबरी में 62 लाख रुपये के फर्जीवाडे़ का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक कंधई मधुपुर में 25 लाख रुपये के गबन का खुलासा हुआ है। इस शाखा में तैनात एक संविदाकर्मी ने खाताधारकों के साथ विश्वासघात करके रुपये हजम कर लिया हैं। रुपये जमा करने के लिए शाखा में पहुंचने वाले खाताधारकों से रुपये लेने के बाद भी जमा नहीं किया जाता था। उन्हें फर्जी रसीद दे दी जाती थी। कुछ खातेदार ऐसे भी हैं, जिनका विड्राल फार्म पर फर्जी दस्तखत बनाकर रुपये निकाल लिए गए। रुकसानाबानो, रियाज अहमद, नागेंद्र, राजाराम मौर्य, रेनू, जमील अहमद, जमीलाबानो, मोनू उमरवैश्य, शबानाबानो, मुख्तार अहमद, रामकरन, रुकसानाबानो, अनिल यादव, अनवर आदि ग्राहकों की मानें तो वह शाखा में ही तैनात एक स्वीपर को रुपये जमा करने के लिए देते थे। मगर जब वह रुपये निकालने गए, तो खाते में रुपये नहीं मिले। इधर कंधईमधुपुर पुलिस ने रुकसानाबानो की तहरीर पर शाखा प्रबंधक सहित सभी कर्मचारियों के खिलाफ मुुकदमा दर्ज किया है। शाखा में दिनभर शिकायत दर्ज करने वाले खाताधारकों के आने का सिलसिला जारी रहा।
शाखा प्रबंधक ने स्वीपर के खिलाफ दी तहरीर
कंधई मधुपुर शाखा में तैनात शाखा प्रबंधक जगदीशचंद्र ने शाखा में तैनात रहे स्वीपर मुहर्रम के खिलाफ तहरीर दी है। जिसमें आरोप लगाया है कि वह खाताधारकों के रुपये खाते में जमा करने के बजाय जेब में रख लेता था और फर्जी रसीद पकड़ा देता था।
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बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक कंधईपुर शाखा में अभी तक छह लाख रुपये की गड़बड़ी की शिकायत मिली है। यह बात सही है कि स्वीपर ने खाताधारकों से रुपये लिए और खाते में जमा नहीं किया, फार्म पर फर्जी दस्तखत बनाकर रुपये भी निकाले हैं। टीम बनाकर गहराई से जांच कराई जा रही है। शाखा प्रबंधक को
स्वीपर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए कंधई थाने भेजा गया है।
जीतेंद्र कुमार, आरएम, बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक।
स्वीपर बन गया था कैशियर
बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक कंधई मधुपुर में संविदा पर तैनात स्वीपर ही कैशियर बन गया था। शाखा प्रबंधक का विश्वासपात्र होनेे के कारण उसके ऊपर कैश काउंटर की जिम्मेदारी छोड़ दी जाती थी। स्थानीय होने के कारण लोग स्वीपर को कर्मचारी समझने लगे थे। बैंक में कोई भी कार्य हो, बगैर स्वीपर के नहीं होता था। दुर्घटना में उसका पैर टूटने पर कर्मचारियों ने इलाज कराने के लिए चंदा जुटाया था।
बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक कंधई मधुपुर में संविदा पर तैनात स्वीपर बैंक की सफाई करने के साथ ही कैश काउंटर की जिम्मेदारी संभालता था। इससे स्थानीय खाताधारक उसे बैंक का कर्मचारी समझने लगे थे। खाताधारकों के बीच विश्वास जमाने के लिए प्रमोशन मिलने की बात कहता था। यही वजह थी कि अधिकांश खाताधारक लाइन में खड़े होने के बजाए स्वीपर को रुपये और फार्म देकर चलते बनते थे। हालांकि खाताधारकों के शाखा में पहुंचने से पहले ही उनके पास रसीद भेजवा देता था। खाताधारक विश्वास पर रुपये जमा करने के लिए देते गए और स्वीपर उड़ाता चला गया। यह खेल लंबे समय से चल रहा था। ऐसे में यह संभव नहीं कि वह अकेले यह सबकुछ कर रहा था। इसमें बैंककर्मियों की भी पूरी मिलीभगत है। बीते दिनों सड़क दुर्घटना में घायल होने पर उसका पैर टूट गया। इन दिनों इलाहाबाद स्थित एक निजी नर्सिंगहोम में इलाज चल रहा है। बैंककर्मियों ने चंदा लगाकर इलाज का खर्च दिया। मगर उन्हें क्या मालूम कि वह करीबी बनकर उनके लिए ही सिरदर्द बनेगा।
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जिले के सांगीपुर इलाके के बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक शाहबरी में 62 लाख रुपये के फर्जीवाडे़ का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक कंधई मधुपुर में 25 लाख रुपये के गबन का खुलासा हुआ है। इस शाखा में तैनात एक संविदाकर्मी ने खाताधारकों के साथ विश्वासघात करके रुपये हजम कर लिया हैं। रुपये जमा करने के लिए शाखा में पहुंचने वाले खाताधारकों से रुपये लेने के बाद भी जमा नहीं किया जाता था। उन्हें फर्जी रसीद दे दी जाती थी। कुछ खातेदार ऐसे भी हैं, जिनका विड्राल फार्म पर फर्जी दस्तखत बनाकर रुपये निकाल लिए गए। रुकसानाबानो, रियाज अहमद, नागेंद्र, राजाराम मौर्य, रेनू, जमील अहमद, जमीलाबानो, मोनू उमरवैश्य, शबानाबानो, मुख्तार अहमद, रामकरन, रुकसानाबानो, अनिल यादव, अनवर आदि ग्राहकों की मानें तो वह शाखा में ही तैनात एक स्वीपर को रुपये जमा करने के लिए देते थे। मगर जब वह रुपये निकालने गए, तो खाते में रुपये नहीं मिले। इधर कंधईमधुपुर पुलिस ने रुकसानाबानो की तहरीर पर शाखा प्रबंधक सहित सभी कर्मचारियों के खिलाफ मुुकदमा दर्ज किया है। शाखा में दिनभर शिकायत दर्ज करने वाले खाताधारकों के आने का सिलसिला जारी रहा।
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शाखा प्रबंधक ने स्वीपर के खिलाफ दी तहरीर
कंधई मधुपुर शाखा में तैनात शाखा प्रबंधक जगदीशचंद्र ने शाखा में तैनात रहे स्वीपर मुहर्रम के खिलाफ तहरीर दी है। जिसमें आरोप लगाया है कि वह खाताधारकों के रुपये खाते में जमा करने के बजाय जेब में रख लेता था और फर्जी रसीद पकड़ा देता था।
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बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक कंधईपुर शाखा में अभी तक छह लाख रुपये की गड़बड़ी की शिकायत मिली है। यह बात सही है कि स्वीपर ने खाताधारकों से रुपये लिए और खाते में जमा नहीं किया, फार्म पर फर्जी दस्तखत बनाकर रुपये भी निकाले हैं। टीम बनाकर गहराई से जांच कराई जा रही है। शाखा प्रबंधक को
स्वीपर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए कंधई थाने भेजा गया है।
जीतेंद्र कुमार, आरएम, बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक।
स्वीपर बन गया था कैशियर
बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक कंधई मधुपुर में संविदा पर तैनात स्वीपर ही कैशियर बन गया था। शाखा प्रबंधक का विश्वासपात्र होनेे के कारण उसके ऊपर कैश काउंटर की जिम्मेदारी छोड़ दी जाती थी। स्थानीय होने के कारण लोग स्वीपर को कर्मचारी समझने लगे थे। बैंक में कोई भी कार्य हो, बगैर स्वीपर के नहीं होता था। दुर्घटना में उसका पैर टूटने पर कर्मचारियों ने इलाज कराने के लिए चंदा जुटाया था।
बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक कंधई मधुपुर में संविदा पर तैनात स्वीपर बैंक की सफाई करने के साथ ही कैश काउंटर की जिम्मेदारी संभालता था। इससे स्थानीय खाताधारक उसे बैंक का कर्मचारी समझने लगे थे। खाताधारकों के बीच विश्वास जमाने के लिए प्रमोशन मिलने की बात कहता था। यही वजह थी कि अधिकांश खाताधारक लाइन में खड़े होने के बजाए स्वीपर को रुपये और फार्म देकर चलते बनते थे। हालांकि खाताधारकों के शाखा में पहुंचने से पहले ही उनके पास रसीद भेजवा देता था। खाताधारक विश्वास पर रुपये जमा करने के लिए देते गए और स्वीपर उड़ाता चला गया। यह खेल लंबे समय से चल रहा था। ऐसे में यह संभव नहीं कि वह अकेले यह सबकुछ कर रहा था। इसमें बैंककर्मियों की भी पूरी मिलीभगत है। बीते दिनों सड़क दुर्घटना में घायल होने पर उसका पैर टूट गया। इन दिनों इलाहाबाद स्थित एक निजी नर्सिंगहोम में इलाज चल रहा है। बैंककर्मियों ने चंदा लगाकर इलाज का खर्च दिया। मगर उन्हें क्या मालूम कि वह करीबी बनकर उनके लिए ही सिरदर्द बनेगा।