फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   CBI raiding the way to shoot Inspector Anil

इंस्पेक्टर अनिल को गोली लगने के तरीके को लेकर चकराई सीबीआई

Wed, 28 Nov 2018 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Wed, 28 Nov 2018 12:35 AM IST
विज्ञापन
CBI raiding the way to shoot Inspector Anil
प्रतापगढ़। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो; प्रतापगढ़।
 पूर्व शहर कोतवाल अनिल कुमार की हत्या की जांच करने आई सीबीआई टीम चकरा गई है। पुलिस की कहानी बूझने के बाद जब सीबीआई टीम ने सोमवार की रात घटनास्थल पर पहुंचकर क्राइम सीन तैयार किया तो हैरत में पड़ गई। इंस्पेक्टर अनिल के सीने में गोली लगने के बाद नीचे की ओर निकल गई थी। जबकि बुलेट ऊपर की ओर निकलनी चाहिए। पूछताछ के लिए बुलाए गए इंस्पेक्टर हरपाल समेत सभी लोगों को छोड़ दिया गया। नगर कोतवाली पुलिस से सीबीआई टीम ने अभिलेख के साथ ही दोनों पिस्टल कब्जे में ले ली।  
विज्ञापन



लखनऊ के गाजीपुर थाना क्षेत्र के आम्रपाली कालोनी के रहने वाले इंस्पेक्टर अनिल कुमार की 19 नवंबर 2015 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इंस्पेक्टर की पत्नी आरती गुर्जर व भाई विनोद ने घटना को साजिश ठहराते हुए सीबीआई से जांच कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने घटना की जांच प्रारंभ कर दी है। दिल्ली व लखनऊ से आई सीबीआई की टीमें मंगलवार को भी छानबीन करती रहीं। रात में कई घंटे तक क्राइम सीन तैयार करने वाली सीबीआई उस समय हैरत में पड़ गई जब हत्यारोपी बोचा सोनी व घटनास्थल पर मौजूद लोगों से पूछताछ में फायरिंग के तरीके की हकीकत जानी।
विज्ञापन



टीम का मानना है कि इंस्पेक्टर अनिल के सीने में लगी गोली नीचे से निकल गई थी, जबकि बुलेट को ऊपर की ओर निकलना चाहिए। जिस स्थान से फायरिंग हुई है, वहां से चली गोली की मारक क्षमता कम हो जाती है। जो बाहर पार नहीं हो सकती। घटनास्थल पर जो खोखा मिला था, वह नाइन एमएम का था। सीबीआई ने अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ ही वीडियोग्राफी भी तलब की है। नगर कोतवाली पहुंचकर सीबीआई ने जरूरी अभिलेख मांगे और पुलिसकर्मियों से पूछताछ करने के बाद घटना में प्रयुक्त दोनों पिस्टल अपने कब्जे में ले लीं। जिला पंचायत में पूछताछ के लिए बुलाए गए इंस्पेक्टर हरिपाल यादव, मैनेजर अमित सिंह, सिपाही राजेंद्र उपाध्याय, हत्यारोपी बोचा सोनी और घटनास्थल पर मौजूद अभिषेक, विवेक से पूछताछ के बाद सभी को घर जाने दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन



दिल्ली से आई सीबीआई टीम को शहर के एक होटल में रुकी थी। होटल मैनेजर अमित सिंह व हत्यारोपी बोचा सोनी का मंगलवार को पॉलीग्राफी टेस्ट होना था, लेकिन नहीं हो सका। सोमवार को मोनू पटवा को पूछताछ के बाद सीबीआई टीम ने घर भेज दिया। मोनू को सीबीआई ने सीधा चश्मदीद नहीं माना। दिल्ली से घटनाक्रम की छानबीन करने आई टीम वापस लौट गई। लखनऊ की टीम देर रात तक जिले में डेरा डाले रही।



इंस्पेक्टर अनिल कुमार का प्राइवेट चालक नर्देश्वर यादव निवासी आजमगढ़ को भी सीबीआई टीम ने बयान देने के लिए जिला पंचायत तलब किया था लेकिन वह बयान देने नहीं आया। उसके मोबाइल पर टीम ने संपर्क किया तो उसने खुद को मैहर में दर्शन करने के पहुंचने की जानकारी दी। टीम उसकी लोकेशन को ट्रेस करने में जुटी हुई है।



लखनऊ सीबीआई के एएसपी आरएन मिश्र की अगुवाई में टीम इंस्पेक्टर की हत्या की हकीकत की छानबीन करने में जुटी हुई है। पत्नी आरती व भाई विनोद का कहना है कि इंस्पेक्टर अनिल को संदेह था कि उनकी हत्या हो सकती है। वह अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ला के हत्यारों तक पहुंच गए थे, लेकिन इससे पहले ही तत्कालीन एसपी सुनील सक्सेना ने उन्हें निलंबित कर दिया था। वह अपनी पत्नी व करीबी लोगों से निलंबन के दौरान अनहोनी की आशंका जता चुके थे। इसके चलते सीबीआई अनिल कुमार से रंजिश रखने वालों की तलाश में जुटी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed