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बड़े-बड़े होंगे कंगाल
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Wed, 16 Nov 2016 11:41 PM IST
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बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा से संचालित स्कूल कॉलेजों में पढ़ाने वाले गुरुजनों ने भी प्रापर्टी डीलिंग और कई अन्य कामों में हाथ डालकर अकूत संपत्ति बनाई। स्कूल व कॉलेज में बच्चों को पढ़ाने से अधिक उनका अपने काले कारोबार पर रहा। कुछ ही सालों में आलीशान मकान के साथ ही रिश्तेदारों व परिजनों के नाम पर ठेकेदारी के साथ प्रापर्टी डीलिंग के धंधे का साम्राज्य खड़ा कर लिया।
जनपद के बेसिक व माध्यमिक विभाग से संचालित स्कूल व कॉलेजों में बच्चों का भविष्य संवारने वाले दर्जनों गुरुजन एक दशक के भीतर बिजनेसमैन बन गए। प्रिंसिपल व प्रबंधक की कृपा से उनकी नौकरी तो चल ही रही है, नेताओं की कृपा से काली कमाई का धंधा भी फल-फूल रहा है। खास बात यह है कि सबसे अधिक बेसिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक शहर के इर्द-गिर्द जमीनों के कारोबार से जुड़ गए। वे शहर के अलावा जनपद के दूसरे हिस्सों में भी लोगों की पूंजी लगवाने के साथ कमीशन का खेल
खेलने लगे। एक दूसरे के साथ मिलकर जमीन का व्यवसाय शुरू कर दिया।
अपने परिवार या रिश्तेदारों के नाम से बेनामी संपत्ति जुटाई। किसी से एग्रीमेंट कराया है तो किसी को जमीन के लिए एडवांस पैसा दे रखा है। चर्चा तो यहां तक है कि स्कूलों में पढ़ाने वाले कई शिक्षक लोनिवि, जिला पंचायत व शिक्षा विभाग से निकलने वाले कामों को भी अपने प्रभाव का प्रयोग कर अपने रिश्तेदार या करीबी के
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नाम से बनाई गई संस्था को ठेका दिलाते हैं।
ऐसे गुरुजन को तनख्वाह भले ही 30 से लेकर 50 हजार तक मिलती है, लेकिन एक गुरुजी ने अपनी काली कमाई से होटल, लाज के साथ ही कुछ दिनों पहले सिनेमाघर तक का सौदा कर डाला। अब तो विभाग के लोग भी कहने लगे हैं कि प्रधानमंत्री ने यदि बेनामी संपत्तियों की जांच कर शिकंजा कसा तो कई शिक्षकों के गले में भी फंदा कसेगा।
निलंबित शिक्षक इलाहाबाद में कर रहे प्रापर्टी का कारोबार
बेसिक शिक्षा विभाग में ऐेसे कई शिक्षक काफी अरसे से निलंबित चल रहे हैं। वे खुद की बहाली कराने के लिए फिक्रमंद नहीं हैं। स्कूलों में पढ़ाने वाले मेहनती शिक्षकों ने दबी जुबान से बताया कि निलंबित शिक्षकों का अपना अलग फंडा है। वे निलंबन के बाद अपने व्यवसाय पर ध्यान देते हैं। उन्हें पता है कि विभाग सरकारी वेतन में नियम से अधिक कोई कटौती नहीं कर सकता। उसे वेतन मिलेगा। कई शिक्षकों ने इलाहाबाद में प्रापर्टी डीलिंग के धंधे में जुड़ गए हैं। भले ही कई गुरुजी जनपद में नौकरी कर रहे हैं, लेकिन काली कमाई के साम्राज्य के बाद उन लोगों ने परिवार को इलाहाबाद और लखनऊ में शिफ्ट कर दिया है।
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जनपद के बेसिक व माध्यमिक विभाग से संचालित स्कूल व कॉलेजों में बच्चों का भविष्य संवारने वाले दर्जनों गुरुजन एक दशक के भीतर बिजनेसमैन बन गए। प्रिंसिपल व प्रबंधक की कृपा से उनकी नौकरी तो चल ही रही है, नेताओं की कृपा से काली कमाई का धंधा भी फल-फूल रहा है। खास बात यह है कि सबसे अधिक बेसिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक शहर के इर्द-गिर्द जमीनों के कारोबार से जुड़ गए। वे शहर के अलावा जनपद के दूसरे हिस्सों में भी लोगों की पूंजी लगवाने के साथ कमीशन का खेल
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खेलने लगे। एक दूसरे के साथ मिलकर जमीन का व्यवसाय शुरू कर दिया।
अपने परिवार या रिश्तेदारों के नाम से बेनामी संपत्ति जुटाई। किसी से एग्रीमेंट कराया है तो किसी को जमीन के लिए एडवांस पैसा दे रखा है। चर्चा तो यहां तक है कि स्कूलों में पढ़ाने वाले कई शिक्षक लोनिवि, जिला पंचायत व शिक्षा विभाग से निकलने वाले कामों को भी अपने प्रभाव का प्रयोग कर अपने रिश्तेदार या करीबी के
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नाम से बनाई गई संस्था को ठेका दिलाते हैं।
ऐसे गुरुजन को तनख्वाह भले ही 30 से लेकर 50 हजार तक मिलती है, लेकिन एक गुरुजी ने अपनी काली कमाई से होटल, लाज के साथ ही कुछ दिनों पहले सिनेमाघर तक का सौदा कर डाला। अब तो विभाग के लोग भी कहने लगे हैं कि प्रधानमंत्री ने यदि बेनामी संपत्तियों की जांच कर शिकंजा कसा तो कई शिक्षकों के गले में भी फंदा कसेगा।
निलंबित शिक्षक इलाहाबाद में कर रहे प्रापर्टी का कारोबार
बेसिक शिक्षा विभाग में ऐेसे कई शिक्षक काफी अरसे से निलंबित चल रहे हैं। वे खुद की बहाली कराने के लिए फिक्रमंद नहीं हैं। स्कूलों में पढ़ाने वाले मेहनती शिक्षकों ने दबी जुबान से बताया कि निलंबित शिक्षकों का अपना अलग फंडा है। वे निलंबन के बाद अपने व्यवसाय पर ध्यान देते हैं। उन्हें पता है कि विभाग सरकारी वेतन में नियम से अधिक कोई कटौती नहीं कर सकता। उसे वेतन मिलेगा। कई शिक्षकों ने इलाहाबाद में प्रापर्टी डीलिंग के धंधे में जुड़ गए हैं। भले ही कई गुरुजी जनपद में नौकरी कर रहे हैं, लेकिन काली कमाई के साम्राज्य के बाद उन लोगों ने परिवार को इलाहाबाद और लखनऊ में शिफ्ट कर दिया है।