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प्रतापगढ़ में मिड डे मील का दूध पीकर 72 बच्चे बीमार
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 07 Mar 2018 11:23 PM IST
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दूध पीने से बीमार बच्चों को अस्पताल ले जाते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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रानीगंज इलाके के फतनपुर प्राइमरी स्कूल में बुधवार को मिड डे मील का दूध पीने के बाद 72 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। कई बच्चे बेहोश हो गए। इससे हड़कंप मच गया। दो बच्चों की हालत गंभीर देख डाक्टरों ने इलाहाबाद रेफर कर दिया। अन्य बच्चों को जिला अस्पताल और सीएचसी गौरा में भर्ती कराया गया है। घटना की जानकारी मिलने पर डीएम अस्पताल पहुंचे। लापरवाही सामने आने पर प्रधानाध्यापक और एक सहायक अध्यापक को सस्पेंड कर दिया। साथ ही दो शिक्षकों का वेतन रोका गया है। पुलिस दो रसोइयों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
गौरा विकासखंड के फतनपुर प्राइमरी स्कूल में कुल 123 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। बुधवार को स्कूल लगभग 86 बच्चे पढने आए थे। दोपहर में स्कूल में तैनात तीन रसोइयों ने पहले बच्चों को खिचड़ी खिलाई। कुछ देर बाद सभी बच्चों को दूध पीने के लिए दिया। करीब एक घंटे बाद एक-एक कर बच्चों की हालत बिगड़ने लगी। उन्हें उल्टियां शुरू हो गईं। बच्चों का आरोप है कि स्कूल के भीतर उल्टी करने पर शिक्षक उन्हें डांटने लगे। लापरवाही बरतते हुए शिक्षक व रसोइयों ने बच्चों को बाहर कर स्कूल में ताला बंद कर दिया।
बच्चे किसी तरह घर पहुंचे तो उनकी दशा देख परिजन हैरान हो गए। इस बीच कई बच्चे घर में बेहोश हो गए। यह देखकर रोना-पीटना मच गया। लोग अपने बच्चों को लेकर गौरा सीएचसी पहुंचे। एक-एक कर 72 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। मामले की जानकारी मिलते ही एडीएम सोमदत्त मौर्य, एएसपी पश्चिमी बसंताल, एसडीएम रानीगंज, सीओ रानीगंज के साथ ही सीएमओ आसपास के डाक्टरों को लेकर अस्पताल पहुंचे। पटहटिया कला के रहने वाले राजेश गौतम के बेटे अनुज गौतम (4) और बेटी बेबी गौतम की हालत गंभीर देख जिला अस्पताल भेजा गया। इसके अलावा 40 अन्य पीड़ित बच्चों को भी जिला अस्पताल एंबुलेंस व दूसरे वाहनों से भेजा गया। यहां जिलाधिकारी शंभु कुमार, सीडीओ राजकमल व सीआरओ अस्पताल पहुंचे। पीड़ित बच्चों का उपचार चल रहा है। हालत गंभीर होने के कारण अनुज और बेबी को डाक्टरों ने जिला अस्पताल से इलाहाबाद रेफर कर दिया।
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बेसिक शिक्षा अधिकारी दोनों बच्चों को लेकर एसआरएन रवाना हुए। एक साथ इतनी संख्या में बच्चों के बीमार होने से गौरा सीएचसी से जिला अस्पताल तक चीखपुकार मची रही। बीएसए भूपेंद्र नारायण सिंह ने बताया कि लापरवाही बरतने वाले प्रधानाध्यापक आशुतोष शुक्ला व सहायक शिक्षक कमलेश पाल को सस्पेंड कर दिया गया है। शिक्षिका वाल्मीकि सरोज व अंजू यादव का वेतन रोक दिया गया है। घटना की जांच करने के लिए शिवगढ़ व पट्टी खंड शिक्षा अधिकारियों की कमेटी बनाई गई है। पुलिस ने स्कूल से उल्टी वाली टाटपट्टी व चटाई अपने कब्जे में ले ली है। रसोइया विमला देवी की तबीयत खराब होने के कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। रसोइया रामआसरे और क्रांति देवी को फतनपुर पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। बच्चों को दिए गए दूध का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा गया है।
गौरा सीएचसी से जिला अस्पताल तक कोहराम
गौरा से लेकर जिला अस्पताल तक बच्चों व उनके परिजनों के चीख पुकार से कोहराम मचा रहा। अफरा-तफरी के बीच डाक्टर पीड़ित बच्चों का उपचार करते रहे। बिस्तर न मिलने पर बच्चों को जमीन पर बैठाकर डाक्टरों ने इलाज किया। डाक्टरों की टीम के साथ अफसर डटे रहे।
प्राइमरी स्कूल फतनपुर में मिड्डेमील का दूध पीने से 72 बच्चों की तबियत खराब हो गई थी। जिन्हे उपचार के लिए पहले गौरा अस्पताल ले जाया गया। अचानक इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के पहुंचने से अस्तपाल में अफरा-तफरी मच गई। चिकित्सा प्रभारी अपनी टीम के साथ सभी का इलाज करने में जुटे रहे। बिस्तर कम पड़ने व अंधेरा होने के कारण बच्चों को लेकर परिजन जमीन पर बैठ गए। जहां स्वास्थ्यकर्मचारी बच्चों का इलाज करते रहे। मामले की जानकारी के बाद जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डा. आरपी चौबे, मनोज खत्री, अनिल गुप्ता, मोहित शुक्ला, अनुज चौरसिया समेत दूसरे डाक्टर इमरजेंसी से लेकर नेत्र वार्ड तक मुस्तैद हो गए।
वहां से भेजे गए बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया जाता रहा। बच्चों के रोने बिलखने के साथ ही परिजन भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। बच्चों के साथ तीमारदारों की भीड़ व अफसरों की मौजूदगी से हर ओर अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया। चिकित्सक बच्चों का उपचार करने में पसीना बहाते रहे। यह क्रम देर रात तक बना रहा।
शिक्षकों ने बनाई दूरी, एक बच्चे को मिलता है 100 ग्राम दूध
शासन के निर्देश पर बच्चों को दूध वितरित किया जाता है। हर बुधवार को प्राइमरी व मिडिल स्कूल के बच्चों को 100 ग्राम दिए जाने का प्रावधान है। हर बुधवार की तरह आज भी बच्चोें को दूध पीने के लिए उपलब्ध कराया गया। खास बात यह रही कि बच्चों को भोजन व दूध देने से पहले शिक्षक व रसोइयों को पहले खुद खाना चेक करना होता है लेकिन प्राइमरी स्कूल में नियम कानून को ताक पर रखा गया। केवल रसोइयां विमला देवी ने दूध का सेवन किया। शिक्षक और शिक्षिकाओं ने दूध व खिचड़ी से दूरी बनाए रखा। तभी तो जिन बच्चों ने दूध का सेवन किया। उनकी ही तबियत बिगड़ी। शासन के आदेश का कितना पालन हो रहा है इसकी बानगी आज देखने को मिली। अफसर भी औचक निरीक्षण के दौरान मातहतों की कारगुजारी की गहराई से जांच करना मुनासिब नहीं समझते।
स्काट प्रभारी ने लिया जायजा, दूध कब्जे में
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से मिड्डे मील की गुणवत्ता परखने वाली टीम काम करती है। मामले की जानकारी के बाद सैंपल लेने के लिए स्काट प्रभारी प्रवीण मिश्रा व विजय यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने दूध को कब्जे में ले लिया। इस दौरान 86 बच्चों को एमडीएम के तहत खिचड़ी व दूध दिया जाना रजिस्टर में दर्ज था।
एसडीएम ने लगाई अधीक्षक को फटकार
गौरा अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी को उस समय एसडीएम की फटकार सुननी पड़ी। जब उनसे बीमार बच्चों की संख्या पूछा गया। वह बता पाने में असमर्थ दिखे। जिस पर एसडीएम ने फटकार लगाई।
आईजी भी पहुंचे जिला अस्पताल
मिड्डे मील का दूध पीने से 72 बच्चों की तबियत खराब होने की खबर पर आईजी रमित शर्मा जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पीड़ित बच्चों से वार्ड में जाकर मुलाकात की। जो बच्चे ठीक थे, उनसे बातचीत के साथ ही परिवार के लोगों से भी जानकारी ली। इस दौरान पुलिस विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। जिलाधिकारी से मामले की जानकारी ली। करीब आधे घंटे तक अस्पताल में रहने के बाद वह इलाहाबाद के लिए रवाना हो गए।
अफसरों के जाते ही गायब हो गए चिकित्सक
जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराए गए बच्चों का इलाज करने के लिए अफसरों के आदेश पर डाक्टरों की फौज जमा हो गई। अफसरों के जाने के बाद डाक्टर भी खिसक लिए। रात नौ बजे केवल अस्पताल में एक ही डाक्टर मौजूद रहने की बात सामने आई। जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी ने प्रभारी सीएमएस को फटकार लगाई।
बच्चों को बेहोश होते देख भाग निकले अध्यापक
बुधवार को रानीगंज इलाके के फतनपुर प्राइमरी स्कूल में हुई घटना ने प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की जिंदगी से हो रहे खिलवाड़ की पोल खोलकर रख दी है। बच्वों ने बताया कि दूधिए से दूध लेने के बाद उसमें पाउडर मिलाकर मात्रा बढ़ाई जाती थी। कमाई के फेर में शिक्षिक और रसोइएं मिलकर यह खेल करते थे। बुधवार को जब एक-एक कर बच्चों की हालत बिगड़ने लगी तो अध्यापक उन्हें स्कूल से बाहर कर भाग निकले। अफसर प्रधानाध्यापक से लेकर शिक्षकों की खोजबीन करते रहे, लेकिन मोबाइल बंद कर सभी गायब रहे।
फतनपुर प्राइमरी स्कूल में बुधवार दोपहर खिचड़ी खाने के बाद मिडडेमील का दूध पीने से 72 बच्चों की तबियत बिगड़ गई। किसी को उल्टी दस्त होने लगी तो कोई बेहोश हो गया। पीड़ित बच्चों को लेकर परिजन रोते बिलखते गौरा अस्पताल पहुंचे। इससे इलाके में सनसनी फैल गई। प्रशासनिक अमले के हाथ-पांव फूल गए। आननफानन में डाक्टरों की टीम लेकर सीएमओ अस्पताल पहुंचे। बच्चों का उपचार कराने के बाद अधिकारियों की टीम प्राइमरी स्कूल पहुंची। जहां रसोईघर में एक बर्तन में 250 सौ ग्राम दूध मिला।
जिसका नमूना लिया गया। अभिभावक भी पहुंच गए। पूछताछ के दौरान बच्चों ने बताया था कि खिचड़ी खाने में पहले दी गई थी। बाद में दूध पीने के लिए दिया गया। जो बांटने के दौरान खत्म भी हो गया था। रसोइयां विमला ने बच्चों को दूध बांटने के दौरान खुद भी पी लिया। किसी दूधवाले से प्रधानाध्यापक दूध लेते थे। बच्चों की मानें तो केवल एक लीटर दूध ही खरीदा जाता था। बाद में पानी और पाउडर मिलाकर बच्चों को वितरित होता था। दूध के नाम पर बच्चों को अब तक जहर पिलाया जाता रहा।
लोग अफसरों से सवाल करते रहे कि जब दूध खत्म हो गया था तो फिर से कहां से बर्तन में मिला। आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन था। लोगों के आक्रोश को देखते हुए अधिकारियों ने प्रकरण को गंभीरता से लिया। सभी को बताया कि लापरवाह शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है। उनके खिलाफ मुकदमा भी लिखाया जा रहा है। प्रधानाध्यापक से लेकर शिक्षिका व शिक्षक सभी के मोबाइल बंद थे। अफसर उन्हें खोजते रहे लेकिन कोई नहीं मिला।
दूध में अधिक वैक्टीरिया के कारण बच्चों की बिगड़ी तबियत
दूध पीने के बाद स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की तबियत परिसर में ही बिगड़ने लगी थी। बवाल टालने के लिए शिक्षक ने बच्चों की छुट्टी कर दी। छोटे बच्चे पहले बीमार पड़ने लगे। बड़े बच्चे घर पहुंचकर बेहोश हुए। दूध में अधिक वैक्टीरिया होने के कारण बच्चों की तबियत खराब हुई थी।
फतनपुर प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे बुधवार की सुबह स्कूल पहुंचे। दोपहर में बच्चों ने स्कूल परिसर में खिचड़ी खाया। कुछ देर बाद बच्चों को दूध दिया गया। करीब एक घंटे बाद छोटे बच्चों पर जहरीले दूध का असर दिखने लगा। उनके उल्टी दस्त होने लगी। जिसके कारण शिक्षिका व शिक्षक घबराने के साथ ही चालाकी भी दिखाई। बच्चों को बाहर निकालने के बाद बाजार से दूध खरीद लाया और उसे बर्तन में रख दिया। ताकि बड़ी घटना पर भी उन्हें क्लीनचिट मिल सके।
बाल रोग विशेषज्ञ डा. अनिल गुप्ता की मानें तो दूध में अधिक वैक्टीरिया के कारण बच्चों की सेहत बिगड़ी। संक्रमित दूध बच्चों को पिलाया गया है। जिसका असर बच्चों में देखने को मिल रहा है। खबर भेजे जाने तक जिला अस्पताल में लगभग 55 बच्चों को भर्ती कराया गया। गौरा सीएचसी में 15 बच्चों का उपचार चल रहा है। लगभग दो दर्जन बच्चे बेहोश होने की बात सामने आ रही है।
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गौरा विकासखंड के फतनपुर प्राइमरी स्कूल में कुल 123 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। बुधवार को स्कूल लगभग 86 बच्चे पढने आए थे। दोपहर में स्कूल में तैनात तीन रसोइयों ने पहले बच्चों को खिचड़ी खिलाई। कुछ देर बाद सभी बच्चों को दूध पीने के लिए दिया। करीब एक घंटे बाद एक-एक कर बच्चों की हालत बिगड़ने लगी। उन्हें उल्टियां शुरू हो गईं। बच्चों का आरोप है कि स्कूल के भीतर उल्टी करने पर शिक्षक उन्हें डांटने लगे। लापरवाही बरतते हुए शिक्षक व रसोइयों ने बच्चों को बाहर कर स्कूल में ताला बंद कर दिया।
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बच्चे किसी तरह घर पहुंचे तो उनकी दशा देख परिजन हैरान हो गए। इस बीच कई बच्चे घर में बेहोश हो गए। यह देखकर रोना-पीटना मच गया। लोग अपने बच्चों को लेकर गौरा सीएचसी पहुंचे। एक-एक कर 72 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। मामले की जानकारी मिलते ही एडीएम सोमदत्त मौर्य, एएसपी पश्चिमी बसंताल, एसडीएम रानीगंज, सीओ रानीगंज के साथ ही सीएमओ आसपास के डाक्टरों को लेकर अस्पताल पहुंचे। पटहटिया कला के रहने वाले राजेश गौतम के बेटे अनुज गौतम (4) और बेटी बेबी गौतम की हालत गंभीर देख जिला अस्पताल भेजा गया। इसके अलावा 40 अन्य पीड़ित बच्चों को भी जिला अस्पताल एंबुलेंस व दूसरे वाहनों से भेजा गया। यहां जिलाधिकारी शंभु कुमार, सीडीओ राजकमल व सीआरओ अस्पताल पहुंचे। पीड़ित बच्चों का उपचार चल रहा है। हालत गंभीर होने के कारण अनुज और बेबी को डाक्टरों ने जिला अस्पताल से इलाहाबाद रेफर कर दिया।
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बेसिक शिक्षा अधिकारी दोनों बच्चों को लेकर एसआरएन रवाना हुए। एक साथ इतनी संख्या में बच्चों के बीमार होने से गौरा सीएचसी से जिला अस्पताल तक चीखपुकार मची रही। बीएसए भूपेंद्र नारायण सिंह ने बताया कि लापरवाही बरतने वाले प्रधानाध्यापक आशुतोष शुक्ला व सहायक शिक्षक कमलेश पाल को सस्पेंड कर दिया गया है। शिक्षिका वाल्मीकि सरोज व अंजू यादव का वेतन रोक दिया गया है। घटना की जांच करने के लिए शिवगढ़ व पट्टी खंड शिक्षा अधिकारियों की कमेटी बनाई गई है। पुलिस ने स्कूल से उल्टी वाली टाटपट्टी व चटाई अपने कब्जे में ले ली है। रसोइया विमला देवी की तबीयत खराब होने के कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। रसोइया रामआसरे और क्रांति देवी को फतनपुर पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। बच्चों को दिए गए दूध का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा गया है।
गौरा सीएचसी से जिला अस्पताल तक कोहराम
गौरा से लेकर जिला अस्पताल तक बच्चों व उनके परिजनों के चीख पुकार से कोहराम मचा रहा। अफरा-तफरी के बीच डाक्टर पीड़ित बच्चों का उपचार करते रहे। बिस्तर न मिलने पर बच्चों को जमीन पर बैठाकर डाक्टरों ने इलाज किया। डाक्टरों की टीम के साथ अफसर डटे रहे।
प्राइमरी स्कूल फतनपुर में मिड्डेमील का दूध पीने से 72 बच्चों की तबियत खराब हो गई थी। जिन्हे उपचार के लिए पहले गौरा अस्पताल ले जाया गया। अचानक इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के पहुंचने से अस्तपाल में अफरा-तफरी मच गई। चिकित्सा प्रभारी अपनी टीम के साथ सभी का इलाज करने में जुटे रहे। बिस्तर कम पड़ने व अंधेरा होने के कारण बच्चों को लेकर परिजन जमीन पर बैठ गए। जहां स्वास्थ्यकर्मचारी बच्चों का इलाज करते रहे। मामले की जानकारी के बाद जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डा. आरपी चौबे, मनोज खत्री, अनिल गुप्ता, मोहित शुक्ला, अनुज चौरसिया समेत दूसरे डाक्टर इमरजेंसी से लेकर नेत्र वार्ड तक मुस्तैद हो गए।
वहां से भेजे गए बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया जाता रहा। बच्चों के रोने बिलखने के साथ ही परिजन भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। बच्चों के साथ तीमारदारों की भीड़ व अफसरों की मौजूदगी से हर ओर अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया। चिकित्सक बच्चों का उपचार करने में पसीना बहाते रहे। यह क्रम देर रात तक बना रहा।
शिक्षकों ने बनाई दूरी, एक बच्चे को मिलता है 100 ग्राम दूध
शासन के निर्देश पर बच्चों को दूध वितरित किया जाता है। हर बुधवार को प्राइमरी व मिडिल स्कूल के बच्चों को 100 ग्राम दिए जाने का प्रावधान है। हर बुधवार की तरह आज भी बच्चोें को दूध पीने के लिए उपलब्ध कराया गया। खास बात यह रही कि बच्चों को भोजन व दूध देने से पहले शिक्षक व रसोइयों को पहले खुद खाना चेक करना होता है लेकिन प्राइमरी स्कूल में नियम कानून को ताक पर रखा गया। केवल रसोइयां विमला देवी ने दूध का सेवन किया। शिक्षक और शिक्षिकाओं ने दूध व खिचड़ी से दूरी बनाए रखा। तभी तो जिन बच्चों ने दूध का सेवन किया। उनकी ही तबियत बिगड़ी। शासन के आदेश का कितना पालन हो रहा है इसकी बानगी आज देखने को मिली। अफसर भी औचक निरीक्षण के दौरान मातहतों की कारगुजारी की गहराई से जांच करना मुनासिब नहीं समझते।
स्काट प्रभारी ने लिया जायजा, दूध कब्जे में
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से मिड्डे मील की गुणवत्ता परखने वाली टीम काम करती है। मामले की जानकारी के बाद सैंपल लेने के लिए स्काट प्रभारी प्रवीण मिश्रा व विजय यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने दूध को कब्जे में ले लिया। इस दौरान 86 बच्चों को एमडीएम के तहत खिचड़ी व दूध दिया जाना रजिस्टर में दर्ज था।
एसडीएम ने लगाई अधीक्षक को फटकार
गौरा अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी को उस समय एसडीएम की फटकार सुननी पड़ी। जब उनसे बीमार बच्चों की संख्या पूछा गया। वह बता पाने में असमर्थ दिखे। जिस पर एसडीएम ने फटकार लगाई।
आईजी भी पहुंचे जिला अस्पताल
मिड्डे मील का दूध पीने से 72 बच्चों की तबियत खराब होने की खबर पर आईजी रमित शर्मा जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पीड़ित बच्चों से वार्ड में जाकर मुलाकात की। जो बच्चे ठीक थे, उनसे बातचीत के साथ ही परिवार के लोगों से भी जानकारी ली। इस दौरान पुलिस विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। जिलाधिकारी से मामले की जानकारी ली। करीब आधे घंटे तक अस्पताल में रहने के बाद वह इलाहाबाद के लिए रवाना हो गए।
अफसरों के जाते ही गायब हो गए चिकित्सक
जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराए गए बच्चों का इलाज करने के लिए अफसरों के आदेश पर डाक्टरों की फौज जमा हो गई। अफसरों के जाने के बाद डाक्टर भी खिसक लिए। रात नौ बजे केवल अस्पताल में एक ही डाक्टर मौजूद रहने की बात सामने आई। जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी ने प्रभारी सीएमएस को फटकार लगाई।
बच्चों को बेहोश होते देख भाग निकले अध्यापक
बुधवार को रानीगंज इलाके के फतनपुर प्राइमरी स्कूल में हुई घटना ने प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की जिंदगी से हो रहे खिलवाड़ की पोल खोलकर रख दी है। बच्वों ने बताया कि दूधिए से दूध लेने के बाद उसमें पाउडर मिलाकर मात्रा बढ़ाई जाती थी। कमाई के फेर में शिक्षिक और रसोइएं मिलकर यह खेल करते थे। बुधवार को जब एक-एक कर बच्चों की हालत बिगड़ने लगी तो अध्यापक उन्हें स्कूल से बाहर कर भाग निकले। अफसर प्रधानाध्यापक से लेकर शिक्षकों की खोजबीन करते रहे, लेकिन मोबाइल बंद कर सभी गायब रहे।
फतनपुर प्राइमरी स्कूल में बुधवार दोपहर खिचड़ी खाने के बाद मिडडेमील का दूध पीने से 72 बच्चों की तबियत बिगड़ गई। किसी को उल्टी दस्त होने लगी तो कोई बेहोश हो गया। पीड़ित बच्चों को लेकर परिजन रोते बिलखते गौरा अस्पताल पहुंचे। इससे इलाके में सनसनी फैल गई। प्रशासनिक अमले के हाथ-पांव फूल गए। आननफानन में डाक्टरों की टीम लेकर सीएमओ अस्पताल पहुंचे। बच्चों का उपचार कराने के बाद अधिकारियों की टीम प्राइमरी स्कूल पहुंची। जहां रसोईघर में एक बर्तन में 250 सौ ग्राम दूध मिला।
जिसका नमूना लिया गया। अभिभावक भी पहुंच गए। पूछताछ के दौरान बच्चों ने बताया था कि खिचड़ी खाने में पहले दी गई थी। बाद में दूध पीने के लिए दिया गया। जो बांटने के दौरान खत्म भी हो गया था। रसोइयां विमला ने बच्चों को दूध बांटने के दौरान खुद भी पी लिया। किसी दूधवाले से प्रधानाध्यापक दूध लेते थे। बच्चों की मानें तो केवल एक लीटर दूध ही खरीदा जाता था। बाद में पानी और पाउडर मिलाकर बच्चों को वितरित होता था। दूध के नाम पर बच्चों को अब तक जहर पिलाया जाता रहा।
लोग अफसरों से सवाल करते रहे कि जब दूध खत्म हो गया था तो फिर से कहां से बर्तन में मिला। आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन था। लोगों के आक्रोश को देखते हुए अधिकारियों ने प्रकरण को गंभीरता से लिया। सभी को बताया कि लापरवाह शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है। उनके खिलाफ मुकदमा भी लिखाया जा रहा है। प्रधानाध्यापक से लेकर शिक्षिका व शिक्षक सभी के मोबाइल बंद थे। अफसर उन्हें खोजते रहे लेकिन कोई नहीं मिला।
दूध में अधिक वैक्टीरिया के कारण बच्चों की बिगड़ी तबियत
दूध पीने के बाद स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की तबियत परिसर में ही बिगड़ने लगी थी। बवाल टालने के लिए शिक्षक ने बच्चों की छुट्टी कर दी। छोटे बच्चे पहले बीमार पड़ने लगे। बड़े बच्चे घर पहुंचकर बेहोश हुए। दूध में अधिक वैक्टीरिया होने के कारण बच्चों की तबियत खराब हुई थी।
फतनपुर प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे बुधवार की सुबह स्कूल पहुंचे। दोपहर में बच्चों ने स्कूल परिसर में खिचड़ी खाया। कुछ देर बाद बच्चों को दूध दिया गया। करीब एक घंटे बाद छोटे बच्चों पर जहरीले दूध का असर दिखने लगा। उनके उल्टी दस्त होने लगी। जिसके कारण शिक्षिका व शिक्षक घबराने के साथ ही चालाकी भी दिखाई। बच्चों को बाहर निकालने के बाद बाजार से दूध खरीद लाया और उसे बर्तन में रख दिया। ताकि बड़ी घटना पर भी उन्हें क्लीनचिट मिल सके।
बाल रोग विशेषज्ञ डा. अनिल गुप्ता की मानें तो दूध में अधिक वैक्टीरिया के कारण बच्चों की सेहत बिगड़ी। संक्रमित दूध बच्चों को पिलाया गया है। जिसका असर बच्चों में देखने को मिल रहा है। खबर भेजे जाने तक जिला अस्पताल में लगभग 55 बच्चों को भर्ती कराया गया। गौरा सीएचसी में 15 बच्चों का उपचार चल रहा है। लगभग दो दर्जन बच्चे बेहोश होने की बात सामने आ रही है।