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कच्ची दीवार और कच्ची छत वालों को ही मिलेगा आवास
Updated Wed, 11 Jul 2018 11:53 PM IST
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प्रतापगढ़। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब उन्हीं परिवारों को आवास मिलेगा, जिनके पास कच्ची दीवार और कच्ची छत है। कहने का आशय है कि अगर कोई व्यक्ति टीनशेड में रहता है, तो पूर्व में उसे आवास के लिए पात्र माना गया था, अब उन्हें योजना से बाहर करने की तैयारी की जा रही है। प्रधानमंत्री आवास के दायरे को सीमित करते हुए मानक को कड़ा कर दिया गया है।
पक्की छत मिलने का इंतजार करने वाले हजारों उन परिवारों की उम्मीदों पर पानी फिरने वाला है, जो कच्चा मकान गिरने के बाद टीनशेड में रह रहे हैं। ऐेसे परिवारों को अब योजना से बाहर किया जा रहा है। जिस परिवार में दो पहिया वाहन है, या एक भी दीवार पक्की है, तो उसे भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। प्रधानमंत्री योजना का दायरा सीमित करने के लिए मानक को कड़ा कर दिया गया है।
विभाग में प्रतीक्षारत 2,13,548 लाभार्थियों की अधिक संख्या देखकर इस वर्ष चयन में विशेष सावधानी बरती जा रही है। शासन ने इस वर्ष आवास का लक्ष्य भी घटाकर 7,400 कर दिया है। जबकि, बीते वर्ष 10,259 आवास देने का लक्ष्य था। शासन के मानक कड़ा करने से विभाग ने प्रतीक्षा सूची में शामिल लाभार्थियों को नए सिरे से चयन करने की रणनीति बनाई है। खंड विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारियों से वास्तविक पात्रों का ही चयन करने को कहा है। अपात्रों का चयन करने पर कार्रवाई के लिए चेताया भी गया है।
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छप्पर से अधिक टीनशेड के हैं घर
ग्रामीण इलाकों में अब छप्परनुमा घर कम टीनशेड के अधिक घर दिखाई पड़ते हैं। इसकी वजह यह है कि टीन आसानी से बाजार में उपलब्ध हो जाता है और टिकाऊ भी होता है। जबकि छप्पर उठाने और तैयार करने में गांव के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
लाभार्थियों के चयन में बरतनी होगी सावधानी
इंदिरा आवास के लाभार्थियों का चयन करने के लिए इस वर्ष सावधानी बरतनी पड़ेगी। अपात्रों को योजना का लाभ पाने से रोकने के लिए निचले स्तर पर छानबीन करनी होगी। फिलहाल, विभागीय अधिकारियों की परेशानी अब यह बढ़ गई है, कि वह एक बार घर-घर जाकर लाभार्थी का चयन करें।
महंगाई बढ़ी, फिर भी नहीं बढ़ी लागत
गिट्टी, मोरंग, बालू और सीमेंट के दामों में इजाफा होने के बाद भी प्रधानमंत्री आवास निर्माण के लिए लागत राशि नहीं बढ़ी। ऐसे लाभार्थियों को यह चिंता सता रही है, कि 1.20 लाख रुपये में आवास का निर्माण कैसे होगा।
प्रधानमंत्री आवास में अब उन लोगों को आवास नहीं मिलेगा, जो प्रतीक्षा सूची में हैं। घर-घर सत्यापन अभियान चलेगा, जो वास्तव में पात्र होगा, उसे योजना का लाभ मिलेगा। फिलहाल ,सरकार कच्ची दीवार और कच्ची छत वालों को ही आवास देने की तैयारी कर रही है।
दयाराम यादव, परियोजना अधिकारी।
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पक्की छत मिलने का इंतजार करने वाले हजारों उन परिवारों की उम्मीदों पर पानी फिरने वाला है, जो कच्चा मकान गिरने के बाद टीनशेड में रह रहे हैं। ऐेसे परिवारों को अब योजना से बाहर किया जा रहा है। जिस परिवार में दो पहिया वाहन है, या एक भी दीवार पक्की है, तो उसे भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। प्रधानमंत्री योजना का दायरा सीमित करने के लिए मानक को कड़ा कर दिया गया है।
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विभाग में प्रतीक्षारत 2,13,548 लाभार्थियों की अधिक संख्या देखकर इस वर्ष चयन में विशेष सावधानी बरती जा रही है। शासन ने इस वर्ष आवास का लक्ष्य भी घटाकर 7,400 कर दिया है। जबकि, बीते वर्ष 10,259 आवास देने का लक्ष्य था। शासन के मानक कड़ा करने से विभाग ने प्रतीक्षा सूची में शामिल लाभार्थियों को नए सिरे से चयन करने की रणनीति बनाई है। खंड विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारियों से वास्तविक पात्रों का ही चयन करने को कहा है। अपात्रों का चयन करने पर कार्रवाई के लिए चेताया भी गया है।
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छप्पर से अधिक टीनशेड के हैं घर
ग्रामीण इलाकों में अब छप्परनुमा घर कम टीनशेड के अधिक घर दिखाई पड़ते हैं। इसकी वजह यह है कि टीन आसानी से बाजार में उपलब्ध हो जाता है और टिकाऊ भी होता है। जबकि छप्पर उठाने और तैयार करने में गांव के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
लाभार्थियों के चयन में बरतनी होगी सावधानी
इंदिरा आवास के लाभार्थियों का चयन करने के लिए इस वर्ष सावधानी बरतनी पड़ेगी। अपात्रों को योजना का लाभ पाने से रोकने के लिए निचले स्तर पर छानबीन करनी होगी। फिलहाल, विभागीय अधिकारियों की परेशानी अब यह बढ़ गई है, कि वह एक बार घर-घर जाकर लाभार्थी का चयन करें।
महंगाई बढ़ी, फिर भी नहीं बढ़ी लागत
गिट्टी, मोरंग, बालू और सीमेंट के दामों में इजाफा होने के बाद भी प्रधानमंत्री आवास निर्माण के लिए लागत राशि नहीं बढ़ी। ऐसे लाभार्थियों को यह चिंता सता रही है, कि 1.20 लाख रुपये में आवास का निर्माण कैसे होगा।
प्रधानमंत्री आवास में अब उन लोगों को आवास नहीं मिलेगा, जो प्रतीक्षा सूची में हैं। घर-घर सत्यापन अभियान चलेगा, जो वास्तव में पात्र होगा, उसे योजना का लाभ मिलेगा। फिलहाल ,सरकार कच्ची दीवार और कच्ची छत वालों को ही आवास देने की तैयारी कर रही है।
दयाराम यादव, परियोजना अधिकारी।