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वनकर्मियों-पुलिस की लापरवाही से मारा गया तेंदुआ
Updated Sat, 23 Dec 2017 08:05 PM IST
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कुंडा/बिहार। बाघराय थाना क्षेत्र के बूढ़ेपुर गांव में तेंदुआ वनकर्मियों और पुलिसवालों की लापरवाही से मारा गया। भीड़ ने तेंदुए को पहले खूब दौड़ाया, ईंट-पत्थरों से मारा, कुत्तों से नोंचवाया, लाठियों से पीटा और फिर कुएं में फंसने पर जिंदा फूंक दिया। पूरे समय पुलिस और वन विभाग तमाशबीन की भूमिका में रहा। भीड़ के उग्र रवैये के बावजूद न तो अतिरिक्त फोर्स बुलाई गई और न ही वन विभाग ने इस मामले में कोई पहल करने का प्रयास किया।
बाघराय के बूढ़ेपुर में तेंदुआ निकलने की सूचना पर पुलिस और वन विभाग के लोग समय से पहुंच गए थे। बावजूद इसके भारी भीड़ देख वह आगे नहीं बढ़ पाए। पुलिस ने कुछ प्रयास भी किया तो भीड़ ने ध्यान नहीं दिया। एक-दो बार भीड़ को हटाने का प्रयास हुआ भी तो लोग दूसरी तरफ से घूमकर पहुंच जाते थे। इस दौरान ग्रामीणों ने तेंदुए को खूब खदेड़ा। कुछ कुत्ते भी तेंदुए के पीछे लगे थे। तेंदुए ने कुत्तों पर हमला बोलने का प्रयास किया तो ग्रामीण उस पर हमला बोल देते। उसके झाड़ियों में छिपने पर ईंट-पत्थर फेंके जाते रहे।
खदेड़े जाने के दौरान वह काफी थक गया था। थकान के कारण ही वह गांव के बगल बोरिंग के लिए खोदे गए कुएं में उतरकर वह छिप गया। इसी दौरान मौका पाकर लोगों ने उसमें पुआल डाला और आग लगा दी। इसके बाद उसमें लकड़ियां भी डाली गईं। ग्रामीणों के हटने पर वन विभाग ने पानी डालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। अगर समय रहते वनकर्मियों और पुलिस ने जरूरी कदम उठाए और अफसरों को जानकारी दी होती तो तेंदुए को बचाया जा सकता था। बेकाबू हुई भीड़ ने जब तेंदुए को जलाने का प्रयास शुरू किया तभी वन विभाग के लोगों ने अपने ही संबंधित बीट प्रभारी को डराना शुरू कर दिया। उसे कहा जा रहा था कि अब उसे सस्पेंड होने से कोई नहीं रोक सकता। इस पर वह अपने साथियों से ही लड़ने लगा। उधर रेेंजर ने फोर्स बढ़ाने की बात भी कही, लेकिन दोनों विभाग एक दूसरे पर तोहमत लगाने लगे।
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बाघराय के बूढ़ेपुर में तेंदुआ निकलने की सूचना पर पुलिस और वन विभाग के लोग समय से पहुंच गए थे। बावजूद इसके भारी भीड़ देख वह आगे नहीं बढ़ पाए। पुलिस ने कुछ प्रयास भी किया तो भीड़ ने ध्यान नहीं दिया। एक-दो बार भीड़ को हटाने का प्रयास हुआ भी तो लोग दूसरी तरफ से घूमकर पहुंच जाते थे। इस दौरान ग्रामीणों ने तेंदुए को खूब खदेड़ा। कुछ कुत्ते भी तेंदुए के पीछे लगे थे। तेंदुए ने कुत्तों पर हमला बोलने का प्रयास किया तो ग्रामीण उस पर हमला बोल देते। उसके झाड़ियों में छिपने पर ईंट-पत्थर फेंके जाते रहे।
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खदेड़े जाने के दौरान वह काफी थक गया था। थकान के कारण ही वह गांव के बगल बोरिंग के लिए खोदे गए कुएं में उतरकर वह छिप गया। इसी दौरान मौका पाकर लोगों ने उसमें पुआल डाला और आग लगा दी। इसके बाद उसमें लकड़ियां भी डाली गईं। ग्रामीणों के हटने पर वन विभाग ने पानी डालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। अगर समय रहते वनकर्मियों और पुलिस ने जरूरी कदम उठाए और अफसरों को जानकारी दी होती तो तेंदुए को बचाया जा सकता था। बेकाबू हुई भीड़ ने जब तेंदुए को जलाने का प्रयास शुरू किया तभी वन विभाग के लोगों ने अपने ही संबंधित बीट प्रभारी को डराना शुरू कर दिया। उसे कहा जा रहा था कि अब उसे सस्पेंड होने से कोई नहीं रोक सकता। इस पर वह अपने साथियों से ही लड़ने लगा। उधर रेेंजर ने फोर्स बढ़ाने की बात भी कही, लेकिन दोनों विभाग एक दूसरे पर तोहमत लगाने लगे।
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