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एसएनसीयू में भर्ती नवजात की मौत, बेरहम बनी मां 19-49-46
Updated Wed, 05 Jul 2017 12:52 AM IST
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प्रतापगढ़। दो दिन पहले जिला महिला अस्पताल में जन्मे एक नवजात की सोमवार की देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई। चिकित्सक उसके परिजनों की खोज करने लगे तो वे अस्पताल में नहीं दिखाई पड़े। फोन पर बेटे की मौत की सूचना देने के बाद नौ माह तक गर्भ में पालने वाली बेरहम मां और उसके परिवार के सदस्य भी बच्चे की मौत की खबर मिलने के बाद अस्पताल नहीं पहुंचे।
लालगंज कोतवाली के इदिलपुर निवासी जमील की पत्नी रूखसाना ने दो दिन पहले जिला महिला अस्पताल में एक बेटे को जन्म दिया था। कम दिन व वजन कम होने के कारण नवजात को चिकित्सकों ने एसएनसीयू वार्ड में भर्ती करवा दिया। परिजन एसएनसीयू वार्ड में भर्ती करवाने के बाद अपना नाम पता और मोबाइल नम्बर दर्ज करवाने के बाद धीरे से अस्वस्थ बेटे को छोड़कर पूरे परिवार के साथ भाग गए। सोमवार की देर रात नवजात ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। चिकित्सक उसके परिजनों से फोन पर संपर्क साधा।
फोन पर नवजात के मौत की जानकारी चिकित्सकों ने उसके परिजनों को भी दी। मगर बच्चे को पेट में पालने वाली बेरहम मां के अलावा परिवार के लोग मासूम बच्चे का शव लेने अस्पताल नहीं आए। जिला महिला अस्पताल के सीएमएस संतोष त्रिपाठी ने इसकी जानकारी कोतवाली पुलिस को दी और स्टाफ नर्स के हाथ नवजात के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं जिला महिला अस्पताल की स्टाफ नर्स नवजात के शव के को लेकर जिला अस्पताल के इमरजेंसी में पहुंचीं। यहां मर्चरी की चॉभी ही गायब हो गई थी।
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वह दो घंटे तक शव को लेकर इधर-उधर भटकती रही। मगर जिला अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मचारी मर्चरी में शव को नहीं रखवा रहे थे। इसकी शिकायत सीएमएस से की गई। सीएमएस की फटकार के बाद करीब दो घंटे बाद शव को मर्चरी में रखवाया गया। यह भी बताया गया कि जिला अस्पताल के इमरजेंसी में तैनात स्वीपर मंगलवार को ड्यूटी पर नहीं आया।
एसएनसीयू में भर्ती नवजात की मौत, बेरहम बनी मां
शव लेने अस्पताल नहीं आए परिजन
दो दिन पहले जिला महिला अस्पताल में नवजात का हुआ था जन्म
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लालगंज कोतवाली के इदिलपुर निवासी जमील की पत्नी रूखसाना ने दो दिन पहले जिला महिला अस्पताल में एक बेटे को जन्म दिया था। कम दिन व वजन कम होने के कारण नवजात को चिकित्सकों ने एसएनसीयू वार्ड में भर्ती करवा दिया। परिजन एसएनसीयू वार्ड में भर्ती करवाने के बाद अपना नाम पता और मोबाइल नम्बर दर्ज करवाने के बाद धीरे से अस्वस्थ बेटे को छोड़कर पूरे परिवार के साथ भाग गए। सोमवार की देर रात नवजात ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। चिकित्सक उसके परिजनों से फोन पर संपर्क साधा।
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फोन पर नवजात के मौत की जानकारी चिकित्सकों ने उसके परिजनों को भी दी। मगर बच्चे को पेट में पालने वाली बेरहम मां के अलावा परिवार के लोग मासूम बच्चे का शव लेने अस्पताल नहीं आए। जिला महिला अस्पताल के सीएमएस संतोष त्रिपाठी ने इसकी जानकारी कोतवाली पुलिस को दी और स्टाफ नर्स के हाथ नवजात के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं जिला महिला अस्पताल की स्टाफ नर्स नवजात के शव के को लेकर जिला अस्पताल के इमरजेंसी में पहुंचीं। यहां मर्चरी की चॉभी ही गायब हो गई थी।
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वह दो घंटे तक शव को लेकर इधर-उधर भटकती रही। मगर जिला अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मचारी मर्चरी में शव को नहीं रखवा रहे थे। इसकी शिकायत सीएमएस से की गई। सीएमएस की फटकार के बाद करीब दो घंटे बाद शव को मर्चरी में रखवाया गया। यह भी बताया गया कि जिला अस्पताल के इमरजेंसी में तैनात स्वीपर मंगलवार को ड्यूटी पर नहीं आया।
एसएनसीयू में भर्ती नवजात की मौत, बेरहम बनी मां
शव लेने अस्पताल नहीं आए परिजन
दो दिन पहले जिला महिला अस्पताल में नवजात का हुआ था जन्म