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न ट्रैकुलाइजर गन, न पिजड़ा, डंडा लेकर तेंदुआ तलाश रहा वन विभाग

Mon, 11 Feb 2019 11:28 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 11 Feb 2019 11:28 PM IST
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न ट्रैकुलाइजर गन, न पिजड़ा, डंडा लेकर तेंदुआ तलाश रहा वन विभाग
प्रतापगढ़। विंध्य की पहाड़ियों से भटककर आए तेंदुओं से जिले के लोगों में खौफ कायम है। मगर, तेंदुओं को पकड़ने में वन विभाग की टीम कांबिग के नाम पर महज खानापूर्ति कर रही है। वन विभाग के टीम के पास तेंदुओं को पकड़ने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। लाठी व जाल के सहारे ही जोर आजमाइश की जा रही है। न तो ट्रैकुलाइजर गन है और न ही पिंजड़ा। ऐसे में तेंदुए से सामना होने पर उसे काबू में करना आसान नहीं होगा।
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जिले में एक बार फिर से तेंदुओं ने दस्तक दे दी है। पिछले साल कुंडा व बाघराय मेें तेंदुए का खौफ था। इस बार उनकी आहट पट्टी तक मानी जा रही है। अभी दो दिन पहले मांधाता के कुशफरा देवीदास का पुरवा में जंगल में शिकारियों के जाल में फंसे तेदुओं को लोगों मेें पीट-पीटकर मार डाला था। अभी भी जिले के कुंडा से पट्टी तक पड़ने वाले जंगलों में तेंदुए के होने की आशंका जाहिर की जा रही है। जिसे लेकर वन विभाग की टीम अलर्ट हो चुकी है। जिले के सातों रेंज से मिलाकर कुल 21 कर्मचारियों की टीम तेंदुए को पकड़ने के लिए तैयार की गई है। मगर, टीम के पास माकूल उपकरण नहीं हैं। तेंदुए के पंजे की ताकत व मजबूत जबड़े को काबू में करने के लिए के लिए विभाग के पास महज लाठी व जाल है। इसी के सहारे कांबिंग की जा रही है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो लाठी, डंडे व जाल के सहारे तेंदुए को पकड़ना आसान नहीं है। तेंदुए से सामना होने पर टीम के कर्मचारियों को खुद को बचाना भारी पड़ेगा। सूत्रों की मानें तो तेंदुए को सुरक्षित पकडने के लिए ट्रैकुलाइजर गन व पिंजड़े की जरूरत होती है। दरअसल ट्रैकुलाइजर गन से तेंदुआ अचेत हो जाता है। इस दौरान उसे पिंजड़े मेें कैद करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। इसके अलावा तेंदुए को पकड़ने के लिए स्पेशल पिंजड़ा आता है। उसमें कुत्ते व मुर्गे का मांस रख दिया जाता है। तेंदुआ जैसे ही पिंजड़े में रखे मांस को देखकर घुसता है, गेट खुद ब खुद बंद हो जाता है। इससे सहजता से उसे पकड़ा जा सकता है। मगर जिले के वन विभाग की टीम के पास ये दोनों मुख्य उपकरण नहीं हैं। लगातार तीन दिनों से वन विभाग की टीम कांबिग कर रही है, मगर तेदुए को पकडने के लिए अब तक इन उपकरणों के लिए कोई इंतजाम नहीं हो सका है। इस बारे में डीएफओ बीरआर अहिरवार से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन नहीं उठा।
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बाघराय में बड़ी मशक्कत के बाद काबू में आया था तेंदुआ
सालभर पहले बाघराय में तेंदुए ने दस्तक दी थी। बीच गांव में वन विभाग की टीम से तेंदुए का सामना हुआ था। उसने कई लोगों को जख्मी कर दिया था। बाद में लखनऊ से आई टीम ने उसे ट्रैकुलाइजर गन के सहारे तेदुए को काबू में किया था। धरपकड़ के दौरान तेंदुआ घायल हो गया था।
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गांव में दशहत, घर-घर जल रहे अलाव
विश्वनाथगंज। क्षेत्र के कु शफरा देवीदास का पुरवा जंगल में तेंदुओं के होने की सूचना से दहशत है। वन विभाग की टीम जंगल मेें तेंदुए व चीते के होने की आशंका जता रही है। जिससे गांव के लोग सहमे हुए हैं। गांव में रतजगा चल रहा है। घर-घर अलाव जलाए जा रहे हैं। लोग चीता व तेंदुए की आशंका से सो नहीं पा रहे हैं। दिनभर काम के बाद रात में जगहट से लोग परेशान हैं।
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