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दीवार के मलबे में दबकर छात्र की मौत
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sat, 03 Jan 2015 10:42 PM IST
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लालगंज कोतवाली के पूरे आचार्य तेजगढ़ ननिहाल गए बालक की छप्पर की दीवार के मलबे में दबकर मौत हो गई जबकि एक बालिका गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे जिला अस्पताल लाया गया। कोतवाली के सरैया गांव निवासी मोहम्मद बशीर किसानी कर परिवार का गुजर बसर करता है। उसका बेटा समीर (12) लीलापुर स्थित एक स्कूल में कक्षा छह का छात्र था। स्कूल में अवकाश के चलते वह अपने मामा सैलुद्दीन निवासी पूरे आचार्य तेजगढ़ तीन दिन पहले गया था। तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश के चलते सैलुद्दीन के परिजनों ने शनिवार को मकान के बाहर छप्पर में अलाव जला रखा था।
सुबह समीर और उसके मामा की लड़की साफिया (7) पुत्री गुलफाम वहीं बैठी थी। अचानक छप्पर की दीवार भरभराकर गिरने लगी। बच्चों ने भागने की कोशिश की लेकिन समीर बीच में फंस गया जबकि साफिया बाहर दब गई। शोर सुनकर परिजनों ने साफिया को बाहर निकाला और समीर को निकालने के लिए छप्पर और मलबा हटाने लगे। ग्रामीण मलबे से निकाल समीर को बाजार स्थित एक अस्पताल ले गए वहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही परिजन रोने बिलखने लगे। घटना की खबर बशीर को हुई तो वह बेहोश होकर गिर पड़ा। इधर घायल साफिया को जिला अस्पताल लाया गया। जहां उसका इलाज चल रहा है। लालगंज कोतवाली के सरैया गांव निवासी बशीर के इकलौते पुत्र का शव शनिवार की दोपहर घर पहुंचा तो गांव के सैकड़ों लोग पहुंच गए। मासूम बालक की दर्दनाक मौत देख हर किसी की आंख से आंसू निकल रहे थे। मृतक अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी बहन भाई के शव से लिपटकर रोती रही।
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सुबह समीर और उसके मामा की लड़की साफिया (7) पुत्री गुलफाम वहीं बैठी थी। अचानक छप्पर की दीवार भरभराकर गिरने लगी। बच्चों ने भागने की कोशिश की लेकिन समीर बीच में फंस गया जबकि साफिया बाहर दब गई। शोर सुनकर परिजनों ने साफिया को बाहर निकाला और समीर को निकालने के लिए छप्पर और मलबा हटाने लगे। ग्रामीण मलबे से निकाल समीर को बाजार स्थित एक अस्पताल ले गए वहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही परिजन रोने बिलखने लगे। घटना की खबर बशीर को हुई तो वह बेहोश होकर गिर पड़ा। इधर घायल साफिया को जिला अस्पताल लाया गया। जहां उसका इलाज चल रहा है। लालगंज कोतवाली के सरैया गांव निवासी बशीर के इकलौते पुत्र का शव शनिवार की दोपहर घर पहुंचा तो गांव के सैकड़ों लोग पहुंच गए। मासूम बालक की दर्दनाक मौत देख हर किसी की आंख से आंसू निकल रहे थे। मृतक अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी बहन भाई के शव से लिपटकर रोती रही।
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