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दलदल बनीं गोशालाएं, मर रहे मवेशी
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कोहडौर के पड़रीपाल गोशाला मेें पड़े मवेशी।
- फोटो : PRATAPGARH
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पांच दिनों की बारिश भी बनी मवेशियों के लिए काल
कहीं गौशाला में दल-दल तो कहीं भरा है पानी
प्रतापगढ़। जिले में अवारा मवेशियों को रखने के लिए बनीं गोशालाएं बारिश में दलदल बन गई हैं। मवेशी कीचड़ और पानी में फंसे हुए हैं। उनके सामने चारा-पानी का संकट खड़ा हो गया है। अफसर भले ही सबकुछ ठीक होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन हालात बेहद खराब हैं। छह दिनों की बारिश में ही अलग-अलग केंद्रों पर 57 से अधिक मवेशियों की मौत हो गई। मौजूदा समय में भी गौशालाओं की हालत बद से बदतर हैं। बारिश के जलभराव से देवसरा के अतरौरा में गौशाला ही बंद कर दी गई। खाने के अलावा मवेशियों के नियमित उपचार का भी प्रबंध गौशालाओं पर नहीं है। जिसके चलते बीमार पड़ने वाले जानवर इलाज के अभाव में दम तोड़ दे रहे हैं। अमर उजाला की टीम ने जिले की गौशालाओं का जायजा लिया। पेश है एक रिपोर्ट---
जलभराव के बाद अतरौरा की बंद कर दी गई गौशाला
पट्टी तहसील के अतरौरा में अवारा मवेशियों को रखने के लिए गौशाला बनाई गई है। कुछ दिनों पहले लगातार पांच दिनों तक हुई बरसात से गौशाला में पानी भर गया। जिसके बाद मवेशी दम तोड़ने लगे। करीब 7 मवेशी मर गए। ग्रामीणों की शिकायत के बाद बीडीओ देवसरा ने मौके का निरीक्षण करने के बाद मवेशियों को दूसरे गौशाला भेज दिया गया।
मेंहदिया गौशाला के कीचड़ में दम तोड़ रहे मवेशी
पट्टी तहसील के मेंहदिया गांव में गौशाला का निर्माण कराया गया है। गौशाला में कुल 106 मवेशी मिले। पांच दिन की बरसात में कीचड़ से सराबोर गौशाला में करीब 22 मवेशी की अलग-अलग दिनों में मौत हो चुकी है। गुरुवार की रात भी तीन गौवंश मर गए। दो गौवंशों की हालत खराब थी। ग्रामीण सूर्य प्रकाश पांडेय की मानें तो मृत मवेशियों को तालाब में फेंक दिया जाता है। जिससे दुर्गंध उठती है। यदि मृत जानवरों को दफनाया नहीं जाता है तो बीमारी फैल सकती है। इस गौशाला में 12 सफाईकर्मी तैनात हैं। सफाईकर्मी राजभवन भी मृत जानवरों के बारे में नहीं बता सका। मवेशियों के लिए चारा नहीं है। दवा का भी समय पर इंतजाम नहीं हो पाता।
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पंडरीपाल में थम नहीं रहा गौवंशों के मरने का सिलसिला
कोहड़ौर। मंगरौरा विकासखंड के पंडरीपाल में अवारा मवेशियों को रखा गया है। ग्रामीणों की मानें तो बरसात के दौरान पांच दिनों में करीब 12 से लेकर 15 मवेशियों की मौत हो चुकी है। भले ही पशुपालन विभाग की टीम गौशाला पर निगाह रखे हुए हैं लेकिन मवेशियों के मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां मवेशियों की संख्या भी कोई नहीं बता सका। ग्रामीणों की मानें तो सफाई व्यवस्था नहीं रहती। मवेशियों को बहुत कम चारा मिलता है।
चंदीगोविंदपुर में पांच दिन में 14 जानवरों की मौत
रानीगंज तहसील के चंदीगोविंदपुर में गौशाला बनी है। जिसमे मवेशियों को रखा गया है। उनके चारे के लिए कोई इंतजाम नहीं है। पांच दिनों के भीतर 14 गौवंश की मौत हो चुकी है। मरने वालों में गाय भी शामिल हैं। भूसा कई दिनों से समाप्त हो चुका है। चौकीदार भी रखवाली करने के लिए नहीं मिला। पशुपालन विभाग की ओर से टीम भेजी जाती है। इसके बाद भी मवेशी दम तोड़ रहे हैं।
चंद्रभानपुर में भी गौशाला का हाल बेहाल
मंगरौरा विकासखंड के चंद्रभानपुर में खुले गौशाला में मवेशियों को रखा गया है। बरसात के दौरान 4 मवेशी मर चुके हैं। हालांकि इसके बाद व्यवस्था में सुधार लाया गया। ग्रामीणों की मानें तो गौशाला से मवेशी बाहर निकल जाते हैं और किसानों की फसलों का नुकसान करते हैं। चारे का प्रबंध नहीं है। कीचड़ वाली गौशाला में मवेशी बीमार पड़ रहे हैं।
नागपुर गौशाला में भी दम तोड़ रहे मवेशी
जेठवारा थाना क्षेत्र के नागापुर में खुली गौशाला में करीब 40 के आसपास मवेशी रखे गए हैं। उनके चारे पानी का समुचित प्रबंध न के बराबर है। कभी उन्हें चारा मिलता है तो कभी वे भूखे ही रहते हैं। बरसात के दिनों में चारा व बीमारी के अभाव में करीब 10 मवेशी दम तोड़ दिए। जिन्हे जिम्मेदारों ने जेसीबी लगवाकर रातोंरात फेंकवा दिया। लोगों का कहना है कि मवेशियों के मरने के बाद अवारा पशुओं को लाकर गौशाला में संख्या पूरी कर दी जाती है।
लगातार बरसात के दौरान गौशालाओं में पशुओं की मौतें हुईं हैं। मृत मवेशियों की जानकारी के लिए टीमें लगाई गई हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद ही वह मृत जानवरों की सही जानकारी दे सकेंगे।
-वाईपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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कहीं गौशाला में दल-दल तो कहीं भरा है पानी
प्रतापगढ़। जिले में अवारा मवेशियों को रखने के लिए बनीं गोशालाएं बारिश में दलदल बन गई हैं। मवेशी कीचड़ और पानी में फंसे हुए हैं। उनके सामने चारा-पानी का संकट खड़ा हो गया है। अफसर भले ही सबकुछ ठीक होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन हालात बेहद खराब हैं। छह दिनों की बारिश में ही अलग-अलग केंद्रों पर 57 से अधिक मवेशियों की मौत हो गई। मौजूदा समय में भी गौशालाओं की हालत बद से बदतर हैं। बारिश के जलभराव से देवसरा के अतरौरा में गौशाला ही बंद कर दी गई। खाने के अलावा मवेशियों के नियमित उपचार का भी प्रबंध गौशालाओं पर नहीं है। जिसके चलते बीमार पड़ने वाले जानवर इलाज के अभाव में दम तोड़ दे रहे हैं। अमर उजाला की टीम ने जिले की गौशालाओं का जायजा लिया। पेश है एक रिपोर्ट---
जलभराव के बाद अतरौरा की बंद कर दी गई गौशाला
पट्टी तहसील के अतरौरा में अवारा मवेशियों को रखने के लिए गौशाला बनाई गई है। कुछ दिनों पहले लगातार पांच दिनों तक हुई बरसात से गौशाला में पानी भर गया। जिसके बाद मवेशी दम तोड़ने लगे। करीब 7 मवेशी मर गए। ग्रामीणों की शिकायत के बाद बीडीओ देवसरा ने मौके का निरीक्षण करने के बाद मवेशियों को दूसरे गौशाला भेज दिया गया।
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मेंहदिया गौशाला के कीचड़ में दम तोड़ रहे मवेशी
पट्टी तहसील के मेंहदिया गांव में गौशाला का निर्माण कराया गया है। गौशाला में कुल 106 मवेशी मिले। पांच दिन की बरसात में कीचड़ से सराबोर गौशाला में करीब 22 मवेशी की अलग-अलग दिनों में मौत हो चुकी है। गुरुवार की रात भी तीन गौवंश मर गए। दो गौवंशों की हालत खराब थी। ग्रामीण सूर्य प्रकाश पांडेय की मानें तो मृत मवेशियों को तालाब में फेंक दिया जाता है। जिससे दुर्गंध उठती है। यदि मृत जानवरों को दफनाया नहीं जाता है तो बीमारी फैल सकती है। इस गौशाला में 12 सफाईकर्मी तैनात हैं। सफाईकर्मी राजभवन भी मृत जानवरों के बारे में नहीं बता सका। मवेशियों के लिए चारा नहीं है। दवा का भी समय पर इंतजाम नहीं हो पाता।
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पंडरीपाल में थम नहीं रहा गौवंशों के मरने का सिलसिला
कोहड़ौर। मंगरौरा विकासखंड के पंडरीपाल में अवारा मवेशियों को रखा गया है। ग्रामीणों की मानें तो बरसात के दौरान पांच दिनों में करीब 12 से लेकर 15 मवेशियों की मौत हो चुकी है। भले ही पशुपालन विभाग की टीम गौशाला पर निगाह रखे हुए हैं लेकिन मवेशियों के मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां मवेशियों की संख्या भी कोई नहीं बता सका। ग्रामीणों की मानें तो सफाई व्यवस्था नहीं रहती। मवेशियों को बहुत कम चारा मिलता है।
चंदीगोविंदपुर में पांच दिन में 14 जानवरों की मौत
रानीगंज तहसील के चंदीगोविंदपुर में गौशाला बनी है। जिसमे मवेशियों को रखा गया है। उनके चारे के लिए कोई इंतजाम नहीं है। पांच दिनों के भीतर 14 गौवंश की मौत हो चुकी है। मरने वालों में गाय भी शामिल हैं। भूसा कई दिनों से समाप्त हो चुका है। चौकीदार भी रखवाली करने के लिए नहीं मिला। पशुपालन विभाग की ओर से टीम भेजी जाती है। इसके बाद भी मवेशी दम तोड़ रहे हैं।
चंद्रभानपुर में भी गौशाला का हाल बेहाल
मंगरौरा विकासखंड के चंद्रभानपुर में खुले गौशाला में मवेशियों को रखा गया है। बरसात के दौरान 4 मवेशी मर चुके हैं। हालांकि इसके बाद व्यवस्था में सुधार लाया गया। ग्रामीणों की मानें तो गौशाला से मवेशी बाहर निकल जाते हैं और किसानों की फसलों का नुकसान करते हैं। चारे का प्रबंध नहीं है। कीचड़ वाली गौशाला में मवेशी बीमार पड़ रहे हैं।
नागपुर गौशाला में भी दम तोड़ रहे मवेशी
जेठवारा थाना क्षेत्र के नागापुर में खुली गौशाला में करीब 40 के आसपास मवेशी रखे गए हैं। उनके चारे पानी का समुचित प्रबंध न के बराबर है। कभी उन्हें चारा मिलता है तो कभी वे भूखे ही रहते हैं। बरसात के दिनों में चारा व बीमारी के अभाव में करीब 10 मवेशी दम तोड़ दिए। जिन्हे जिम्मेदारों ने जेसीबी लगवाकर रातोंरात फेंकवा दिया। लोगों का कहना है कि मवेशियों के मरने के बाद अवारा पशुओं को लाकर गौशाला में संख्या पूरी कर दी जाती है।
लगातार बरसात के दौरान गौशालाओं में पशुओं की मौतें हुईं हैं। मृत मवेशियों की जानकारी के लिए टीमें लगाई गई हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद ही वह मृत जानवरों की सही जानकारी दे सकेंगे।
-वाईपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी