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राशनकार्ड के सत्यापन को लेकर गांवों में हो रहा हंगामा
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 15 Jan 2017 12:32 AM IST
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राशनकार्ड के सत्यापन को लेकर तहसील क्षेत्र के अधिकांश गांव में हलचल मची है। एक गांव के व्यक्ति का नाम दूसरे गांव में शामिल होने तथा व कई स्थानों पर लोगों के नाम सूची से छूट जाने से इसको लेकर हायतौबा मची हुई है। शिकायतकर्ताओं की भीड़ खाद्य विभाग से लेकर तहसील प्रशासन के चक्कर काट रही है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत सत्तर प्रतिशत ग्रामीण इलाको में तथा चौसठ प्रतिशत शहरी इलाकों में राशनकार्ड बनाये जाने की योजना है। जिसके तहत आन लाइन आवेदन मांगे गए, विगत कई माह से सायवर कैफे से लेकर आन लाइन आवेदन किया जाता रहा। इस योजना का खाद्यान्न पंजीकृत हुए लोगों को पावती के आधार पर खाद्यान्न भी तीन माह से वितरण भी कोटेदारों द्वारा किया गया है। अधिकांश गांव में जितने परिवार से उसे अधिक आवेदन आ चुके है जिस कारण व्यवस्था में खामी नजर आने लगी लिहाजा शासन के निर्देश पर अब गांव में बैठक के जरिए इसका सत्यापन शुरू हो गया। गांव में विरोध के स्वर उठने लगे सत्यापन के लिए ब्लाक कर्मी, रसद विभाग के कर्मचारी समेत गांव में प्रधान समेत बैठक बुलाई जाने लगी। बैठक के जरिए सत्यापन हो रहा है। छूटे हुए नाम तथा दूसरे गांव में जुड़े लोग विरोध जता रहे है। इस सूची में जिनके नाम छूट गए है अथवा दूसरे गांव में शािमल हो गए है वह इसे सुधरवाने के लिए तहसील प्रशासन समेत पूर्ति विभाग के कार्यालय के चक्कर काट रहे है। पूर्ति निरीक्षक संतोष ने बताया कि नवंबर से ही बेबसाइट विभाग ने बंद कर दी है। इसे 15 जून के बाद खुलेगी जो लोग विभाग की वेबसाइट पर आवेदन करेंगे, वही इसका लाभ पाएंगे।
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत सत्तर प्रतिशत ग्रामीण इलाको में तथा चौसठ प्रतिशत शहरी इलाकों में राशनकार्ड बनाये जाने की योजना है। जिसके तहत आन लाइन आवेदन मांगे गए, विगत कई माह से सायवर कैफे से लेकर आन लाइन आवेदन किया जाता रहा। इस योजना का खाद्यान्न पंजीकृत हुए लोगों को पावती के आधार पर खाद्यान्न भी तीन माह से वितरण भी कोटेदारों द्वारा किया गया है। अधिकांश गांव में जितने परिवार से उसे अधिक आवेदन आ चुके है जिस कारण व्यवस्था में खामी नजर आने लगी लिहाजा शासन के निर्देश पर अब गांव में बैठक के जरिए इसका सत्यापन शुरू हो गया। गांव में विरोध के स्वर उठने लगे सत्यापन के लिए ब्लाक कर्मी, रसद विभाग के कर्मचारी समेत गांव में प्रधान समेत बैठक बुलाई जाने लगी। बैठक के जरिए सत्यापन हो रहा है। छूटे हुए नाम तथा दूसरे गांव में जुड़े लोग विरोध जता रहे है। इस सूची में जिनके नाम छूट गए है अथवा दूसरे गांव में शािमल हो गए है वह इसे सुधरवाने के लिए तहसील प्रशासन समेत पूर्ति विभाग के कार्यालय के चक्कर काट रहे है। पूर्ति निरीक्षक संतोष ने बताया कि नवंबर से ही बेबसाइट विभाग ने बंद कर दी है। इसे 15 जून के बाद खुलेगी जो लोग विभाग की वेबसाइट पर आवेदन करेंगे, वही इसका लाभ पाएंगे।
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