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कम ओपीडी करने वाले 65 डॉक्टरों का वेतन रोका
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प्रतापगढ़। जिले में मरीजों के प्रति लापरवाह बने 65 डॉक्टरों का सीएमओ ने वेतन रोक दिया है। सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सीएमओ सभी को जवाब देने के लिए अपने चैंबर में बुला रहे हैं। अपने सामने स्पष्टीकरण लिखवा रहे हैं। इसके बाद ही वेतन जारी करने की अनुमति दे रहे हैं।
जिले के 65 डॉक्टरों पर सीएमओ ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए जून माह का वेतन रोक दिया। सीएमओ का दावा है कि इन 65 डॉक्टरों ने मरीजों के प्रति लापरवाही दिखाई है। ओपीडी में बैठकर मरीजों का इलाज नहीं करना चाहते हैं। जिसकी वजह से मरीज परेशान होते हैं। शासन ने प्रतिदिन कम से कम 30 मरीजों की ओपीडी करने के लिए नियमित डॉक्टरों को आदेश दिया है। ओपीडी से ही उपस्थिति दर्ज की जाती है, मगर सीएचसी और पीएचसी में तैनात 65 डॉक्टरों ने जून माह में प्रतिदिन सिर्फ दस से 15 मरीज ही देखे हैं। सभी का वेतन रोककर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि जून माह में ओपीडी का संचालन शुरू हुआ। लोग कोरोना के डर की वजह से अस्पताल नहीं आ रहे थे। ऐसे में मरीजों का कहां से इलाज किया जाए। सीएमओ डॉक्टरों को परेशान कर रहे हैं। ई-मेल से भेजे गए जवाब को स्वीकार नहीं करते हैं। इसके लिए उन्हें सीएमओ ऑफिस में बुलाया जाता है। इससे डॉक्टरों में नाराजगी है।
खुद ओपीडी नहीं करते सीएमओ
शासन ने प्रशासनिक कार्य में लगे सीएमओ, एसीएमओ को भी ओपीडी में बैठकर मरीजों का इलाज करने के लिए आदेश दिया है, मगर वह कभी ओपीडी में नहीं बैठते हैं।
कम ओपीडी से यह साबित होता है कि डॉक्टर अस्पताल में समय नहीं दे रहे हैं। यदि अस्पताल में बैठते तो मरीज उनके पास इलाज कराने के लिए जरूर आते। -डॉ. सीपी शर्मा, एसीएमओ
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जिले के 65 डॉक्टरों पर सीएमओ ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए जून माह का वेतन रोक दिया। सीएमओ का दावा है कि इन 65 डॉक्टरों ने मरीजों के प्रति लापरवाही दिखाई है। ओपीडी में बैठकर मरीजों का इलाज नहीं करना चाहते हैं। जिसकी वजह से मरीज परेशान होते हैं। शासन ने प्रतिदिन कम से कम 30 मरीजों की ओपीडी करने के लिए नियमित डॉक्टरों को आदेश दिया है। ओपीडी से ही उपस्थिति दर्ज की जाती है, मगर सीएचसी और पीएचसी में तैनात 65 डॉक्टरों ने जून माह में प्रतिदिन सिर्फ दस से 15 मरीज ही देखे हैं। सभी का वेतन रोककर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि जून माह में ओपीडी का संचालन शुरू हुआ। लोग कोरोना के डर की वजह से अस्पताल नहीं आ रहे थे। ऐसे में मरीजों का कहां से इलाज किया जाए। सीएमओ डॉक्टरों को परेशान कर रहे हैं। ई-मेल से भेजे गए जवाब को स्वीकार नहीं करते हैं। इसके लिए उन्हें सीएमओ ऑफिस में बुलाया जाता है। इससे डॉक्टरों में नाराजगी है।
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खुद ओपीडी नहीं करते सीएमओ
शासन ने प्रशासनिक कार्य में लगे सीएमओ, एसीएमओ को भी ओपीडी में बैठकर मरीजों का इलाज करने के लिए आदेश दिया है, मगर वह कभी ओपीडी में नहीं बैठते हैं।
कम ओपीडी से यह साबित होता है कि डॉक्टर अस्पताल में समय नहीं दे रहे हैं। यदि अस्पताल में बैठते तो मरीज उनके पास इलाज कराने के लिए जरूर आते। -डॉ. सीपी शर्मा, एसीएमओ
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