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Pratapgarh News: एक रुपये के पर्चे पर मुफ्त इलाज का दावा, दवा खरीदने में मरीजों का छूट रहा पसीना

Mon, 01 May 2023 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़ Updated Mon, 01 May 2023 11:54 PM IST
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Claim of free treatment on prescription of one rupee, patients are sweating in buying medicines
मेडिकल कॉलेज प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान, मरीज हो रहे परेशान
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प्रतापगढ़। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक सरकारी मंशा को दरकिनार कर मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैंं। जिस वक्त सीएम जीआईसी मैदान में मेडिकल कॉलेज को प्रतापगढ़ की उपलब्धि बता रहे थे, उसी वक्त वहां के मरीज मजबूरी में बाहर से दवाएं खरीद रहे थे।
मेडिकल कॉलेज में इलाज की आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। यहां पर फ्री डायलिसिस, डिजिटल एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, मॉडर्न पैथालॉजी की सुविधा है। इसी कारण जिले भर के मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। रोजाना करीब एक हजार से 12 सौ मरीजों की ओपीडी होती है। हर दिन 20 से 25 मरीजों का ऑपरेशन होता है। 100 से 140 के करीब मरीजों को भर्ती किया जाता है, लेकिन मुफ्त इलाज का दावा पूरी तरह सच नहीं है।
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मरीज एक रुपये का पर्चा कटवाकर जब चिकित्सक के पास इलाज कराने जाते हैं, तो उन्हें बाहर की महंगी दवाएं लिख दी जाती हैं। इसे खरीदने में मरीजों की जेब ढीली होती हैं। सामान्य उल्टी-दस्त आदि के मामले में भी चार से छह सौ रुपये की बाहर की दवाएं डॉक्टर लिख दी जाती हैं।
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इसके अलावा जिन मरीजों का ऑपरेशन होता है, उनसे करीब तीन से चार हजार रुपये के इंजेक्शन और दवाएं बाहर से खरीदवाई जाती हैं। इससे मरीज परेशान होते हैं और मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए आकर खुद को ठगा महसूस करते हैं। बात यहीं समाप्त नहीं होती, मरीज को उसी मेडिकल स्टोर से दवा लेनी होती है, जिसके लिए डाक्टर बताते हैं। दूसरे मेडिकल स्टोर में वह दवाएं मिलती ही नहीं।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बीते दो माह पहले नाराजगी जताते हुए ट्वीट कर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को निर्देश दिए थे कि बाहर से दवा लिखने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, मगर बेल्हा में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
क्या बोले मरीज
फ्री में इलाज करवाने के लिए काजल नाम के मरीज को मेडिकल वार्ड में भर्ती कराया है। डॉक्टर ने ढाई हजार रुपये की दवा बाजार से लाने का पर्चा लिखा है। सस्ते दर पर दवा लेने के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर पहुंचा तो पता चला कि यहां पर दवा नहीं है। मजबूरन पांच सौ रुपये में दो दिन की दवा खरीदी है, पैसों के अभाव में शेष दवा नहीं ली। परमानंद तिवारी, पहलमापुर अमरगढ़

आलम ये है कि उपचार के लिए पांच दवाएं लगनी हैं तो दो अस्पताल से दी जाती है और बाकी तीन बाहर से लाने का पर्चा लिख दिया जाता है। चिकित्सक बिना किसी भय के ओपीडी पर्चे पर ही बाजार में मिलने वाली दवा को लिख रहे हैं। बाहर की दवाएं इतनी महंगी होती हैं कि धनाभाव के चलते पूरी खरीद भी नहीं सकते। शाहिद, भोला का पुरवा

अस्पताल में डॉक्टर फ्री में जांच करते हैं, मगर सांस रोगियों को बाहर की दवा खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। शिकायत करने के बाद तो उल्टा डाक्टर खुद ही धमकाते हैं और नेतागिरी न करने की हिदायत देने लगते हैं। हम यहां फ्री में दवा कराने आते हैं, लेकिन प्राइवेट से बस थोड़ा ही अंतर पड़ता है। अब्दुल रशीद, अचलपुर

Iअस्पताल में जरूरी दवाएं पर्याप्त मात्रा में हैं। चिकित्सकों को निर्देश दिया गया है कि वे बाहर की दवा किसी मरीज को नहीं लिखेंगे। यदि इसके बावजूद लिख रहे हैं तो गलत है। ऐसे चिकित्सकों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. सुरेश सिंह, सीएमएस।I
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