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Pratapgarh News: खतरे में नौनिहाल, 272 अनफिट स्कूल वाहन भर रहे फर्राटा
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शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों में 272 अनफिट वाहनों से बच्चों को ढोया जा रहा है। इन वाहनों में बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। परिवहन विभाग ने ऐसे दो सौ से अधिक स्कूल संचालकों को नोटिस भेजा है, जो बिना फिटनेस व प्रपत्र के खस्ताहाल वाहनों का इस्तेमाल छात्रों को ढोने में कर रहे हैं।
स्कूली वाहनों से हादसे को रोकने के लिए परिवहन विभाग लगातार जांच कर रहा है। जुलाई व अगस्त माह में परिवहन विभाग ने जांच कर 47 स्कूली वाहनों पर कार्रवाई की। हैरत की बात यह है कि अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने के बाद भी स्कूल संचालक लापरवाह बने हुए हैं। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो तीन बार नोटिस मिलने के बाद 90 स्कूली वाहनों की फिटनेस व प्रपत्र दुरुस्त कराया गया। अभी भी करीब 272 स्कूली वाहन ऐसे हैं जो स्कूल पंजीकरण, बिना फिटनेस के बच्चों को ढो रहे हैं।
जिले के 750 निजी स्कूलों में लगभग 1200 वाहन पंजीकृत हैं। अधिकारियों ने बताया कि स्कूल बसों में अग्निशमन किट, फर्स्ट एड बॉक्स सहित तमाम बिंदुओं पर ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करता है। लेकिन वास्तविक हालात इससे अलग हैं। ऐसे वाहनों में बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को विवश हैं।
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उप संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता ने बताया कि विभाग की ओर से ऐसे वाहनों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा चुकी है। अब ऐसे वाहनों से हादसा होने पर स्कूल संचालक व प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे। स्कूल संचालकों को माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से पत्र भेजने की कवायद चल रही है।
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स्कूली वाहनों से हादसे को रोकने के लिए परिवहन विभाग लगातार जांच कर रहा है। जुलाई व अगस्त माह में परिवहन विभाग ने जांच कर 47 स्कूली वाहनों पर कार्रवाई की। हैरत की बात यह है कि अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने के बाद भी स्कूल संचालक लापरवाह बने हुए हैं। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो तीन बार नोटिस मिलने के बाद 90 स्कूली वाहनों की फिटनेस व प्रपत्र दुरुस्त कराया गया। अभी भी करीब 272 स्कूली वाहन ऐसे हैं जो स्कूल पंजीकरण, बिना फिटनेस के बच्चों को ढो रहे हैं।
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जिले के 750 निजी स्कूलों में लगभग 1200 वाहन पंजीकृत हैं। अधिकारियों ने बताया कि स्कूल बसों में अग्निशमन किट, फर्स्ट एड बॉक्स सहित तमाम बिंदुओं पर ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करता है। लेकिन वास्तविक हालात इससे अलग हैं। ऐसे वाहनों में बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को विवश हैं।
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उप संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता ने बताया कि विभाग की ओर से ऐसे वाहनों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा चुकी है। अब ऐसे वाहनों से हादसा होने पर स्कूल संचालक व प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे। स्कूल संचालकों को माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से पत्र भेजने की कवायद चल रही है।