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उगते सूर्य को अर्घ्य देकर सहेजा आशीष
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Mon, 07 Nov 2016 11:34 PM IST
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सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही सूर्योपासना का पर्व डाला छठ खत्म हो गया। सुबह तड़केे बेल्हा देवी घाट पर सई नदी में उतरकर महिलाओं ने उगते सूर्य का अर्घ्य दिया। भोर चार बजे से ही महिलाएं हाथों में सूप, फल, फूल इत्यादि चढ़ाने के लिए सूर्य देवता का इंतजार करती रहीं। भोर में उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही महिलाओं ने व्रत तोड़ा।
सोमवार को भी बेल्हा देवी के तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालु महिलाएं लेटते हुए घाट तक पहुंचीं। वे लेटकर हाथ से जमीन नापती और उठ जातीं। जहां पर हाथ था, उसी जगह फिर से लेट जाती थी। छठ पूजा के पहले दिन रविवार को सई नदी के जल में अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर घर लौटीं व्रतधारी महिलाओं ने कोशी भरने की परंपरा पूरी की। उसके बाद रात भर जागरण और छठ मइया का भजन-कीर्तन होता रहा। रात में चार बजे फिर से उसी तैयारी के साथ व्रतधारी महिलांए सई नदी तट पर पहुंच गईं। पहले दिन की ही तरह पूजा की तैयारी करने के बाद सई नदी के ठंडे जल में उतर गईं। पानी छूते ही ठंडक का अहसास होने पर कुछ महिलाओं ने पैर वापस खींच लिए। मगर नदी का ठंडा पानी उनकी आस्था को डिगा नहीं सका। एक के बाद एक महिलाएं नदी में उतरती चली गईं। उगते सूर्य की पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं ने प्रसाद खाकर व्रत तोड़ा। घाट पर छठ पूजा समिति की तरफ से प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। व्रत वालों के अलग से प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। उसके बाद लोग घरों को लौट आये।
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सोमवार को भी बेल्हा देवी के तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालु महिलाएं लेटते हुए घाट तक पहुंचीं। वे लेटकर हाथ से जमीन नापती और उठ जातीं। जहां पर हाथ था, उसी जगह फिर से लेट जाती थी। छठ पूजा के पहले दिन रविवार को सई नदी के जल में अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर घर लौटीं व्रतधारी महिलाओं ने कोशी भरने की परंपरा पूरी की। उसके बाद रात भर जागरण और छठ मइया का भजन-कीर्तन होता रहा। रात में चार बजे फिर से उसी तैयारी के साथ व्रतधारी महिलांए सई नदी तट पर पहुंच गईं। पहले दिन की ही तरह पूजा की तैयारी करने के बाद सई नदी के ठंडे जल में उतर गईं। पानी छूते ही ठंडक का अहसास होने पर कुछ महिलाओं ने पैर वापस खींच लिए। मगर नदी का ठंडा पानी उनकी आस्था को डिगा नहीं सका। एक के बाद एक महिलाएं नदी में उतरती चली गईं। उगते सूर्य की पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं ने प्रसाद खाकर व्रत तोड़ा। घाट पर छठ पूजा समिति की तरफ से प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। व्रत वालों के अलग से प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। उसके बाद लोग घरों को लौट आये।
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