प्रतापगढ़ : पूर्व थानाध्यक्ष समेत सौ से अधिक पुलिसकर्मियों पर डकैती का केस दर्ज, डीजीपी के आदेश पर हुई एफआईआर
करीब दो साल पहले दबिश डालने के दौरान एक अधिवक्ता के घर में लूटपाट करने और महिलाओं से अभद्रता करने के आरोप में तत्कालीन कंधई थानाध्यक्ष समेत 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ शुक्रवार को मुकदमा दर्ज किया गया है।
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करीब दो साल पहले दबिश डालने के दौरान एक अधिवक्ता के घर में लूटपाट करने और महिलाओं से अभद्रता करने के आरोप में तत्कालीन कंधई थानाध्यक्ष समेत 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ शुक्रवार को मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मामले की जांच मानवाधिकार आयोग ने की थी। काफी समय तक मामला ठंडे बस्ते में रहने के बाद आखिरकार अब डीजीपी के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। घटना अप्रैल, 2021 में हुए जिला पंचायत सदस्य के मतदान के दौरान हुए विवाद से जुड़ी है।
कंधई थाना क्षेत्र के राजापुर मुफरिद की रहने वाली शाजिदा बेगम ने पुलिस महानिदेशक, राज्य मानवाधिकार आयोग समेत अन्य अधिकारियों को दो साल पहले शिकायती पत्र भेजकर बताया था कि उनकी रिश्तेदार तजरुन निशा जिला पंचायत सदस्य पद के लिए बेलखरनाथ द्वितीय से प्रत्याशी थीं। उनके पुत्र शुजातउल्ला भी तजरुन निशा को सहयोग कर रहे थे। शुजातउल्ला इलाहाबाद उच्च न्यायालय व प्रतापगढ़ सिविल कोर्ट में वकालत करते हैं।
19 अप्रैल, 2021 को मझानीपुर मतदान केंद्र पर बिना मत दिए मतदाताओं को वापस किया जा रहा था। इसका शुजातउल्ला ने विरोध किया तो अन्य पक्ष से उनकी कहासुनी हो गई। इसके बाद पुलिस ने शुजातउल्ला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। अगले दिन 20 अप्रैल 2021 को कंधई थानाध्यक्ष नीरज वालिया ने सैकड़ों पुलिसकर्मियों के साथ उनके घर पर रात में दबिश दी।
शाजिदा बेगम का आरोप है कि पुलिसकर्मी बिना कुछ पूछे उनके घर का सामान तोड़ने लगे। आलमारी में रखे जेवरात समेटने के बाद उनकी बहू और बेटी के मोबाइल छीन लिए। विरोध करने पर इन दोनों की जमकर पिटाई की। जिससे दोनों बेहोश हो गईं। मासूम पोते व पोती को बिस्तर से उठाकर फेंक दिया। पुलिस प्रशासन उनकी कोई बात सुनने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद यह मामला बार काउंसिल प्रयागराज के अध्यक्ष के पास पहुंचा था। उनकी पहल पर प्रकरण राज्य मानवाधिकार आयोग में पहुंचा।
मामले की जांच राज्य मानवाधिकार आयोग उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस अधीक्षक अमित मिश्र ने करते हुए अपनी रिपोर्ट बार काउंसिल के अध्यक्ष को भी भेजी थी। सात सितंबर 2021 को भेजी गई गई रिपोर्ट में तत्कालीन कंधई थानाध्यक्ष नीरज वालिया, उपनिरीक्षक शैलेंद्र तिवारी, उपनिरीक्षक सूर्य प्रताप सिंह समेत अन्य पुलिस कर्मिर्यों को दोषी पाया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा है कि मुकदमा दर्ज करने के बाद ही किसी निष्कर्ष पहुंचा जा सकता है। इसलिए किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना आवश्यक है।
राजपत्रित अधिकारी को सौंपी जाएगी मुकदमे की विवेचना
करीब दो साल बाद डीजीपी के निर्देश पर शुक्रवार को कंधई पुलिस ने तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत सौ से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। कंधई थाने में दर्ज पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमे की जांच वर्तमान थानाध्यक्ष धीरेंद्र ठाकुर नहीं करेंगे। पुलिस सूत्रों के अनुसार मुकदमे की जांच किसी राजपत्रित अधिकारी को सौंपी जाएगी।