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मतदान का बहिष्कार, अफसरों से की फरियाद, फिर भी नहीं मिला पुल
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 21 Dec 2017 11:19 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
- फोटो : pratapgarah
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शहर के करीब होने के बाद भी हुडहा गांव की इससे दूरी बनी हुई है। चमरौधा नदी के तट पर स्थित यह गांव शहर से मात्र पांच किमी की दूरी है, मगर गांव पहुंचने के लिए पंद्रह किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। रेलवे लाइन और नदी से घिरे गांव के लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया, अफसरों और नेताओं से फरियाद की, मगर आज तक गांव के लोगों को पुल नसीब नहीं हुआ है।
सदर विधानसभा का हुडहा गांव शहर से मात्र पांच किमी की दूरी पर स्थित है। यह गांव तीन तरफ से चमरौधा नदी और एक तरफ रेलवे लाइन से घिरा होने के कारण गांव के लोगों को शहर आने -जाने के लिए पंद्रह किमी का चक्कर लगाना पड़ता है। रेलवे लाइन के ऊपर से गुजरने वाले लोग अपनी जान जोखिम में डालकर आज भी आते जाते हैं। गांव वालों ने आपसी सहयोग से चहली (बांस) का पुल बना रखा है, उससे लोग पैदल और बाइक लेकर आते जाते हैं। चमरोधा नदी पर पुल बनवाने के लिए नौ वर्ष पूर्व विधायक बृजेश सौरभ ने आधारशिला रखी थी। पुल की आधारशिला रखने के बाद गांव के लोगों को यह विश्वास हो गया था,कि अब जल्द ही पुल का निर्माण हो जाएगा।
गांव के लोग इंतजार करते रह गए, मगर आज तक पुल निर्माण नहीं हुआ। इससे नाराज गांव के लोगों ने वर्ष 2016 में हुए मतदान का बहिष्कार किया। जिसकी आवाज लखनऊ में बैठे अफसरों तक सुनाई दी। हालांकि अफसरों का प्रयास रंग लाया है। पुल निर्माण के लिए जिला प्रशासन की ओर से 7,88,61,000 रुपये की डिमांड को स्वीकार करते हुए सात लाख रुपये टोकनमनी के रुप में जारी कर दिया है। शासन की यह पहल कारगर साबित हुई तो अगले वर्ष 2018 के अंत तक गांव वालों को पुल का तोहफा मिल सकता है।
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सदर विधानसभा का हुडहा गांव शहर से मात्र पांच किमी की दूरी पर स्थित है। यह गांव तीन तरफ से चमरौधा नदी और एक तरफ रेलवे लाइन से घिरा होने के कारण गांव के लोगों को शहर आने -जाने के लिए पंद्रह किमी का चक्कर लगाना पड़ता है। रेलवे लाइन के ऊपर से गुजरने वाले लोग अपनी जान जोखिम में डालकर आज भी आते जाते हैं। गांव वालों ने आपसी सहयोग से चहली (बांस) का पुल बना रखा है, उससे लोग पैदल और बाइक लेकर आते जाते हैं। चमरोधा नदी पर पुल बनवाने के लिए नौ वर्ष पूर्व विधायक बृजेश सौरभ ने आधारशिला रखी थी। पुल की आधारशिला रखने के बाद गांव के लोगों को यह विश्वास हो गया था,कि अब जल्द ही पुल का निर्माण हो जाएगा।
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गांव के लोग इंतजार करते रह गए, मगर आज तक पुल निर्माण नहीं हुआ। इससे नाराज गांव के लोगों ने वर्ष 2016 में हुए मतदान का बहिष्कार किया। जिसकी आवाज लखनऊ में बैठे अफसरों तक सुनाई दी। हालांकि अफसरों का प्रयास रंग लाया है। पुल निर्माण के लिए जिला प्रशासन की ओर से 7,88,61,000 रुपये की डिमांड को स्वीकार करते हुए सात लाख रुपये टोकनमनी के रुप में जारी कर दिया है। शासन की यह पहल कारगर साबित हुई तो अगले वर्ष 2018 के अंत तक गांव वालों को पुल का तोहफा मिल सकता है।
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