झुलसे मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज में 20 बेड का बर्न वार्ड तैयार किया जाएगा। इस वार्ड में एसी तक लगाई जाएगी। 24 घंटे एक डॉक्टर, स्टाफ नर्स और वार्डबॉय की तैनाती की जाएगी। वार्ड में मरीजों के तीमारदारों का भी प्रवेश वर्जित रहेगा।
मेडिकल कॉलेज संचालन के तीन साल पूरे हो चुके हैं। मगर अभी तक जले मरीजों को भर्ती कर इलाज करने के लिए अलग से वार्ड तक तैयार नहीं किया गया। बीते दस साल पहले 22 लाख की लागत से तैयार बर्न यूनिट का संचालन शुरू नहीं हो सका। इस भवन में सीएमओ ने अपना कब्जा जमा रखा है। पहले वन स्टाप सेंटर बनाया गया, फिर कोरोना काल में कोविड कंट्रोल रूम। कोरोना खत्म होने के बाद इसे एचआईवी विभाग बना दिया गया। इससे जले मरीजों को परेशान होना पड़ता है। वार्ड की व्यवस्था न होने के कारण 40 प्रतिशत से ज्यादा झुलसे मरीजों को चिकित्सक प्रयागराज रेफर कर देते हैं। मरीजों के साथ तीमारदारों को परेशान होना पड़ता है। इस समस्या से अब जल्द ही निजात मिलने वाला है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि गर्मी के दिनों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती है। काफी संख्या में जले मरीज अस्पताल आते हैं। मरीजों के सुविधा के लिए 20 बेड का बर्न वार्ड तैयार किया जाएगा। वार्ड में एसी लगाई जाएगी। जिससे झुलसे मरीजों को दिक्कतें न हो। वार्ड में मरीज, डॉक्टर, स्टाफ नर्स और वार्डबॉय को छोड़कर तीमारदार और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक रहेगा। मरीज के पास सुबह शाम नश्ता और खाना पहुंच जाएगा। इससे मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कतें भी नहीं होगी।