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बाबागंज में राजा भइया को घेरने की तैयारी में भाजपा
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लंबे समय से राजाभैया के प्रभाव वाली बाबागंज विधानसभा सीट पर 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नजरें गड़ा रखी हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में राजाभैया समर्थित प्रत्याशी विनोद सरोज की जीत का अंतर कम होने से मिली संजीवनी के बाद भाजपा इस विधानसभा में बूथ मजबूत करने में जुटी है। स्थानीय स्तर पर बीजेपी नेताओं ने जहां पूरी ताकत झोंक रखी है, वहीं पार्टी की तरफ से भी बाबागंज और कुंडा में भाजपा को मजबूत करने के लिए राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त सुनील भराला को प्रभारी बनाकर भेजा गया है।
जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया कुंडा विधानसभा से लगातार रिकार्ड मतों से जीत हासिल करते चले आ रहे हैं। वह 1993 से इस सीट से लगातार विधायक हैं। बगल की बाबागंज सुरक्षित विधानसभा सीट पर भी उनका सीधा दखल रहता है। लगातार पांच बार से यहां से राजाभैया समर्थित प्रत्याशी ही चुनाव जीतते रहे हैं।
विधानसभा चुनाव में भाजपा समेत अन्य दलों का यहां प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा यहां मुकाबले में नजर आई। इसके अलावा 2019 के लोकसभा चुनाव में कौशाम्बी सांसद विनोद सोनकर को भी बाबागंज विधानसभा में मतदाताओं का साथ मिला।
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2017 के विधानसभा चुनाव में राजाभैया समर्थित विधायक विनोद सरोज की जीत का अंतर 2012 के मुकाबले में कम हो गया। इसके बाद से भाजपा की इस सीट पर सीधी नजर है। 2022 के विधानसभा चुनाव में राजाभैया को घेरने के लिए भाजपा एक साल से बूथ स्तर पर मेहनत कर रही है।
सभी बूथों पर दस युवाओं की टीम बनाई गई है। जिनका सत्यापन भी किया जा चुका है। चुनाव के दिन बूथ की कमान इन्हीं युवाओं के हाथ में होगी। भाजपा नेताओं का तर्क है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में उतरे पवन कुमार गौतम ने राजाभैया समर्थित प्रत्याशी विनोद सरोज को टक्कर दी थी।
विनोद सरोज को कुल 87778 मत मिले थे जबकि भाजपा प्रत्याशी पवन को 50618 मत मिले थे। विनोद सरोज भाजपा प्रत्याशी पवन कुमार से 37160 मत से जीतने में कामयाब हुए थे। इस चुनाव में विनोद की जीत का अंतर वर्ष 2012 के चुुनाव के मुकाबले कम हो गया था।
2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपना दल को यह सीट दे दी थी। यहां से मैदान में उतरे बसपा के महेंद्र बौद्घ को 27266 मत मिले थे। जबकि विनोद सरोज को 69332 मत हासिल हुए थे। विधायक बने विनोद सरोज ने बसपा प्रत्याशी को 42066 मत से पराजित किया था। यह जीत का अंतर 2017 के चुनाव में घट गया।
नेतृत्व के निर्देश पर लगातार पार्टी के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। बूथों को मजबूत करते हुए सभी गांवों में बूथ स्तर पर चुनाव कमेटियों का गठन किया गया है। अभी से चुनाव की तैयारियों को लेकर रणनीति के तहत काम कर रहे हैं।
हरिओम मिश्र, जिलाध्यक्ष, भाजपा
बाबागंज विधानसभा पर 1996 से राजाभैया समर्थक का कब्जा
जिले की बाबागंज विधानसभा सीट कभी बिहार के नाम से जानी जाती थी। कुंडा से निर्दल विधायक राजाभैया ने अपने करीबी सेवानिवृत्त सैनिक रामनाथ सरोज को वर्ष 1996 में बिहार विधानसभा से चुनाव लड़ाया। वह रिकार्ड मतों से जीत हासिल कर विधायक बने थे। मध्यावधि चुनाव में रामनाथ सरोज फिर विधायक बने।
उनके निधन के बाद पिता की विरासत संभालने का मौका विनोद सरोज को मिला। वर्ष 2007 में विनोद सरोज को राजाभैया ने बिहार से निर्दल चुनाव लड़ाया। राजाभैया की रणनीति के चलते कम उम्र में विनोद विधायक बन गए। वर्ष 2012 के बाद 2017 में भी विनोद ने जीत हासिल कर हैट्रिक बनाई।
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जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया कुंडा विधानसभा से लगातार रिकार्ड मतों से जीत हासिल करते चले आ रहे हैं। वह 1993 से इस सीट से लगातार विधायक हैं। बगल की बाबागंज सुरक्षित विधानसभा सीट पर भी उनका सीधा दखल रहता है। लगातार पांच बार से यहां से राजाभैया समर्थित प्रत्याशी ही चुनाव जीतते रहे हैं।
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विधानसभा चुनाव में भाजपा समेत अन्य दलों का यहां प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा यहां मुकाबले में नजर आई। इसके अलावा 2019 के लोकसभा चुनाव में कौशाम्बी सांसद विनोद सोनकर को भी बाबागंज विधानसभा में मतदाताओं का साथ मिला।
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2017 के विधानसभा चुनाव में राजाभैया समर्थित विधायक विनोद सरोज की जीत का अंतर 2012 के मुकाबले में कम हो गया। इसके बाद से भाजपा की इस सीट पर सीधी नजर है। 2022 के विधानसभा चुनाव में राजाभैया को घेरने के लिए भाजपा एक साल से बूथ स्तर पर मेहनत कर रही है।
सभी बूथों पर दस युवाओं की टीम बनाई गई है। जिनका सत्यापन भी किया जा चुका है। चुनाव के दिन बूथ की कमान इन्हीं युवाओं के हाथ में होगी। भाजपा नेताओं का तर्क है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में उतरे पवन कुमार गौतम ने राजाभैया समर्थित प्रत्याशी विनोद सरोज को टक्कर दी थी।
विनोद सरोज को कुल 87778 मत मिले थे जबकि भाजपा प्रत्याशी पवन को 50618 मत मिले थे। विनोद सरोज भाजपा प्रत्याशी पवन कुमार से 37160 मत से जीतने में कामयाब हुए थे। इस चुनाव में विनोद की जीत का अंतर वर्ष 2012 के चुुनाव के मुकाबले कम हो गया था।
2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपना दल को यह सीट दे दी थी। यहां से मैदान में उतरे बसपा के महेंद्र बौद्घ को 27266 मत मिले थे। जबकि विनोद सरोज को 69332 मत हासिल हुए थे। विधायक बने विनोद सरोज ने बसपा प्रत्याशी को 42066 मत से पराजित किया था। यह जीत का अंतर 2017 के चुनाव में घट गया।
नेतृत्व के निर्देश पर लगातार पार्टी के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। बूथों को मजबूत करते हुए सभी गांवों में बूथ स्तर पर चुनाव कमेटियों का गठन किया गया है। अभी से चुनाव की तैयारियों को लेकर रणनीति के तहत काम कर रहे हैं।
हरिओम मिश्र, जिलाध्यक्ष, भाजपा
बाबागंज विधानसभा पर 1996 से राजाभैया समर्थक का कब्जा
जिले की बाबागंज विधानसभा सीट कभी बिहार के नाम से जानी जाती थी। कुंडा से निर्दल विधायक राजाभैया ने अपने करीबी सेवानिवृत्त सैनिक रामनाथ सरोज को वर्ष 1996 में बिहार विधानसभा से चुनाव लड़ाया। वह रिकार्ड मतों से जीत हासिल कर विधायक बने थे। मध्यावधि चुनाव में रामनाथ सरोज फिर विधायक बने।
उनके निधन के बाद पिता की विरासत संभालने का मौका विनोद सरोज को मिला। वर्ष 2007 में विनोद सरोज को राजाभैया ने बिहार से निर्दल चुनाव लड़ाया। राजाभैया की रणनीति के चलते कम उम्र में विनोद विधायक बन गए। वर्ष 2012 के बाद 2017 में भी विनोद ने जीत हासिल कर हैट्रिक बनाई।