विश्व खाद्य दिवस पर बृहस्पतिवार को राजा दिनेश सिंह कृषि विज्ञान केंद्र कालाकांकर में प्राकृतिक खेती पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। डॉ. नवीन कुमार सिंह ने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती आज की आवश्यकता है, क्योंकि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता घट रही है और नदियां प्रदूषित हो रही हैं।
उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत जैसे देशी जैविक घोलों का उपयोग कर मृदा स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाएं। पशु वैज्ञानिक डाॅ. प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि प्राकृतिक खेती में देशी गाय का विशेष महत्व है। गाय का गोबर और गोमूत्र न केवल खेतों के लिए जैविक उर्वरक के रूप में उपयोगी हैं, बल्कि इससे बने घोल पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं। कार्यक्रम में कृषि विभाग से जगदंबिका प्रसाद, विश्वजीत प्रताप सिंह, शिवम यादव, रामेश्वर प्रसाद, लक्ष्मीकांत, आलोक शुक्ला व अवध बिहारी मौजूद रहे।