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आयुष्मान भारत के मरीजों का इलाज करने से कतरा रहे निजी अस्पताल

Mon, 20 May 2019 12:02 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 20 May 2019 12:02 AM IST
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Ayushman is suffering from the treatment of patients in India, private hospital
doctor
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अतिमहात्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना बेल्हा में परवान नहीं चढ़ पा रही है। जिले के निजी अस्पताल आयुष्मान का मान नहीं रख्र रहे हैं। निजी अस्पताल संचालकों ने योजना के तहत सीएमओ के यहां पंजीकरण तो करा लिया है, लेकिन मरीजों का इलाज करने से हाथ खड़े कर दे रहे हैं। महज सरकारी अस्पतालों में ही मरीज भर्तीे किए जा रहे हैं। सरकारी दवा से मरीजों की बीमारी जहां हरने का प्रयास चिकित्सक कर रहे हैं वहीं प्राइवेट सेंटरों पर भेजकर मरीजों से ही शुल्क जमा करवाकर उनकी जांच करा रहे हैं। 
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केंद्र की मोदी सरकार ने बीते 25 सितंबर 2018 को आयुष्मान भारत योजना का शुभांरभ किया था। वर्ष 2011 में हुई आर्थिक सामाजिक जनगणना के आधार पर जिले के 1 लाख 57 हजार  हजार परिवारों को इसमें शामिल किया गया। इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार का पांच लाख रुपये तक कैशलेश उपचार होना है। मगर जिले के कुछ नर्सिंगहोम संचालक इस योजना को पलीता लगा रहे हैं। वह आयुष्मान भारत के मरीजों को भर्ती करने से कतरा रहे हैं।
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गंभीर मरीज बताकर उन्हें रेफर कर दे रहे हैं। अपने यहां भर्ती करने से कतराते हैं। जबकि केंद्र सरकार ने आदेश दिया है कि पात्रता सूची में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, चिकित्सक पहले उन्हें भर्ती कर इलाज शुरू कर देंगे। बाद में गोल्डेन कार्ड खुद जारी करेंगे। मगर बेल्हा में इसके विपरीत हो रहा है। जिले के सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना शुरू होने के बाद अब तक 498 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया है।
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वहीं जिले के पांच नर्सिंगहोम संचालकों ने स्वास्थ्य विभाग में अपना पंजीकरण तो करवा लिया है, मगर मरीजों को भर्ती कर इलाज करने से कतरा रहे हैं। शहर में स्थित कनौसा मदर अस्पताल और अंसारी नर्सिंग होम में अभी तक एक भी मरीज भर्ती नहीं किए गए। जबकि रोजना दोनों अस्पतालों में दर्जनों मरीजों को भर्ती किया जाता है।

वहीं शहर के रूमा   नर्सिंग होम में 76 तो संजीवनी नर्सिंगहोम में 46 और शांतनू नर्सिंगहोम में 10 मरीजों को भर्ती कर चिकित्सकों ने इलाज किया है। विभाग के आंकड़े पर गौर किया जाए तो जिला व महिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी अथवा पीएचसी में अबतक 498 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया। 432 मरीजों ने गैर जनपद के  प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती होकर अपना इलाज कराया।  

कम भुगतान मिलने के कारण इलाज करने से दूर भागते हैं नर्सिंगहोम संचालक
नर्सिंग होम संचालकों को भले ही आयुष्मान भारत योजना के मरीजों को भर्ती कर इलाज करने के लिए केंद्र सरकार ने आदेश दिया है, मगर मरीजों के इलाज में मनमुताबिक भुगतान न मिलने के कारण संचालक मरीजों का इलाज करने से दूर भागते हैं। दरअसल आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज करने पर सरकारी दर से भुगतान होता है। जबकि दूसरे मरीजों से अस्पताल संचालक मनमाना भुगतान लेते हैं। 

लगातार हो रहा भुगतान
आयुष्मान भारत के पात्र मरीजों को भर्ती कर इलाज करने वाले अस्पताल संचालकों के बिल का भुगतान तत्काल कर दिया जा रहा है। कागजी कोरम पूरा न करने वाले लोगों के ही बिल भुगतान होने में देरी हो रही है। 
बहुत से लोगों को नहीं पता, आयुष्मान भारत के पात्र हैं या फिर अपात्र
जनपद के 1 लाख 57 हजार परिवारों में से बहुत से ऐसे परिवार हैं जिन्हें यह नहीं पता है कि उनका भी नाम आयुष्मान भारत की पात्रता सूची में शामिल है। दरअसल सर्वे के दौरान ग्राम विकास अधिकारी और आशा बहुओं ने खेल किया। किसी को यह नहीं पता चला कि सर्वे हो रहा है। उनका मोबाइल नंबर और आधार कार्ड के साथ नए राशन कार्ड की फीडिंग नहीं की गई। 

सरकारी अस्पतालों में भी पूरी सुविधा नहीं
आयुष्मान भारत योजना के तहत 432 मरीज ऐसे सामने आए हैं जिन्होंने आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा के फेर में प्रयागराज और लखनऊ में अपना इलाज कराया। जिले में डायलिसिस, सीटी स्कैन सहित अन्य आधुनिक जांच की व्यवस्था न होने के कारण लोगों को प्रयागराज, लखनऊ और दिल्ली का रुख करना पड़ रहा है। 

अंसारी और मदर अस्पताल संचालक आयुष्मान भारत के मरीजों को भर्ती कर इलाज नहीं कर रहे हैं। इनका पंजीयन निरस्त करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। बाकि अन्य अस्पताल मरीजों को भर्ती कर इलाज कर रहे हैं। डॉ सुधाकर सिंह, प्रोग्राम मैनेजर, आयुष्मान भारत।
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