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आयुष्मान भारत : कछुआ की चाल चल रहा स्वास्थ्य विभाग
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जिला अस्पताल में आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड बनवाने को जुटी भीड़।
- फोटो : PRATAPGARH
केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना में स्वास्थ्य विभाग कछुआ की चाल से चल रहा है। पात्रों को गोल्डेन कार्ड जारी करने में अफसर लापरवाह बने हैं। योजना के तहत जिले में एक लाख 77 हजार परिवार चयनित किए गए थे, लेकिन अभी तक सिर्फ 90 हजार लोगों को ही गोल्डेन कार्ड जारी हो सका है।
केंद्र सरकार ने 23 सितंबर 2018 में आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की थी। वर्ष 2011 में ुई आर्थिक जनगणना के आधार पर इस योजना के तहत जिले के 1 लाख 77 हजार 721 परिवारों को पात्रता सूची में शामिल किया गया। इस योजना के तहत परिवार के सभी सदस्यों के नाम गोल्डेन कार्ड जारी करने का आदेश था।
एक साल बीतने के बाद भी अभी तक मात्र 88 हजार 483 लोगों को ही गोल्डेन कार्ड जारी हो सका है। दावा किया जा रहा है कि सालभर के अंदर 1860 लोगों का सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में योजना के तहत इलाज किया गया। विभाग के सूत्रों की मानी जाए तो शासन की ओर चयनित बहुत से पात्र ऐसे भी हैं जिन्हें यह जानकारी ही नहीं है कि पात्रता सूची में उनका नाम है या नहीं। ऐसे में वे जरूरत पडने के बाद भी कार्ड नहीं बनवा पा रहे हैं।
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पात्रता सूची में सामने आ रही भारी गड़बड़ी
आयुष्मान भारत योजना की पात्रता सूची में भारी गड़बड़ी सामने आ रही है। शासन ने ग्राम पंचायत अधिकारी, आशा बहू, एएनएम और वीडीओ को लाभार्थियों का सर्वे करने की जिम्मेदारी दी थी। इन लोगों ने सर्वे करने के बजाए शासन की ओर से मिली सूची को ही ठीक दिखाकर स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दिया। स्वास्थ्य विभाग ने उसे ही शासन के पास भेज दिया।
डीएम के आदेश पर जिले के समस्त सीएचसी और पीएचसी के साथ जिला व महिला अस्पताल में गोल्डेन कार्ड बनाया जा रहा है। पात्र खुद सेंटर पर जाकर अपना कार्ड बनवा सकते हैं। जरूरत पडने पर कार्ड दिखाकर अपना इलाज करवा सकते हैं। खुद के साथ परिवार के अन्य सदस्यों को भी ले जाकर उनका भी कार्ड जारी करवा सकते हैं।
डॉक्टर अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ।
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केंद्र सरकार ने 23 सितंबर 2018 में आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की थी। वर्ष 2011 में ुई आर्थिक जनगणना के आधार पर इस योजना के तहत जिले के 1 लाख 77 हजार 721 परिवारों को पात्रता सूची में शामिल किया गया। इस योजना के तहत परिवार के सभी सदस्यों के नाम गोल्डेन कार्ड जारी करने का आदेश था।
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एक साल बीतने के बाद भी अभी तक मात्र 88 हजार 483 लोगों को ही गोल्डेन कार्ड जारी हो सका है। दावा किया जा रहा है कि सालभर के अंदर 1860 लोगों का सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में योजना के तहत इलाज किया गया। विभाग के सूत्रों की मानी जाए तो शासन की ओर चयनित बहुत से पात्र ऐसे भी हैं जिन्हें यह जानकारी ही नहीं है कि पात्रता सूची में उनका नाम है या नहीं। ऐसे में वे जरूरत पडने के बाद भी कार्ड नहीं बनवा पा रहे हैं।
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पात्रता सूची में सामने आ रही भारी गड़बड़ी
आयुष्मान भारत योजना की पात्रता सूची में भारी गड़बड़ी सामने आ रही है। शासन ने ग्राम पंचायत अधिकारी, आशा बहू, एएनएम और वीडीओ को लाभार्थियों का सर्वे करने की जिम्मेदारी दी थी। इन लोगों ने सर्वे करने के बजाए शासन की ओर से मिली सूची को ही ठीक दिखाकर स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दिया। स्वास्थ्य विभाग ने उसे ही शासन के पास भेज दिया।
डीएम के आदेश पर जिले के समस्त सीएचसी और पीएचसी के साथ जिला व महिला अस्पताल में गोल्डेन कार्ड बनाया जा रहा है। पात्र खुद सेंटर पर जाकर अपना कार्ड बनवा सकते हैं। जरूरत पडने पर कार्ड दिखाकर अपना इलाज करवा सकते हैं। खुद के साथ परिवार के अन्य सदस्यों को भी ले जाकर उनका भी कार्ड जारी करवा सकते हैं।
डॉक्टर अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ।