{"_id":"60e34c6f8ebc3ebf59350f7d","slug":"antigen-test-report-number-of-11-teachers-and-employees-found-fake-in-investigation-pratapgarh-news-ald31014665","type":"story","status":"publish","title_hn":"11 शिक्षकों और कर्मचारियों की एंटीजन जांच रिपोर्ट का नंबर जांच में मिला फर्जी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
11 शिक्षकों और कर्मचारियों की एंटीजन जांच रिपोर्ट का नंबर जांच में मिला फर्जी
विज्ञापन
पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान कोरोना से जान गंवाने वाले जिले के ग्यारह शिक्षकों और कर्मचारियों के परिवारों को तीस-तीस लाख रुपये मुआवजा मिलने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। जांच के दौरान जान गंवाने वालों की एंटीजन जांच रिपोर्ट का नंबर फर्जी मिला है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में कहीं भी उनकी जांच का नंबर दर्ज नहीं है। ऐसे में उनके परिवारों को शासन की तरफ से तीस-तीस लाख रुपये मुआवजे मिलने की संभावना खत्म होती नजर आ रही है। उनके आवेदनों को निरस्त कर दिया गया है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान शिक्षकों और कर्मचारियों की कोरोना संक्रमण से हुई मृत्यु के मामले में शासन ने आश्रितों को तीस-तीस लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। जिले में 63 परिवारों ने आवेदन कर आर्थिक सहयोग की मांग की थी। विभागीय अधिकारियों ने आवेदन पत्रों के साथ दी गई कोरोना जांच रिपोर्ट को सत्यापन के लिए सीएमओ कार्यालय भेज दिया। स्वास्थ्य विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि 11 आवेदन पत्रों में कोविड-19 पॉजिटिव होने की जो एंटीजन रिपोर्ट लगी है, उसका स्वास्थ्य विभाग में कहीं जिक्र ही नहीं है।
दरअसल, कोरोना काल में जिन लोगों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती थी, उसे प्रतिदिन ऑनलाइन कर दिया जाता था। अब जो लोग आर्थिक सहायता के लिए आवेदन कर रहे हैं, उनका भी मिलान ऑनलाइन किया जा रहा है। कोरोना से जान गंवाने वाले जिन 11 लोगों के परिवारों ने एंटीजन रिपोर्ट दी है, उसका रिकार्ड नहीं मिल रहा है। इससे 11 आवेदन पत्रों को निरस्त कर दिया गया है। 52 आवेदन पत्रों में 33 आवेदन सही पाए गए हैं।
विज्ञापन
19 आवेदन पत्रों में कोरोना जांच रिपोर्ट अमेठी, सुल्तानपुर और प्रयागराज की लगी हुई है। इसलिए जिला प्रशासन अब इन जिलों से सत्यापन करा रहा है। पंचायत चुनाव के दौरान से सबसे अधिक कोरोना संक्रमित शिक्षकों की मौत हुई थी। जिनकी संख्या 38 है। इसके अलावा पंचायतीराज विभाग, समाज कल्याण, पशुपालन, अल्पसंख्यक विभाग के कर्मचारियों के साथ ही माध्यमिक शिक्षा विभाग के नौ शिक्षकों की भी कोरोना की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
सात परिवारों ने दो बार कर दिए आवेदन
चुनाव आयोग ने आनलाइन और डीएम के माध्यम ऑफलाइन आवेदन करने का मौका दिया था। सात परिवारों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों आवेदन कर दिए। हालांकि जांच में एक आवेदन पत्र को निरस्त कर दिया गया है। आर्थिक सहायता राशि देने के पहले पात्रता की जांच करने के साथ विभागाध्यक्षों से लिखित प्रमाण लिया जा रहा है।
अभी तक किसी को नहीं मिला मुआवजा
आवेदन करने वाले 19 लोगों की कोरोना जांच रिपोर्ट अमेठी, सुल्तानपुर और प्रयागराज जिले की लगी हुई है। इसलिए इन जिलों से रिपोर्ट आने के बाद ही शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। यही वजह है कि अभी तक जिले में किसी को भी मुआवजा नहीं मिला है।
मृतक आश्रितों को नहीं मिली नौकरी
कोरोना संक्रमित कर्मचारियों और शिक्षकों की मौत के बाद अभी तक मृतक आश्रितों को नौकरी नहीं दी गई है। बेसिक शिक्षा विभाग में मात्र एक कर्मचारी की मौत पर उसकी पत्नी को अनुचर के पद पर तैनाती दी गई है। अन्य विभागों में कागजी कोरम पूरे किए जा रहे हैं।
मृतक आ श्रितों के जो आवेदन आए हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने 11 आवेदन पत्रों में संलग्न कोविड-19 की रिपोर्ट को संदिग्ध बताया है। इससे उनका आवेदन निरस्त कर फिर से सत्यापन कराया जा रहा है।
रविशंकर द्विवेदी, डीपीआरओ
चपरासी की नौकरी करने के लिए तैयार नहीं हैं आश्रित
लिपिक के पद खाली नहीं होने से बढ़ी मुसीबत
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कोरोना से सबसे अधिक बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की मौत हुई थी। दिवंगत शिक्षकों के अधिकांश परिजन ऐसे हैं, जो शिक्षक बनने की पात्रता नहीं रखते हैं। विभाग में लिपिक के पद खाली नहीं हैं। ऐसे में विभागीय अधिकारी चपरासी की नौकरी देना चाहते हैं, मगर आश्रित चपरासी की नौकरी करने के लिए तैयार नहीं हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग में सबसे अधिक 38 शिक्षकों और कर्मचारियों की पंचायत चुनाव के दौरान कोरोना की चपेट में आने से मौत हो गई। शासन ने सभी के परिवारों के आश्रितों को नौकरी देने को कहा है। मगर आलम यह है कि जिस पद पर वह नौकरी करना चाहते हैं, वह जिले में खाली नहीं है। चपरासी के पद रिक्त हैं, लेकिन उस पर आश्रित कार्य करने के लिए तैयार नहीं है। दरअसल, शिक्षक की मौत के बाद इसी पद पर नियुक्ति के लिए आश्रित के पास संबंधित योग्यता होनी चाहिए। उसे शिक्षक भर्ती के सभी मानकों को पूरा करना होगा। स्नातक पढ़ाई के साथ डीएलएड और टीईटी की परीक्षा पास होना चाहिए। अधिकांश शिक्षकों की मौत के बाद पत्नियों ने आश्रित के रूप में नौकरी के लिए आवेदन किया है। उनके पास शिक्षक बनने की योग्यता नहीं है। वे लिपिक का पद चाहती हैं, मगर जिले में लिपिक के पद खाली नहीं हैं। चपरासी के पद खाली है, लेकिन आश्रित उस पर नौकरी करने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐेसे में विभागीय अधिकारियों की परेशानी बढ़ गई है।
वर्जन-------
जिले में लिपिक के पद खाली नहीं हैं। अनुचर पद पर एक महिला कर्मचारी को आश्रित के रूप में तैनाती दी गई है। जो आवेदन बचे हुए हैं, उसे शासन के पास भेज दिया गया है।
अशोक कुमार सिंह, बीएसए
विज्ञापन
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान शिक्षकों और कर्मचारियों की कोरोना संक्रमण से हुई मृत्यु के मामले में शासन ने आश्रितों को तीस-तीस लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। जिले में 63 परिवारों ने आवेदन कर आर्थिक सहयोग की मांग की थी। विभागीय अधिकारियों ने आवेदन पत्रों के साथ दी गई कोरोना जांच रिपोर्ट को सत्यापन के लिए सीएमओ कार्यालय भेज दिया। स्वास्थ्य विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि 11 आवेदन पत्रों में कोविड-19 पॉजिटिव होने की जो एंटीजन रिपोर्ट लगी है, उसका स्वास्थ्य विभाग में कहीं जिक्र ही नहीं है।
विज्ञापन
दरअसल, कोरोना काल में जिन लोगों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती थी, उसे प्रतिदिन ऑनलाइन कर दिया जाता था। अब जो लोग आर्थिक सहायता के लिए आवेदन कर रहे हैं, उनका भी मिलान ऑनलाइन किया जा रहा है। कोरोना से जान गंवाने वाले जिन 11 लोगों के परिवारों ने एंटीजन रिपोर्ट दी है, उसका रिकार्ड नहीं मिल रहा है। इससे 11 आवेदन पत्रों को निरस्त कर दिया गया है। 52 आवेदन पत्रों में 33 आवेदन सही पाए गए हैं।
विज्ञापन
19 आवेदन पत्रों में कोरोना जांच रिपोर्ट अमेठी, सुल्तानपुर और प्रयागराज की लगी हुई है। इसलिए जिला प्रशासन अब इन जिलों से सत्यापन करा रहा है। पंचायत चुनाव के दौरान से सबसे अधिक कोरोना संक्रमित शिक्षकों की मौत हुई थी। जिनकी संख्या 38 है। इसके अलावा पंचायतीराज विभाग, समाज कल्याण, पशुपालन, अल्पसंख्यक विभाग के कर्मचारियों के साथ ही माध्यमिक शिक्षा विभाग के नौ शिक्षकों की भी कोरोना की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
सात परिवारों ने दो बार कर दिए आवेदन
चुनाव आयोग ने आनलाइन और डीएम के माध्यम ऑफलाइन आवेदन करने का मौका दिया था। सात परिवारों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों आवेदन कर दिए। हालांकि जांच में एक आवेदन पत्र को निरस्त कर दिया गया है। आर्थिक सहायता राशि देने के पहले पात्रता की जांच करने के साथ विभागाध्यक्षों से लिखित प्रमाण लिया जा रहा है।
अभी तक किसी को नहीं मिला मुआवजा
आवेदन करने वाले 19 लोगों की कोरोना जांच रिपोर्ट अमेठी, सुल्तानपुर और प्रयागराज जिले की लगी हुई है। इसलिए इन जिलों से रिपोर्ट आने के बाद ही शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। यही वजह है कि अभी तक जिले में किसी को भी मुआवजा नहीं मिला है।
मृतक आश्रितों को नहीं मिली नौकरी
कोरोना संक्रमित कर्मचारियों और शिक्षकों की मौत के बाद अभी तक मृतक आश्रितों को नौकरी नहीं दी गई है। बेसिक शिक्षा विभाग में मात्र एक कर्मचारी की मौत पर उसकी पत्नी को अनुचर के पद पर तैनाती दी गई है। अन्य विभागों में कागजी कोरम पूरे किए जा रहे हैं।
मृतक आ श्रितों के जो आवेदन आए हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने 11 आवेदन पत्रों में संलग्न कोविड-19 की रिपोर्ट को संदिग्ध बताया है। इससे उनका आवेदन निरस्त कर फिर से सत्यापन कराया जा रहा है।
रविशंकर द्विवेदी, डीपीआरओ
चपरासी की नौकरी करने के लिए तैयार नहीं हैं आश्रित
लिपिक के पद खाली नहीं होने से बढ़ी मुसीबत
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कोरोना से सबसे अधिक बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की मौत हुई थी। दिवंगत शिक्षकों के अधिकांश परिजन ऐसे हैं, जो शिक्षक बनने की पात्रता नहीं रखते हैं। विभाग में लिपिक के पद खाली नहीं हैं। ऐसे में विभागीय अधिकारी चपरासी की नौकरी देना चाहते हैं, मगर आश्रित चपरासी की नौकरी करने के लिए तैयार नहीं हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग में सबसे अधिक 38 शिक्षकों और कर्मचारियों की पंचायत चुनाव के दौरान कोरोना की चपेट में आने से मौत हो गई। शासन ने सभी के परिवारों के आश्रितों को नौकरी देने को कहा है। मगर आलम यह है कि जिस पद पर वह नौकरी करना चाहते हैं, वह जिले में खाली नहीं है। चपरासी के पद रिक्त हैं, लेकिन उस पर आश्रित कार्य करने के लिए तैयार नहीं है। दरअसल, शिक्षक की मौत के बाद इसी पद पर नियुक्ति के लिए आश्रित के पास संबंधित योग्यता होनी चाहिए। उसे शिक्षक भर्ती के सभी मानकों को पूरा करना होगा। स्नातक पढ़ाई के साथ डीएलएड और टीईटी की परीक्षा पास होना चाहिए। अधिकांश शिक्षकों की मौत के बाद पत्नियों ने आश्रित के रूप में नौकरी के लिए आवेदन किया है। उनके पास शिक्षक बनने की योग्यता नहीं है। वे लिपिक का पद चाहती हैं, मगर जिले में लिपिक के पद खाली नहीं हैं। चपरासी के पद खाली है, लेकिन आश्रित उस पर नौकरी करने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐेसे में विभागीय अधिकारियों की परेशानी बढ़ गई है।
वर्जन-------
जिले में लिपिक के पद खाली नहीं हैं। अनुचर पद पर एक महिला कर्मचारी को आश्रित के रूप में तैनाती दी गई है। जो आवेदन बचे हुए हैं, उसे शासन के पास भेज दिया गया है।
अशोक कुमार सिंह, बीएसए