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एमएसपी पर गेहूं खरीदने के जतन किए तमाम, फिर भी खाली रह गए सरकारी गोदाििििमि
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सरकार की एमएसपी इस बार किसानों को लुभा नहीं सकी। आढ़तियों ने किसानों का गेहूं खरीद करके भंडार कर लिया। इसकी वजह से सरकारी गोदाम खाली रह गए। इस बार एमएसपी से अधिक मूल्य पर मंडियों में गेहूं बिका। इससे किसानों ने क्रय केंद्रों की तरफ नहीं देखा। आढ़तियों से तत्काल भुगतान हासिल कर लिया। क्रय केंद्रों पर लक्ष्य की आधी खरीद भी नहीं हो सकी। लक्ष्य के सापेक्ष महज 9 फीसदी ही गेहूं खरीदा जा सका है। अब खरीद बंद होने में महज तीन दिन बाकी हैं। केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है।
जिले में गेहूं खरीदने के लिए पांच क्रय एजेंसियां नामित की गई थी। इन एजेंसियों के 44 केंद्रों का निर्धारण जिलाधिकारी ने स्वीकृत किए थे। इनके माध्यम से जिले के किसानों का गेहूं की खरीदा जा रहा है। इस बार जिले को 43 हजार एमटी खरीद का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए सरकार ने एमएसपी तय कर दी। इस बार गेहूं की डिमांड अधिक होने के चलते एमएसपी से अधिक मूल्य पर शुरुआत से ही जिले में गेेहूं बिकता रहा।
किसानों को मंडियों में अधिक रेट मिलने का ही नतीजा है कि वह क्रय केंद्रों की तरफ जाने से कतराते रहे। इसका फायदा आढ़तियों को मिला। इन लोगों ने किसानों से सीधे संपर्क करके महंगे रेट पर गेहूं खरीद कर गोदाम भर लिए। किसानों को तत्काल भुगतान कर दिया। इससे किसानों को महंगे रेट पर अपनी फसल बेचने का मौका मिला।
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सरकारी सिस्टम की तमाम दुश्वारियों से उन्हें निजात मिल गई। इधर इसका सीधा असर सरकारी खरीद पर पड़ा। आंकड़ों के अनुसार 43 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष रविवार तक मात्र 3500 एमटी ही गेहूं खरीदा जा सका है। यह लक्ष्य के सापेक्ष महज 9 फीसदी है।
प्रशासन के तमाम जतन रहे फेल
इस बार जिले में 1088 किसानों से गेहूं खरीदा गया है। लक्ष्य पूर्ण करने के लिए खाद्य व विपणन विभाग ने तमाम जतन किए। इसके लिए मोबाइल खरीद की व्यवस्था की गई। अफसरों को जिम्मेदारी दी गई। किसानों को जागरूक किया गया। केंद्रों पर बैठकें की गई। किसानों के घर जाकर उनको केंद्र पर गेहूं लाने व भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था की जानकारी दी गई पर किसानों ने क्रय केंद्रों की ओर रुख नहीं किया। इसका प्रमुख कारण बिना किसी पचड़े के एमएसपी से अधिक दर पर मंडी में गेहूं खरीदा जाना है। कुछ व्यापारियों ने गांवों में जाकर किसानों से खरीद की। इससे उन्हें दोहरा लाभ हुआ। समय और भाड़े की धनराशि भी बच गई।
एजेंसीवार गेहूं खरीद का विवरण
एजेंसी लक्ष्य खरीदा गेहूं
खाद्य विभाग 23000 एमटी 1950 एमटी
पीसीएफ 20000 एमटी 1550 एमटी
जिले में गेहूं खरीदने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे है। किसानों को जानकारी देकर उनको भुगतान कराया जा रहा है। लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 9 फीसदी खरीद हो सकी है। अजीत तिवारी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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जिले में गेहूं खरीदने के लिए पांच क्रय एजेंसियां नामित की गई थी। इन एजेंसियों के 44 केंद्रों का निर्धारण जिलाधिकारी ने स्वीकृत किए थे। इनके माध्यम से जिले के किसानों का गेहूं की खरीदा जा रहा है। इस बार जिले को 43 हजार एमटी खरीद का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए सरकार ने एमएसपी तय कर दी। इस बार गेहूं की डिमांड अधिक होने के चलते एमएसपी से अधिक मूल्य पर शुरुआत से ही जिले में गेेहूं बिकता रहा।
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किसानों को मंडियों में अधिक रेट मिलने का ही नतीजा है कि वह क्रय केंद्रों की तरफ जाने से कतराते रहे। इसका फायदा आढ़तियों को मिला। इन लोगों ने किसानों से सीधे संपर्क करके महंगे रेट पर गेहूं खरीद कर गोदाम भर लिए। किसानों को तत्काल भुगतान कर दिया। इससे किसानों को महंगे रेट पर अपनी फसल बेचने का मौका मिला।
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सरकारी सिस्टम की तमाम दुश्वारियों से उन्हें निजात मिल गई। इधर इसका सीधा असर सरकारी खरीद पर पड़ा। आंकड़ों के अनुसार 43 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष रविवार तक मात्र 3500 एमटी ही गेहूं खरीदा जा सका है। यह लक्ष्य के सापेक्ष महज 9 फीसदी है।
प्रशासन के तमाम जतन रहे फेल
इस बार जिले में 1088 किसानों से गेहूं खरीदा गया है। लक्ष्य पूर्ण करने के लिए खाद्य व विपणन विभाग ने तमाम जतन किए। इसके लिए मोबाइल खरीद की व्यवस्था की गई। अफसरों को जिम्मेदारी दी गई। किसानों को जागरूक किया गया। केंद्रों पर बैठकें की गई। किसानों के घर जाकर उनको केंद्र पर गेहूं लाने व भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था की जानकारी दी गई पर किसानों ने क्रय केंद्रों की ओर रुख नहीं किया। इसका प्रमुख कारण बिना किसी पचड़े के एमएसपी से अधिक दर पर मंडी में गेहूं खरीदा जाना है। कुछ व्यापारियों ने गांवों में जाकर किसानों से खरीद की। इससे उन्हें दोहरा लाभ हुआ। समय और भाड़े की धनराशि भी बच गई।
एजेंसीवार गेहूं खरीद का विवरण
एजेंसी लक्ष्य खरीदा गेहूं
खाद्य विभाग 23000 एमटी 1950 एमटी
पीसीएफ 20000 एमटी 1550 एमटी
जिले में गेहूं खरीदने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे है। किसानों को जानकारी देकर उनको भुगतान कराया जा रहा है। लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 9 फीसदी खरीद हो सकी है। अजीत तिवारी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी