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Pratapgarh News: धूल व धुएं के गुबार से खराब हो रही आबोहवा
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रखहा के दीवानगंज बाजार के समीप रोड किनारे फेंका गया कूड़ा। संवाद
जनपद में पेड़ों की कटाई, निर्माण स्थलों और जर्जर सड़कों से उठने वाली धूल, धुएं के गुबार से शहर की आबोहवा खराब हो रही है। सोमवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का स्तर 154 से 177 के बीच रहा। जो हवा की खराब क्वालिटी को दर्शाता है। इससे शहर की आबोहवा खराब हो रही है। बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
शहर के जोगापुर से लेकर चिलबिला तक शाम होने के बाद धुएं व धूल के गुबार से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजहों में शहरी क्षेत्र में लगातार हो रहे निर्माण कार्य, धूल, पेड़ों की कटाई है।
पर्यावरण प्रेमी बोले
जिले में वायु प्रदूषण का स्तर चिंताजनक है। सोमवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक दिन भर 154 से 177 के बीच बना रहा। जो अस्वस्थ श्रेणी में आता है। इस स्तर की हवा सभी लोगों के लिए नुकसानदायक है। - सुंदरम तिवारी, पर्यावरण प्रेमी
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भारतीय वन सर्वेक्षण के अनुसार, प्रतापगढ़ में हरियाली का दायरा बढ़ा है लेकिन औद्योगिक कचरे, वाहनों और प्लास्टिक कचरे को जलाए जाने से आबोहवा खराब हुई है। इसमें सुधार के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए। - अजय क्रांतिकारी, पर्यावरण प्रेमी
अक्तूबर माह में तापमान में गिरावट आई है। ठंड का अहसास होने लगा है। ग्रामीण इलाकों में धुंध भी देखी जा रही है। धूल व धुएं के गुबार से भी वायु गुणवत्ता के स्तर में गिरावट आई है। - देशराज मीना, मौसम वैज्ञानिक सनई अनुसंधान केंद्र।
जनपद में पांच दिनों का एक्यूआई स्तर
22 अक्तूबर - 126 से 131 के बीच।
23 अक्तूबर - 153 से 167 के बीच।
24 अक्तूबर - 152 से 167 के बीच।
25 अक्तूबर - 177 से 188 के बीच।
26 अक्तूबर - 154 से 177 के बीच।
( आंकड़े प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार)
वायु गुणवत्ता सूचकांक की श्रेणी
- 0-50 अच्छा
- 51-100 संतोषजनक मध्यम
- 101-200 अस्वस्थ
- 201-300 खराब
- 301-400 बहुत खराब
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शहर के जोगापुर से लेकर चिलबिला तक शाम होने के बाद धुएं व धूल के गुबार से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजहों में शहरी क्षेत्र में लगातार हो रहे निर्माण कार्य, धूल, पेड़ों की कटाई है।
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पर्यावरण प्रेमी बोले
जिले में वायु प्रदूषण का स्तर चिंताजनक है। सोमवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक दिन भर 154 से 177 के बीच बना रहा। जो अस्वस्थ श्रेणी में आता है। इस स्तर की हवा सभी लोगों के लिए नुकसानदायक है। - सुंदरम तिवारी, पर्यावरण प्रेमी
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भारतीय वन सर्वेक्षण के अनुसार, प्रतापगढ़ में हरियाली का दायरा बढ़ा है लेकिन औद्योगिक कचरे, वाहनों और प्लास्टिक कचरे को जलाए जाने से आबोहवा खराब हुई है। इसमें सुधार के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए। - अजय क्रांतिकारी, पर्यावरण प्रेमी
अक्तूबर माह में तापमान में गिरावट आई है। ठंड का अहसास होने लगा है। ग्रामीण इलाकों में धुंध भी देखी जा रही है। धूल व धुएं के गुबार से भी वायु गुणवत्ता के स्तर में गिरावट आई है। - देशराज मीना, मौसम वैज्ञानिक सनई अनुसंधान केंद्र।
जनपद में पांच दिनों का एक्यूआई स्तर
22 अक्तूबर - 126 से 131 के बीच।
23 अक्तूबर - 153 से 167 के बीच।
24 अक्तूबर - 152 से 167 के बीच।
25 अक्तूबर - 177 से 188 के बीच।
26 अक्तूबर - 154 से 177 के बीच।
( आंकड़े प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार)
वायु गुणवत्ता सूचकांक की श्रेणी
- 0-50 अच्छा
- 51-100 संतोषजनक मध्यम
- 101-200 अस्वस्थ
- 201-300 खराब
- 301-400 बहुत खराब

रखहा के दीवानगंज बाजार के समीप रोड किनारे फेंका गया कूड़ा। संवाद

रखहा के दीवानगंज बाजार के समीप रोड किनारे फेंका गया कूड़ा। संवाद