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जेब खंगालने के साथ सेहत बिगाड़ने की तैयारी

Sat, 22 Oct 2016 11:57 PM IST
प्रतापगढ़
प्रतापगढ़ Updated Sat, 22 Oct 2016 11:57 PM IST
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adulteration starts as deepawali comes near
मिठाई
दीपावली पर मुनाफाखोरों ने मिलावट के जरिए करोड़ों कमाने की तैयारी कर ली है। मिठाई, खोवा के साथ अन्य खाद्य सामाग्रियों में बड़े पैमाने पर मिलावट का खेल शुरू है। इस बार कारोबारियों ने मिठाई और खोवा डंप करने के लिए गोदाम शहर में नहीं बल्कि दूर ग्रामीण इलाके में बना लिया है। जिससे छापामारी करने वालों को खबर न हो सके। ऐसे मे खाद्य सामग्रियों की खरीद के समय सतर्क रहने की जरूरत है। थोड़ी सी चूक जेब तो काटेगी ही, सेहत भी बिगाड़ सकती है।
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दीपावली करीब आने के साथ खोवा का भाव बढ़ता जा रहा है। अब तक 150 से 200 रुपये के बीच बिकने वाला खोवा अचानक 250 से तीन सौ रुपये किलो बिकने लगा है। दरअसल दिवाली पर मिठाइयां बनाने के लिए खोवा डंप करने के कारण अचानक भाव आसमान पर चढ़ गए हैं। दुकानदार ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावटी खोवा, सरसों का तेल व मिलावटी चीनी की मिठाई शहर से दूर ग्रामीण इलाके में बने गोदामों में डंप कर रहे हैं। कटरामेदनीगंज, भगवतगंज, और लालगंज में चीनी वाली मिठाई का कारोबार लाखों रुपये का दीपावली पर होता है। रानीगंज, मानधाता और कुंडा में शकरकंद, आलू, मैदा के साथ केमिकल डालकर खोवा तैयार किया जा रहा है। बड़े व्यापारी सस्ते दाम पर खरीदकर ग्रामीण इलाके में बने गोदामों में डंप कर रहे हैं।
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दुग्ध उत्पादन विभाग की मानी जाए तो जिले में हर दिन करीब  5 से 6 लाख लीटर दूध की खपत है, लेकिन मांग दोगुनी हो गई है। दूध की कमी के चलते सॉलिड नॉट फैक्ट (एसएनएफ) की मिलावट की जा रही है। बीते वर्ष फूड विभाग ने शहर के साथ ग्रामीणांचल के बाजारों में छापामारी करके करोड़ों रुपये की खोवा वाली मिठाई, लाखों रुपये के चीनी के  खिलौने वाली मिठाई और लड्डू नष्ट कराया था। इस बार मतदाता जागरूकता अभियान में भी फूड विभाग के अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी गई है। इसके चलते वे छापामारी नहीं कर पा रहे हैं। सुबह-शाम शहर के आसपास वाले बाजारों में एक दो स्थानों पर महज छापामारी कर रहे हैं। अभिहित अधिकारी डा. दीनानाथ यादव ने बताया कि मिलावटी खोवा डंप किया जा रहा है।
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मुनाफाखोर कुछ इस तरह करते हैं खाद्य पदा‌र्थों में मिलावट
- खोवा और मिठाई में मैदा, आलू, शकरकंद जैसी खाद्य सामाग्रियों के साथ केमिकल मिलाए जा रहे हैं। आम उपभोक्ता इसे आसानी से नहीं पकड़ पाते हैं।
दूध को फटने से बचाने और उसे चार-पांच दिनों तक डम्प रखने के लिए उसमें खाने वाला सोडा, डिटर्जेंट, यूरिया, हाईड्रोजन-पर-ऑक्साइड और फार्मेलिन मिलाई जाती है।
- खोवा और मिठाई को ताजा रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज में रखा जाता है। जबकि 15 दिनों के बाद खोवा सड़ने लगता है। कोल्ड स्टोरेज से बाहर आने पर अगर 24 घंटे के भीतर खोवा का इस्तेमाल नहीं किया गया तो वह जहरीला हो जाता है।

नकली खोवे की इस तरह करें जांच
- थोड़ा सा खोवा पानी में उबालकर ठंडा करें। फिर उसमें दो-तीन बूंद आयोडिन सॉल्यूशन डाल दें। अगर खोवा का रंग नीला हो जाता है तो उसमें स्टार्च मिला हुआ है। आयोडिन सॉल्यूशन मेडिकल स्टोर, विज्ञान उपकरणों की दुकान या प्रयोगशालाओं में मिल जाता है।

- चुटकी भर खोवा लेकर उसे उंगलियों से दो मिनट तक मसलें। खोवा की छोटी सी गोली बन जाएगी यदि उंगलियों की गंदगी खोवा में उतर आई तो मिलावट नहीं। गोली नहीं बनी और खोवा चूर-चूर होकर बिखर जाए तो मिलावट है।
- पांच मिली ग्राम सल्फ्यूरिक एसिड को एक चम्मच खोवा में मिला लें। अगर रंग गुलाबी हो जाता है तो उसमें कोलतार का रंग मिला हुआ है।
खोवे का रंग एकदम सफेद नहीं होना चाहिए बल्कि उसमें थोड़ा पीलापन होना चाहिए। यदि ऐसा है तो उसमें मिलावट की संभावना कम हो जाती है।
 
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