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अद-भाजपा को जीत पर, पांच माह में ही घट गए 14.14 प्रतिशत मत
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election
प्रतापगढ़ सदर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा-अपना दल एस गठबंधन ने भले ही भारी जीत हासिल की हो, लेकिन पांच माह के भीतर ही वोट प्रतिशत 14.14 प्रतिशत कम हो गया है। लोकसभा चुनाव के मुकाबले सदर में भाजपा व अद प्रत्याशी को 14.14 प्रतिशत मत कम मिले।
सपा और बसपा के जनाधार में भी कमी आई है। उपचुनाव में केवल चौथे नंबर पर रही कांग्रेस के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लोकसभा चुनाव के मुकाबले उसे 10 प्रतिशत अधिक वोट मिले हैं।
लोकसभा चुनाव के लिए मई में मतदान हुआ था। चुनाव में भाजपा-अद ने संयुक्त प्रत्याशी के रूप में संगमलाल गुप्ता को मैदान में उतारा था। जबकि सपा-बसपा से संयुक्त प्रत्याशी अशोक त्रिपाठी मैदान में थे। कांग्रेस ने पूर्व सांसद रत्ना सिंह पर भरोसा जताया था। लोकसभा चुनाव में सदर विधानसभा में कुल 334222 मतदाता थे और 184313 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
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चुनाव में भाजपा व अद प्रत्याशी संगमलाल गुप्ता को 91490 मत मिले। उन्हें करीब 49.63 फीसदी वोट मिले थे। पांच माह बाद सदर विधानसभा का उपचुनाव हुआ। जिसमें कुल मतदाता 336407 थे और चुनाव में 149184 लोगों ने मतदान किया था। उपचुनाव में अद-भाजपा के संयुक्त प्रत्याशी राजकुमार पाल को 52949 मत मिले। यह कुल मतों का करीब 35.49 फीसदी है। लोकसभा चुनाव में मिले मतों के हिसाब से उपचुनाव में भाजपा-अद को 14.14 प्रतिशत कम वोट मिले।
इसी तरह लोकसभा में सपा-बसपा के प्रत्याशी अशोक त्रिपाठी को 69683 मत मिले जो मतदान का 37.80 प्रतिशत रहा। उपचुनाव में सपा व बसपा अलग-अलग मैदान में उतरीं। फिर भी भाजपा-अद प्रत्याशी को मिले मतों से काफी पीछे रहे। सपा प्रत्याशी बृजेश पटेल को 23228 मत मिले। जो कुल मतों का 15.57 फीसदी है।
बसपा प्रत्याशी रणजीत सिंह पटेल को 19000 यानि 12.73 फीसदी वोट मिले। बसपा भी अद व भाजपा के संयुक्त प्रत्याशी को मिले मतों से काफी दूर रही। कांग्रेस की रत्ना सिंह को लोकसभा चुनाव में सदर में 6884 मत मिले थे। यह केवल 3.73 प्रतिशत रहा। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी नीरज त्रिपाठी के जोश ने मतों का प्रतिशत बढ़ा दिया। नीरज को 19715 मत मिले। यह लोकसभा चुनाव में मिले मतों से 10 फीसदी अधिक है।
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सपा और बसपा के जनाधार में भी कमी आई है। उपचुनाव में केवल चौथे नंबर पर रही कांग्रेस के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लोकसभा चुनाव के मुकाबले उसे 10 प्रतिशत अधिक वोट मिले हैं।
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लोकसभा चुनाव के लिए मई में मतदान हुआ था। चुनाव में भाजपा-अद ने संयुक्त प्रत्याशी के रूप में संगमलाल गुप्ता को मैदान में उतारा था। जबकि सपा-बसपा से संयुक्त प्रत्याशी अशोक त्रिपाठी मैदान में थे। कांग्रेस ने पूर्व सांसद रत्ना सिंह पर भरोसा जताया था। लोकसभा चुनाव में सदर विधानसभा में कुल 334222 मतदाता थे और 184313 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
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चुनाव में भाजपा व अद प्रत्याशी संगमलाल गुप्ता को 91490 मत मिले। उन्हें करीब 49.63 फीसदी वोट मिले थे। पांच माह बाद सदर विधानसभा का उपचुनाव हुआ। जिसमें कुल मतदाता 336407 थे और चुनाव में 149184 लोगों ने मतदान किया था। उपचुनाव में अद-भाजपा के संयुक्त प्रत्याशी राजकुमार पाल को 52949 मत मिले। यह कुल मतों का करीब 35.49 फीसदी है। लोकसभा चुनाव में मिले मतों के हिसाब से उपचुनाव में भाजपा-अद को 14.14 प्रतिशत कम वोट मिले।
इसी तरह लोकसभा में सपा-बसपा के प्रत्याशी अशोक त्रिपाठी को 69683 मत मिले जो मतदान का 37.80 प्रतिशत रहा। उपचुनाव में सपा व बसपा अलग-अलग मैदान में उतरीं। फिर भी भाजपा-अद प्रत्याशी को मिले मतों से काफी पीछे रहे। सपा प्रत्याशी बृजेश पटेल को 23228 मत मिले। जो कुल मतों का 15.57 फीसदी है।
बसपा प्रत्याशी रणजीत सिंह पटेल को 19000 यानि 12.73 फीसदी वोट मिले। बसपा भी अद व भाजपा के संयुक्त प्रत्याशी को मिले मतों से काफी दूर रही। कांग्रेस की रत्ना सिंह को लोकसभा चुनाव में सदर में 6884 मत मिले थे। यह केवल 3.73 प्रतिशत रहा। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी नीरज त्रिपाठी के जोश ने मतों का प्रतिशत बढ़ा दिया। नीरज को 19715 मत मिले। यह लोकसभा चुनाव में मिले मतों से 10 फीसदी अधिक है।