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मोदी विरोध का दिखावा कर रहीं मायावती : प्रमोद
Pratapgarh
Updated Sat, 26 Apr 2014 05:30 AM IST
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प्रतापगढ़। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा है कि बसपा सुप्रीमो मायावती का नरेंद्र मोदी विरोध महज दिखावा है। मौका मिलने पर वह फिर भाजपा नीत एनडीए सरकार का समर्थन करेंगी। पहले भी वह ऐसा कर चुकी हैं। यही नहीं भाजपा के उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार भी किया है।
प्रमोद ने शुक्रवार को सांसद रत्ना सिंह के चुनाव कार्यालय में पत्रकारों से कहा कि प्रतापगढ़ की सभा में इतनी कम भीड़ होना इस बात का संकेत है कि जनता का बसपा से मोह भंग हो चुका है। यह बात मायावती भी जान चुकी हैं। इसीलिए उन्होंने पार्टी प्रत्याशी को मंच पर अपने सामने बोलने का मौका नहीं दिया। आज मायावती मुसलमानों को नरेंद्र मोदी का भय दिखा रही हैं मगर वर्ष 2010 में मेरठ की एक जनसभा में उन्होंने मुसलिमों को कट्टरपंथी बताते हुए कहा था कि उन्होंने अपना वोट भाजपा के पक्ष में ट्रांसफर करा दिया था। इस भाषण का वीडीओ आज भी उनके पास मौजूद है। यही नहीं गोधरा कांड के तत्काल बाद गुजरात में जब चुनाव हुआ तो वह भाजपा के पक्ष में उन सीटों पर प्रचार करने गई थीं जहां उनके प्रत्याशी नहीं लड़ रहे थे। तब उन्हें गोधरा कांड क्यों नहीं याद रहा। उनका यह कहना कि वह ‘बैलेंस आफ पावर’ बनकर उभरना चाहती हैं, इस बात का संकेत है कि उन्हें आभास हो गया है कि वह केंद्र में सरकार नहीं बना सकेंगी। इसलिए वोट देने से पहले जनता को सोचना होगा। लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के ही बीच है। बसपा, सपा और वामपंथी पार्टियों ने भाजपा को सरकार बनाने में सहयोग किया या फिर उनसे सहयोग लेकर सरकार बनाई। मगर कांग्रेस ने कभी न तो समर्थन किया और न ही समर्थन दिया। भाजपा तोड़ने वाली पार्टी है जबकि कांग्रेस का विश्वास जोड़ने में है।
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प्रमोद ने शुक्रवार को सांसद रत्ना सिंह के चुनाव कार्यालय में पत्रकारों से कहा कि प्रतापगढ़ की सभा में इतनी कम भीड़ होना इस बात का संकेत है कि जनता का बसपा से मोह भंग हो चुका है। यह बात मायावती भी जान चुकी हैं। इसीलिए उन्होंने पार्टी प्रत्याशी को मंच पर अपने सामने बोलने का मौका नहीं दिया। आज मायावती मुसलमानों को नरेंद्र मोदी का भय दिखा रही हैं मगर वर्ष 2010 में मेरठ की एक जनसभा में उन्होंने मुसलिमों को कट्टरपंथी बताते हुए कहा था कि उन्होंने अपना वोट भाजपा के पक्ष में ट्रांसफर करा दिया था। इस भाषण का वीडीओ आज भी उनके पास मौजूद है। यही नहीं गोधरा कांड के तत्काल बाद गुजरात में जब चुनाव हुआ तो वह भाजपा के पक्ष में उन सीटों पर प्रचार करने गई थीं जहां उनके प्रत्याशी नहीं लड़ रहे थे। तब उन्हें गोधरा कांड क्यों नहीं याद रहा। उनका यह कहना कि वह ‘बैलेंस आफ पावर’ बनकर उभरना चाहती हैं, इस बात का संकेत है कि उन्हें आभास हो गया है कि वह केंद्र में सरकार नहीं बना सकेंगी। इसलिए वोट देने से पहले जनता को सोचना होगा। लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के ही बीच है। बसपा, सपा और वामपंथी पार्टियों ने भाजपा को सरकार बनाने में सहयोग किया या फिर उनसे सहयोग लेकर सरकार बनाई। मगर कांग्रेस ने कभी न तो समर्थन किया और न ही समर्थन दिया। भाजपा तोड़ने वाली पार्टी है जबकि कांग्रेस का विश्वास जोड़ने में है।
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