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गौरैया के लुप्त होने से बढ़ा पर्यावरण का खतरा

Tue, 12 Nov 2013 05:39 AM IST
Pratapgarh
Pratapgarh Updated Tue, 12 Nov 2013 05:39 AM IST
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मिशन गौरेया के संस्थापक प्रकाश विजय ने कहा है कि गौरैया के लुप्त होने से पर्यावरण को खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने वातावरण से विकार और प्रदूषण दूर करने के लिए प्राचीन परंपराओं को अपनाने की बात कही। वह मंगलवार को साकेत गर्ल्स डिग्री कालेज में आयोजित गोष्ठी में बोल रहे थे।
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कालेज प्रशासन और बालिकाओं को पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौध रोपित करने का संकल्प दिलाते हुए पर्यावरण संतुलन जैव विविधता का योगदान बताया। उन्होंने कहा कि गोबर में रहने वाला कीड़ा जमीन को उपजाऊ बनाता है और पक्षी फलों के बीजों को इधर-उधर कर जंगल का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से गौरैया और अनेक पक्षी लुप्त हो गए हैं। कालेज की प्रिंसिपल डा. नीलिमा श्रीवास्तव ने बालिकाओं से घर के आंगन में बर्तन में पानी रखने और अनाज के दाने बिखेरने का आह्वान किया। गोष्ठी को डा. एके शर्मा, रवींद्र त्रिपाठी, आशीष मिश्र, छाया सिंह ने पर्यावरण संतुलन के लिए उपाय सुझाए। कालेज की बालिकाओं ने आगंतुकों का स्वागत किया। इस मौके पर कुसुम शुक्ला, शिवा शुक्ला, अनन्त प्रकाश शुक्ल, परमजीत सिंह, अनीता पांडेय, सरिता सिंह, अंजू मिश्रा, विनीता सिंह, बलराम, संतोष कुमार मिश्र आदि मौजूद रहे।
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