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हिरासत के दौरान कोतवाली में मौत
Pratapgarh
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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प्रतापगढ़। नगर कोतवाली अंतर्गत भुपियामऊ गांव में अधिवक्ता के घर घुसे चोरों ने 40 हजार रुपयों समेत दो लाख के जेवर पार कर दिए। खटपट होने पर घर के लोग जाग गए और चोरों को दौड़ा लिया। भागते समय एक चोर हत्थे चढ़ गया। इसके बाद भीड़ ने उसे पीटकर बेदम करने के बाद पुलिस को सौंप दिया। पांच घंटे तक आरोपी कोतवाली में तड़पता रहा और अंतत: उसने दम तोड़ दिया।
नगर कोतवाली अंतर्गत कटरा मेदनीगंज में कंजड़ों ने डेरा जमा रखा था। यह सभी शंकरगढ़ इलाहाबाद के निवासी थे। इन्हीं में से तीन शातिर रविवार रात भुपियामऊ निवासी अधिवक्ता मयंक सिंह के घर में घुस गए। वे आलमारी आदि तोड़कर चोरी कर रहे थे कि घर के लोग जग गए और शोर मचाने लगे। इस पर चोरों ने उन्हें लोहे के हथियार से मारने का प्रयास किया। तभी गांव के लोग पहुंच गए। मौका पाकर दो लोग तो 40 हजार रुपये और दो लाख रुपये का जेवर लेकर भाग निकले लेकिन 30 वर्षीय एक चोर ग्रामीणों के चंगुल में फंस गया। लोगों ने उसकी जमकर पिटाई कर दी। इससे वह मरणासन्न हो गया। सूचना पर भुपियामऊ चौकी के सिपाही राजेंद्र सिंह सहित दो लोग मौके पर पहुंचे और घायल चोर को हिरासत में लेने के बाद कोतवाली ले आए। सुबह करीब दस बजे जब आरोपी को लेकर पुलिस अस्पताल पहुंची, तो डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
इधर घटना के बाद पुलिस कंजड़ों के डेरे पर गई लेकिन वहां से सभी भाग चुके थे। दोपहर बाद युवक की मौत की सूचना पर कंजड़ों के घर की कुछ महिलाएं कोतवाली पहुंचीं लेकिन वे कुछ ही देर में गायब हो गईं। चोर की मौत से एक बार फिर पुलिस पर सवालिया निशान लग गए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि घायल चोरघटना के बाद पुलिस की कस्टडी में जिंदा था लेकिन समय से उसका इलाज नहीं कराया गया। इससे उसकी मौत हो गई। रात दो बजे की घटना और सुबह 9.50 बजे सिपाही के साथ अस्पताल लाया जाना संदेह के घेरे में है। शाम तक शव का अंतिम संस्कार नहीं हो सका था। सीओ सिटी शिवाजी शुक्ला ने बताया कि पब्लिक की पिटाई से चोर को काफी चोटें आई थीं। इससे उसकी मौत हो गई है।
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भुपियामऊ में चोरी के दौरान एक साथी के पकड़े जाने के बाद रात में ही कटरा में डेरा डाले कंजड़ भाग निकले। मारपीट के दौरान पकड़े गए चोर ने सिर्फ इतना बताया कि उसका डेरा कटरा में है और वह शंकरगढ़ का निवासी है। पुलिस भोर में यहां पहुंची तो डेरा जमाये कंजड़ों का अता पता नहीं था। वे कितनी जल्दी और किस वाहन से भाग निकले किसी को पता नहीं चला।
भुपियामऊ गांव में चोरी करने पहुंचे कंजड़ खतरनाक हथियार लेकर आए थे। वे बावरिया गिरोह जैसी वारदात कर सकते थे। घटना के दौरान अधिवक्ता मयंक को एक चोर ने धारदार हथियार लेकर दौड़ा लिया। तभी सामने से एक व्यक्ति के राइफल लेकर आ जाने से वह भाग निकला। पुलिस ने मौके से कई धारदार हथियार बरामद भी किए हैं। इसके अलावा मयंक सिंह का घर गांव के बीच में है। इसकी वजह से घेराबंदी हो गई।
चोरी के दौरान हत्थे चढ़े बदमाश का शव लेने उसके परिजन नहीं आए। एक बार उनके कोतवाली आने की भनक मिली लेकिन मौत की बात जानने के बाद वे भाग निकले। पुलिस पोस्टमार्टम के बाद परिजनाें का इंतजार करने लगी लेकिन उसे निराश होना पड़ा। इसी कारण शाम तक शव का अंतिम संस्कार नहीं कराया जा सका।
कोतवाली में दर्ज मयंक की एफआईआर में पुलिस को जिंदा हालत में चोर सौंपने की बात कही गई है। एफआईआर में यह भी लिखा गया है कि मयंक सिपाही के साथ चोर को लेकर अस्पताल गए। अगर पुलिस की कहानी पर विश्वास किया जाय तो उसे भोर में ही अस्पताल पहुंच जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अस्पताल के रजिस्टर में उसके सुबह 9.50 बजे मृत हालत में अस्पताल पहुंचने की बात दर्ज है। सवाल उठता है कि घटना के बाद से इतने समय तक चोर को अस्पताल क्यों नहीं पहुंचाया गया। मृतक के परिजन सामने आए और सवाल उठाया तो खाकी को जवाब देना मुश्किल हो सकता है।
पकड़े गए चोर की मौत कहीं नहलाने से तो नहीं र्हुई। सूत्रों का कहना है कि पिटाई के दौरान चोर ने शौच कर दिया था। उसे साफ करने के लिए पुलिस ने मोटर चलाकर उसे नहलाया। इस दौरान ठंड लगने से उसने दम तोड़ दिया।
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नगर कोतवाली अंतर्गत कटरा मेदनीगंज में कंजड़ों ने डेरा जमा रखा था। यह सभी शंकरगढ़ इलाहाबाद के निवासी थे। इन्हीं में से तीन शातिर रविवार रात भुपियामऊ निवासी अधिवक्ता मयंक सिंह के घर में घुस गए। वे आलमारी आदि तोड़कर चोरी कर रहे थे कि घर के लोग जग गए और शोर मचाने लगे। इस पर चोरों ने उन्हें लोहे के हथियार से मारने का प्रयास किया। तभी गांव के लोग पहुंच गए। मौका पाकर दो लोग तो 40 हजार रुपये और दो लाख रुपये का जेवर लेकर भाग निकले लेकिन 30 वर्षीय एक चोर ग्रामीणों के चंगुल में फंस गया। लोगों ने उसकी जमकर पिटाई कर दी। इससे वह मरणासन्न हो गया। सूचना पर भुपियामऊ चौकी के सिपाही राजेंद्र सिंह सहित दो लोग मौके पर पहुंचे और घायल चोर को हिरासत में लेने के बाद कोतवाली ले आए। सुबह करीब दस बजे जब आरोपी को लेकर पुलिस अस्पताल पहुंची, तो डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
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इधर घटना के बाद पुलिस कंजड़ों के डेरे पर गई लेकिन वहां से सभी भाग चुके थे। दोपहर बाद युवक की मौत की सूचना पर कंजड़ों के घर की कुछ महिलाएं कोतवाली पहुंचीं लेकिन वे कुछ ही देर में गायब हो गईं। चोर की मौत से एक बार फिर पुलिस पर सवालिया निशान लग गए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि घायल चोरघटना के बाद पुलिस की कस्टडी में जिंदा था लेकिन समय से उसका इलाज नहीं कराया गया। इससे उसकी मौत हो गई। रात दो बजे की घटना और सुबह 9.50 बजे सिपाही के साथ अस्पताल लाया जाना संदेह के घेरे में है। शाम तक शव का अंतिम संस्कार नहीं हो सका था। सीओ सिटी शिवाजी शुक्ला ने बताया कि पब्लिक की पिटाई से चोर को काफी चोटें आई थीं। इससे उसकी मौत हो गई है।
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भुपियामऊ में चोरी के दौरान एक साथी के पकड़े जाने के बाद रात में ही कटरा में डेरा डाले कंजड़ भाग निकले। मारपीट के दौरान पकड़े गए चोर ने सिर्फ इतना बताया कि उसका डेरा कटरा में है और वह शंकरगढ़ का निवासी है। पुलिस भोर में यहां पहुंची तो डेरा जमाये कंजड़ों का अता पता नहीं था। वे कितनी जल्दी और किस वाहन से भाग निकले किसी को पता नहीं चला।
भुपियामऊ गांव में चोरी करने पहुंचे कंजड़ खतरनाक हथियार लेकर आए थे। वे बावरिया गिरोह जैसी वारदात कर सकते थे। घटना के दौरान अधिवक्ता मयंक को एक चोर ने धारदार हथियार लेकर दौड़ा लिया। तभी सामने से एक व्यक्ति के राइफल लेकर आ जाने से वह भाग निकला। पुलिस ने मौके से कई धारदार हथियार बरामद भी किए हैं। इसके अलावा मयंक सिंह का घर गांव के बीच में है। इसकी वजह से घेराबंदी हो गई।
चोरी के दौरान हत्थे चढ़े बदमाश का शव लेने उसके परिजन नहीं आए। एक बार उनके कोतवाली आने की भनक मिली लेकिन मौत की बात जानने के बाद वे भाग निकले। पुलिस पोस्टमार्टम के बाद परिजनाें का इंतजार करने लगी लेकिन उसे निराश होना पड़ा। इसी कारण शाम तक शव का अंतिम संस्कार नहीं कराया जा सका।
कोतवाली में दर्ज मयंक की एफआईआर में पुलिस को जिंदा हालत में चोर सौंपने की बात कही गई है। एफआईआर में यह भी लिखा गया है कि मयंक सिपाही के साथ चोर को लेकर अस्पताल गए। अगर पुलिस की कहानी पर विश्वास किया जाय तो उसे भोर में ही अस्पताल पहुंच जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अस्पताल के रजिस्टर में उसके सुबह 9.50 बजे मृत हालत में अस्पताल पहुंचने की बात दर्ज है। सवाल उठता है कि घटना के बाद से इतने समय तक चोर को अस्पताल क्यों नहीं पहुंचाया गया। मृतक के परिजन सामने आए और सवाल उठाया तो खाकी को जवाब देना मुश्किल हो सकता है।
पकड़े गए चोर की मौत कहीं नहलाने से तो नहीं र्हुई। सूत्रों का कहना है कि पिटाई के दौरान चोर ने शौच कर दिया था। उसे साफ करने के लिए पुलिस ने मोटर चलाकर उसे नहलाया। इस दौरान ठंड लगने से उसने दम तोड़ दिया।