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कोविड अस्पताल में 24 घंटे में 9 मरीजों ने तोड़ा दम
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प्रतापगढ़। कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए पुराने महिला अस्पताल में बने कोविड एल टू अस्पताल में अव्यवस्था के चलते मरीजों की सांसें उखड़ रही हैं। 24 घंटे के भीतर विकास विभाग के कर्मचारी और उसके बेटे समेत नौ लोगों की मौत हो गई। चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मचारियों की लापरवाही मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है।
कोविड एलटू अस्पताल अस्पताल कितने बेड का है, इसके बारे में बता पाना मुश्किल है। अफसर कभी सौ तो कभी 45 बेड के अस्पताल का दावा करते हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि यहां 20 बेड आईसीयू के हैं, जहां गंभीर मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जाता है। हालांकि अफसरों की यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है। जिले में मरीजों की स्थिति गंभीर देख उन्हें तत्काल प्रयागराज रेफर कर दिया जा रहा है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के उपचार के लिए अलग-अलग डॉक्टरों की तैनाती की गई है।
लेकिन कोविड अस्पताल में भर्ती संक्रमित मरीजों के इलाज में लापरवाही बरती जा रही है। अस्पताल में भर्ती मरीज के तीमारदारों के अनुसार वहां न तो समय पर दवाएं दी जा रही हैं और ना ही मरीजों की देखभाल की जा रही है। चिकित्सक स्वास्थ्य कर्मचारियों से जांच कराते हैं। वह खुद मरीजों की निगरानी करने के लिए वार्ड में नहीं जाते। सरकार की ओर से संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए जो दवाएं व इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं, उनका भी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। लापरवाही के चलते ही 24 घंटे के भीतर वार्ड में भर्ती सदर ब्लॉक में तैनात एडीओ एसटी सुरेश तिवारी व उनके बेटे दीपक तिवारी की मौत हो गई।
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इसके अलावा सात अन्य मरीजों ने भी दम तोड़ दिया। कोविड एल टू अस्पताल में अव्यवस्था का आलम यह है कि ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों की रिपोर्टिंग पर चिकित्सक अपने चेंबर से ही मरीजों को दवाएं देने के लिए बोल देते हैं। मरीजों के पास जाकर उनका बेहतर उपचार करना व उनकी पीड़ा जानने का प्रयास नहीं करते। जिसके चलते लगातार भर्ती मरीज दम तोड़ रहे हैं। इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अरविंद श्रीवास्तव का कहना है कि वार्ड में भर्ती मरीजों का बेहतर उपचार करने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायतें मिलने पर मैं स्वयं निरीक्षण करने जाता हूं।
आठ घंटे तक पड़ा रहा मरीज का शव
कोविड अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मचारी व डाक्टर किस तरह कर रहे हैं, इसका अंदाजा दो दिन पहले अस्पताल में भर्ती मरीज की मौत के बाद लगाया जा सकता है। अस्पताल में भर्ती मरीज की 8 घंटे पहले मौत हो गई। डाक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इस बीच परिवार का एक सदस्य पीपीई किट पहनकर मरीज को देखने पहुंचा। उसके चिल्लाने पर डॉक्टरों को जानकारी हो सकी। इसे लेकर काफी देर तक हंगामा हुआ। हालांकि कुछ देर बाद डाक्टर व स्वास्थ्य कर्मचारी पुराने ढर्रे पर ही काम करने लगे।
संक्रमित मरीजों की मौत का आंकड़ा छिपा रहा स्वास्थ्य विभाग
जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत के आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के अफसर छिपा रहे हैं। कोविड एल टू अस्पताल में में हर तीन से चार घंटे बाद एक मरीज की मौत हो जा रही है, मगर इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को नहीं दी जा रही है। फर्जी रिपोर्टिंग को भी स्वास्थ्य विभाग के अफसर आधार बना रहे हैं। ताकि कम से कम मौतों का आंकड़ा दिखा सकें।
मरीजों को ऑक्सीजन देने की नहीं है जानकारी
कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने जिन कर्मचारियों को तैनात किया है, उन्हें यह भी नहीं पता कि किस समय मरीजों को कितनी मात्रा में ऑक्सीजन देना जरूरी है। मरीज के तीमारदारों के अनुसार ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू करने के बाद न तो डॉक्टर और न ही स्वास्थ्य कर्मचारी चेक करने जाते हैं। यदि मरीज अधिक चीखते-चिल्लाते हैं तो उन्हें डांटकर खामोश करा दिया जाता है। परिवार के लोगों के वार्ड में जाने पर प्रतिबंध है। हालांकि इसके बाद भी बहुत से लोग पीपीई किट पहनकर प्रवेश कर जाते हैं, जिसके बाद उन्हें हकीकत का पता चलता है।
आला अधिकारी भी नहीं रखते नजर
कोविड एल टू अस्पताल में भर्ती मरीजों की सुविधाओं वह उनके इलाज की ओर जिले के आला अधिकारी भी ध्यान नहीं देते। केवल कागजों पर ही समीक्षा की जाती है। वार्ड में भर्ती मरीजों का इलाज व उनको मिल रहीं सुविधाओं का जायजा लेने के लिए अफसरों को फुर्सत नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के मुखिया भी कभी-कभार ही वार्ड में जाते हैं, मगर उनके पहुंचने से पहले ही वहां तैनात किए गए डॉक्टरों व कर्मचारियों को जानकारी हो जाती है। जिसके बाद व्यवस्थाएं दुरुस्त करा दी जाती हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही से लगातार मरीजों की मौत हो रही है।
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कोविड एलटू अस्पताल अस्पताल कितने बेड का है, इसके बारे में बता पाना मुश्किल है। अफसर कभी सौ तो कभी 45 बेड के अस्पताल का दावा करते हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि यहां 20 बेड आईसीयू के हैं, जहां गंभीर मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जाता है। हालांकि अफसरों की यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है। जिले में मरीजों की स्थिति गंभीर देख उन्हें तत्काल प्रयागराज रेफर कर दिया जा रहा है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के उपचार के लिए अलग-अलग डॉक्टरों की तैनाती की गई है।
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लेकिन कोविड अस्पताल में भर्ती संक्रमित मरीजों के इलाज में लापरवाही बरती जा रही है। अस्पताल में भर्ती मरीज के तीमारदारों के अनुसार वहां न तो समय पर दवाएं दी जा रही हैं और ना ही मरीजों की देखभाल की जा रही है। चिकित्सक स्वास्थ्य कर्मचारियों से जांच कराते हैं। वह खुद मरीजों की निगरानी करने के लिए वार्ड में नहीं जाते। सरकार की ओर से संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए जो दवाएं व इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं, उनका भी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। लापरवाही के चलते ही 24 घंटे के भीतर वार्ड में भर्ती सदर ब्लॉक में तैनात एडीओ एसटी सुरेश तिवारी व उनके बेटे दीपक तिवारी की मौत हो गई।
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इसके अलावा सात अन्य मरीजों ने भी दम तोड़ दिया। कोविड एल टू अस्पताल में अव्यवस्था का आलम यह है कि ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों की रिपोर्टिंग पर चिकित्सक अपने चेंबर से ही मरीजों को दवाएं देने के लिए बोल देते हैं। मरीजों के पास जाकर उनका बेहतर उपचार करना व उनकी पीड़ा जानने का प्रयास नहीं करते। जिसके चलते लगातार भर्ती मरीज दम तोड़ रहे हैं। इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अरविंद श्रीवास्तव का कहना है कि वार्ड में भर्ती मरीजों का बेहतर उपचार करने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायतें मिलने पर मैं स्वयं निरीक्षण करने जाता हूं।
आठ घंटे तक पड़ा रहा मरीज का शव
कोविड अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मचारी व डाक्टर किस तरह कर रहे हैं, इसका अंदाजा दो दिन पहले अस्पताल में भर्ती मरीज की मौत के बाद लगाया जा सकता है। अस्पताल में भर्ती मरीज की 8 घंटे पहले मौत हो गई। डाक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इस बीच परिवार का एक सदस्य पीपीई किट पहनकर मरीज को देखने पहुंचा। उसके चिल्लाने पर डॉक्टरों को जानकारी हो सकी। इसे लेकर काफी देर तक हंगामा हुआ। हालांकि कुछ देर बाद डाक्टर व स्वास्थ्य कर्मचारी पुराने ढर्रे पर ही काम करने लगे।
संक्रमित मरीजों की मौत का आंकड़ा छिपा रहा स्वास्थ्य विभाग
जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत के आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के अफसर छिपा रहे हैं। कोविड एल टू अस्पताल में में हर तीन से चार घंटे बाद एक मरीज की मौत हो जा रही है, मगर इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को नहीं दी जा रही है। फर्जी रिपोर्टिंग को भी स्वास्थ्य विभाग के अफसर आधार बना रहे हैं। ताकि कम से कम मौतों का आंकड़ा दिखा सकें।
मरीजों को ऑक्सीजन देने की नहीं है जानकारी
कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने जिन कर्मचारियों को तैनात किया है, उन्हें यह भी नहीं पता कि किस समय मरीजों को कितनी मात्रा में ऑक्सीजन देना जरूरी है। मरीज के तीमारदारों के अनुसार ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू करने के बाद न तो डॉक्टर और न ही स्वास्थ्य कर्मचारी चेक करने जाते हैं। यदि मरीज अधिक चीखते-चिल्लाते हैं तो उन्हें डांटकर खामोश करा दिया जाता है। परिवार के लोगों के वार्ड में जाने पर प्रतिबंध है। हालांकि इसके बाद भी बहुत से लोग पीपीई किट पहनकर प्रवेश कर जाते हैं, जिसके बाद उन्हें हकीकत का पता चलता है।
आला अधिकारी भी नहीं रखते नजर
कोविड एल टू अस्पताल में भर्ती मरीजों की सुविधाओं वह उनके इलाज की ओर जिले के आला अधिकारी भी ध्यान नहीं देते। केवल कागजों पर ही समीक्षा की जाती है। वार्ड में भर्ती मरीजों का इलाज व उनको मिल रहीं सुविधाओं का जायजा लेने के लिए अफसरों को फुर्सत नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के मुखिया भी कभी-कभार ही वार्ड में जाते हैं, मगर उनके पहुंचने से पहले ही वहां तैनात किए गए डॉक्टरों व कर्मचारियों को जानकारी हो जाती है। जिसके बाद व्यवस्थाएं दुरुस्त करा दी जाती हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही से लगातार मरीजों की मौत हो रही है।