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खड़ंजा निर्माण नहीं और निकाल लिए सात लाख
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sat, 19 Aug 2017 12:04 AM IST
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संडवा चंद्रिका विकास खंड के गौराडांड ग्राम पंचायत में नाला खुदाई हुए बगैर ही धनराशि का भुगतान कर लिया गया है, जबकि तिवारीपुर में खड़ंजा निर्माण नहीं होने के बावजूद सात लाख रुपये निकाल लिए गए हैं। खजुरी और रामनगरभोजपुर गांव में ईंटें कम पड़ गई हैं। 40 कार्यों का भुगतान तो हुआ है, मगर बीडीओ के पत्रावली नहीं मुहैया कराने पर अवैध कार्य घोषित करने की तैयारी करने के साथ ही श्रमदान घोषित किया जाएगा।
संडवा चंद्रिका विकास खंड में 1.92 करोड़ रुपये की जांच करने पहुंची टीम को अनेक चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। गौराडांड ग्रामपंचायत में 300 मीटर लंबे नाले की खुदाई नहीं हुई है, और धनराशि का भुगतान कर लिया गया है। तिवारीपुर ग्राम पंचायत में गौरा से मनीपुर गांव के बीच खड़ंजा निर्माण के लिए सात लाख रुपये का भुगतान कर लिया गया है, जबकि मौके पर एक ईंट नहीं बिछी हैं। ग्राम पंचायत खजुरी और रामनगर भोजपुर में भुगतान के सापेक्ष ईंट का प्रयोग ही नहीं किया गया है। गुरुवार की जांच में उजागर हुआ कि तकनीकी सहायक ने जितनी ईंट दिखाया था, उसकी संख्या काफी कम थी। 94 प्रोजेक्ट पर 1.92 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। मगर गुरुवार को बीडीओ ने सिर्फ 54 प्रोजेक्ट की फाइल जांच टीम को मुहैया कराया था। 40 प्रोजेक्ट की फाइल तैयार नहीं होने से नाराज अफसरों ने अवैध घोषित करते हुए रिकवरी की तैयारी की जा रही है। शुक्रवार को जांच अधिकारियों ने डीसी मनरेगा को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है, मगर अधिकारियों की व्यस्तता के चलते किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सीडीओ राजकमल यादव ने बताया अभी जांच रिपोर्ट आई नहीं है, आने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने इतना जरुर कहा कि जिस कार्य फाइल अभी तक नहीं मिली है, उसे श्रमदान घोषित कर धनराशि की रिकवरी की जाएगी।
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संडवा चंद्रिका विकास खंड में 1.92 करोड़ रुपये की जांच करने पहुंची टीम को अनेक चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। गौराडांड ग्रामपंचायत में 300 मीटर लंबे नाले की खुदाई नहीं हुई है, और धनराशि का भुगतान कर लिया गया है। तिवारीपुर ग्राम पंचायत में गौरा से मनीपुर गांव के बीच खड़ंजा निर्माण के लिए सात लाख रुपये का भुगतान कर लिया गया है, जबकि मौके पर एक ईंट नहीं बिछी हैं। ग्राम पंचायत खजुरी और रामनगर भोजपुर में भुगतान के सापेक्ष ईंट का प्रयोग ही नहीं किया गया है। गुरुवार की जांच में उजागर हुआ कि तकनीकी सहायक ने जितनी ईंट दिखाया था, उसकी संख्या काफी कम थी। 94 प्रोजेक्ट पर 1.92 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। मगर गुरुवार को बीडीओ ने सिर्फ 54 प्रोजेक्ट की फाइल जांच टीम को मुहैया कराया था। 40 प्रोजेक्ट की फाइल तैयार नहीं होने से नाराज अफसरों ने अवैध घोषित करते हुए रिकवरी की तैयारी की जा रही है। शुक्रवार को जांच अधिकारियों ने डीसी मनरेगा को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है, मगर अधिकारियों की व्यस्तता के चलते किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सीडीओ राजकमल यादव ने बताया अभी जांच रिपोर्ट आई नहीं है, आने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने इतना जरुर कहा कि जिस कार्य फाइल अभी तक नहीं मिली है, उसे श्रमदान घोषित कर धनराशि की रिकवरी की जाएगी।
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