फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   640 scholl run by only one teacher

एक अध्यापक के भरोसे चल रहे 640 स्कूल

Tue, 04 Sep 2018 11:53 PM IST
pratpgarh
pratpgarh Updated Tue, 04 Sep 2018 11:53 PM IST
विज्ञापन
प्राइमरी स्कूलों में पांच-पांच कक्षाएं और मिडिल स्कूलों में तीन-तीन कक्षाएं चलती हैं, मगर बच्चों को पढ़ाने के  लिए एक-एक अध्यापकों की तैनाती की गई है। अगर किसी पारिवारिक और विभागीय समस्या में गुरुजी उलझ गए तो स्कूल में आने वाले बच्चों को लौटने के सिवा कोई रास्ता नहीं होता है। ऐसे जिले में एक या दो नहीं, बल्कि  640 स्कूल हैं।  
विज्ञापन

जिले के परिषदीय स्कूलों की पढ़ाई पूरी तरह चौपट हो गई है। आश्चर्य की बात तो यह है कि जिस स्कूल में बच्चे हैं, वहां पर्याप्त टीचर नहीं हैं, जिस स्कूल में टीचर हैं, वहां बच्चों की संख्या पर्याप्त नहीं हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के  स्कूलों की पढ़ाई पूरी तरह चौपट हो गई है। अध्यापक मनमानी पर उतारू हैं। अफसरों को स्कूल की हकीकत देखने का वक्त नहीं है। इससे प्राइमरी शिक्षा पूरी तरह लडख़ड़ा गई है। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले में 640 स्कूल ऐेसे हैं, जहां मात्र एक-एक अध्यापक तैनात हैं। अब आप ही सोचिए कि  एक अध्यापक स्कूल की व्यवस्था देखेगा, या बच्चों की पढ़ाई और गुणवत्ता पर ध्यान देगा। बीआरसी पर प्रतिमाह होनेे वाली बैठक में प्रभारी हेडमास्टरों को प्रतिभाग करना होता है, ऐसे में स्कूल बंद करके ही आना पड़ता है। स्कूलों का आलम यह है कि शहर के आसपास के स्कूलों में अध्यापकों की संख्या अधिक है और बच्चों की संख्या कम है। सदर विकास खंड के प्राइमरी स्कूल रूपापुर, कादीपुर में बच्चों से अधिक अध्यापकों को तैनात किया गया है, जबकि ग्रामीण इलाकों में बच्चों की संख्या के अनुपात में अध्यापकों की तैनाती नहीं की गई है। ऐसे में पठन-पाठन पूरी तरह चौपट हो गया है।  
विज्ञापन


मॉडल स्कूलों में नहीं प्रारंभ हुई पढ़ाई  
जिले के 312 मॉडल स्कूलों में भी पढ़ाई नहीं प्रारंभ हो पाई है। लिखित परीक्षा और साक्षात्कार तो हुआ, मगर अभी तक शिक्षकों को नियुक्ति पत्र नहीं जारी किया गया है। इससे अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में दाखिला लेने वाले बच्चे अब लौटने लगे हैं।  
विज्ञापन
विज्ञापन


बगैर पुस्तकों के हो रही है पढ़ाई 
मॉडल स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम पढ़ाई होनी है, मगर अभी तक अंग्रेजी माध्यम की पुस्तक ही नहीं आई हैं। इससे स्कूलों में पढ़ाई प्रारंभ नहीं हो पाई है। अफसरों का दावा है कि पुरानी पुस्तकों से पढ़ाई हो रही है। मगर आश्चर्य की बात तो यह है कि पिछले वर्ष मात्र दो स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम पढ़ाई हुई थी, फिर 312 स्कूलों में पुरानी पुस्तकें कहां से आ गर्इं।  


जिस स्कूल में एक-एक अध्यापक हैं, अगले सप्ताह उसमें दो-दो टीचर हो जाएंगे। 630 अभ्यर्थियों ने काउंसलिंग कराई है, आठ सितंबर के बाद नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। हालांकि प्राइमरी स्कूलों में शिक्षामित्र भी तैनात हैं।  
अशोक कुमार सिंह, बीएसए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed